फिल्म: आवारापन 2
निर्देशक: नितिन कक्कड़
कलाकार: इमरान हाशमी, दिशा पाटनी, शबाना आजमी, पूरन गब्बी, सुविंदर विक्की
अवधि: 140 मिनट
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐/5
जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: करीब दो दशक बाद इमरान हाशमी एक बार फिर शिवम पंडित के किरदार में बड़े पर्दे पर लौटे हैं। 2007 में आई ‘आवारापन’ के बाद ‘आवारापन 2’ के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि क्या यह फिल्म पुराने किरदार और उसकी भावनात्मक विरासत के साथ न्याय कर पाएगी। निर्देशक नितिन कक्कड़ की यह फिल्म काफी हद तक इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार करती नजर आती है।
‘आवारापन 2’ सिर्फ पुरानी फिल्म की लोकप्रियता को भुनाने वाला सीक्वल नहीं है, बल्कि शिवम पंडित की कहानी को आगे बढ़ाने की कोशिश करती है। फिल्म में पुराने दर्द, अपराधबोध, गुस्से और मुक्ति की तलाश को एक नई क्राइम थ्रिलर की कहानी के साथ जोड़ा गया है।
शिवम की जिंदगी में फिर लौटी मुसीबत
फिल्म की कहानी शिवम के अतीत से जुड़ी हुई है। आलिया की यादों से अब भी बाहर नहीं निकल पाया शिवम एक दिन उसकी कब्र के पास एक लावारिस बच्ची को पाता है। वह बच्ची को अनाथालय पहुंचाता है और उसकी देखभाल का खर्च उठाने लगता है। वह उसका नाम आलिया रखता है।
बाद में एक दंपती उस बच्ची को गोद ले लेता है। शिवम को लगता है कि उसने बच्ची को एक परिवार देकर सही फैसला किया है, लेकिन जल्द ही उसकी यह खुशी चिंता में बदल जाती है। उसे पता चलता है कि बच्ची को गोद लेने वाले लोग अंतरराष्ट्रीय बाल तस्करी सिंडिकेट से जुड़े हैं।
जब इंटरपोल उसे बताता है कि आलिया का अपहरण हो गया है, तो शिवम को मजबूर होकर उस अपराध की दुनिया में वापस लौटना पड़ता है, जिसे वह पीछे छोड़ चुका था।
कहानी में बड़ा हुआ क्राइम का दायरा
पहली ‘आवारापन’ जहां शिवम के व्यक्तिगत बदलाव और उसकी भावनात्मक यात्रा पर केंद्रित थी, वहीं इसका सीक्वल कहानी को बड़े स्तर पर ले जाता है। बाल तस्करी, संगठित अपराध, ड्रग्स, बदला और बलिदान कहानी के अहम हिस्से बनते हैं।
फिल्म का दायरा बड़ा है और एक्शन भी पहले से ज्यादा है। इसके बावजूद कहानी का भावनात्मक केंद्र शिवम की मुक्ति की तलाश ही रहता है। यही वजह है कि फिल्म सिर्फ एक सामान्य क्राइम थ्रिलर बनकर नहीं रह जाती।
इमरान हाशमी फिर बने फिल्म की जान
शिवम पंडित के किरदार में इमरान हाशमी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनके किरदार में उम्र के साथ आया ठहराव, पुराना दर्द और भीतर दबा गुस्सा साफ नजर आता है। इमरान ने शिवम के भावनात्मक संघर्ष और एक्शन दोनों हिस्सों को मजबूती से संभाला है।
उनकी वापसी सिर्फ नॉस्टैल्जिया तक सीमित नहीं रहती। फिल्म उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश करती है जो अपराध की दुनिया छोड़ चुका था, लेकिन एक निजी रिश्ते और अपने पुराने अपराधबोध के कारण उसी अंधेरे संसार में वापस लौटने के लिए मजबूर हो जाता है।
दिशा पाटनी और पूरन गब्बी का असरदार काम
दिशा पाटनी ने जारा का किरदार निभाया है। जारा का परिवार अपराध की दुनिया से जुड़ा है और वह खुद परिस्थितियों का शिकार बनती है। दिशा को फिल्म में भावनात्मक रूप से मजबूत हिस्से मिले हैं और उन्होंने किरदार को गंभीरता के साथ निभाया है।
पूरन गब्बी ने जोरावर का किरदार निभाया है, जो ड्रग्स के कारोबार से जुड़ा है। उनका अंदाज फिल्म के आम गैंगस्टर किरदारों से अलग नजर आता है। उनके किरदार में अनिश्चितता और आक्रामकता दोनों दिखाई देती हैं।
शबाना आजमी भी नफीसा के किरदार में प्रभाव छोड़ती हैं। वहीं सुविंदर विक्की, विजयंत कोहली, अतुल कुमार और अनिरुद्ध रावल फिल्म की क्राइम और इन्वेस्टिगेशन वाली दुनिया को मजबूत बनाते हैं।
म्यूजिक है फिल्म की बड़ी ताकत
‘आवारापन 2’ का संगीत इसे पहली फिल्म से सबसे मजबूती से जोड़ता है। मिथुन, अमाल मलिक और जीत गांगुली ने फिल्म के म्यूजिकल फ्लेवर को आगे बढ़ाया है। सईद कादरी और रश्मि विराग के गीत फिल्म की भावनात्मक कहानी को सपोर्ट करते हैं।
‘तेरा मेरा रिश्ता’ और ‘तो फिर आओ’ जैसे पुराने गानों को नए अंदाज में पेश किया गया है। वहीं अरिजीत सिंह की आवाज में ‘ये आवारापन’ फिल्म के इमोशनल पक्ष को और मजबूत करता है।
खास बात यह है कि संगीत सिर्फ पुरानी यादों को ताजा करने के लिए इस्तेमाल नहीं हुआ है। गाने कहानी के माहौल और शिवम की मनोदशा को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं।
क्या फिल्म पहली ‘आवारापन’ जैसी है?
पूरी तरह नहीं। और शायद यही इसकी सबसे बड़ी खासियत भी है। पहली फिल्म ज्यादा निजी, उदास और इंटिमेट थी। ‘आवारापन 2’ का पैमाना बड़ा है और यह एक्शन व क्राइम थ्रिलर के तौर पर ज्यादा महत्वाकांक्षी नजर आती है।
फिल्म 2007 की कहानी को दोहराने के बजाय शिवम की जिंदगी का अगला अध्याय दिखाती है। इसमें पुराना दर्द और भावनात्मक जुड़ाव मौजूद है, लेकिन कहानी को 2026 के दर्शकों के हिसाब से बड़े स्तर पर पेश किया गया है।
अंतिम फैसला
‘आवारापन 2’ उन दर्शकों को खास तौर पर पसंद आ सकती है, जिन्होंने पहली फिल्म में शिवम पंडित के किरदार से जुड़ाव महसूस किया था। इमरान हाशमी की दमदार वापसी, बड़े स्तर की क्राइम थ्रिलर, एक्शन और मजबूत म्यूजिक फिल्म को प्रभावी बनाते हैं।
हो सकता है कि इसमें पहली ‘आवारापन’ जैसी निजी और उदास भावनात्मक गहराई न हो, लेकिन सीक्वल उसी कहानी को दोहराने के बजाय उसे आगे बढ़ाने की कोशिश करता है।

