जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसका असर घरेलू बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले।
शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 172.48 अंक गिरकर 77,786.41 पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 90.35 अंक की गिरावट के साथ 24,343.50 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाइटन, अल्ट्राटेक सीमेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और इंफोसिस नुकसान में रहे। दूसरी ओर इंटरग्लोब एविएशन, टेक महिंद्रा, इटरनल और एनटीपीसी जैसे शेयरों में तेजी देखने को मिली।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर के मुताबिक, अमेरिका-ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर जारी गतिरोध के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। उन्होंने इसे घरेलू इक्विटी बाजार के लिए प्रमुख चिंता बताया। महंगे तेल से भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।
वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.82 फीसदी की गिरावट के बावजूद 88.25 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। एचएसटी वेल्थ के संस्थापक एवं सीईओ हरिसिल्वन राधाकृष्णन के अनुसार, ब्रेंट के 89 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने के बावजूद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की स्थिति के कारण ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम ऊंचा बना हुआ है।
वैश्विक बाजारों में तेजी का रुख
भारतीय बाजार में गिरावट के विपरीत गुरुवार को एशियाई बाजारों में सकारात्मक रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।
इससे पहले बुधवार को अमेरिकी बाजार भी ज्यादातर बढ़त के साथ बंद हुए थे। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के मुद्रास्फीति संबंधी आंकड़ों से फेडरल रिजर्व की ओर से मौद्रिक नीति सख्त किए जाने की चिंता कुछ कम हुई, जिससे वैश्विक निवेश धारणा को सहारा मिला। दक्षिण कोरिया के कोस्पी में करीब 5 फीसदी की जोरदार तेजी दर्ज की गई।
एफआईआई की बिकवाली जारी
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली भारतीय बाजार के लिए अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को 1,002.50 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिक्री की।
इससे पहले बुधवार को सेंसेक्स 187.90 अंक यानी 0.24 फीसदी गिरकर 77,966.35 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 35.75 अंक यानी 0.15 फीसदी टूटकर 24,435.95 पर बंद हुआ।
आगे किन संकेतकों पर रहेगी नजर?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक महंगाई, केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।
महंगे कच्चे तेल और लगातार विदेशी बिकवाली से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम के साथ-साथ घरेलू आर्थिक संकेतकों पर भी रहेगी।

