जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन का आज 40वां दिन है। आज किसानों की सरकार के साथ 8वें राउंड की बातचीत होगी। सरकार को उम्मीद है कि आज आंदोलन खत्म हो सकता है। वहीं किसान संगठनों ने कहा है कि सरकार ने मांगें नहीं मानी तो प्रदर्शन और तेज किया जाएगा। किसान संगठनों के नेताओं का कहना है कि बातचीत का नतीजा नहीं निकला तो 13 जनवरी को कृषि कानूनों की कॉपी जलाकर लोहड़ी मनाएंगे।
दो मसले अब भी अनसुलझे, आज नहीं बनी बात तो आगे क्या होगा?
30 दिसंबर की मीटिंग में दो मुद्दों पर सहमति बनी थी
- पराली जलाने पर केस दर्ज नहीं होंगे: अभी एक करोड़ रुपए जुर्माना और पांच साल की कैद का प्रोविजन है। सरकार इसे हटाने को राजी हुई।
- बिजली अधिनियम में बदलाव नहीं: किसानों को आशंका है कि इस कानून से बिजली सब्सिडी बंद होगी। अब यह कानून नहीं बनेगा।
…तो इसलिए किसानों की उम्मीद बढ़ी
- दो मुद्दों पर सहमति बनने के बाद किसानों के रुख में नरमी दिखी और उन्होंने 31 दिसंबर को होने वाली ट्रैक्टर रैली को टाल दिया। आज इन दो अहम मुद्दों पर बातचीत होगी।
- किसान तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं।
- किसानों का कहना है कि एमएसपी पर अलग कानून बने, ताकि उन्हें सही दाम मिलें।
हल निकलने की ये है उम्मीद ?
सूत्रों के मुताबिक, आज की बैठक में किसानों के बड़े मुद्दों का हल भी निकल सकता है। सरकार समर्थन मूल्य (MSP) और एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) के मुद्दों पर लिखित में भरोसा दे सकती है। इसके साथ ही ऐसी व्यवस्था की जा सकती है कि प्राइवेट कंपनियां मंडियों में एमएसपी से कम भाव पर फसलों की खरीद नहीं कर पाएं।
अब तक हुई सात बैठकें
पहला दौरः 14 अक्टूबररिजल्ट: मीटिंग में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की जगह कृषि सचिव आए। किसान संगठनों ने मीटिंग का बायकॉट कर दिया। वो कृषि मंत्री से ही बात करना चाहते थे। दूसरा दौरः 13 नवंबररिजल्ट: कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के साथ मीटिंग की। 7 घंटे तक बातचीत चली, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। तीसरा दौरः 1 दिसंबररिजल्ट: तीन घंटे बात हुई। सरकार ने एक्सपर्ट कमेटी बनाने का सुझाव दिया, लेकिन किसान संगठन तीनों कानून रद्द करने की मांग पर ही अड़े रहे। चौथा दौरः 3 दिसंबररिजल्ट: साढ़े 7 घंटे तक बातचीत चली। सरकार ने वादा किया कि MSP से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। किसानों का कहना था सरकार MSP पर गारंटी देने के साथ-साथ तीनों कानून भी रद्द करे। 5वां दौरः 5 दिसंबररिजल्ट: सरकार MSP पर लिखित गारंटी देने को तैयार हुई, लेकिन किसानों ने साफ कहा कि कानून रद्द करने पर सरकार हां या न में जवाब दे। 6वां दौरः 8 दिसंबररिजल्ट: भारत बंद के दिन ही गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की। अगले दिन सरकार ने 22 पेज का प्रस्ताव दिया, लेकिन किसान संगठनों ने इसे ठुकरा दिया। 7वां दौर: 30 दिसंबररिजल्ट: नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के 40 प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। दो मुद्दों पर मतभेद कायम, लेकिन दो पर रजामंदी बनी। |

