- आरटीओ और आरएम रोडवेज ने हाथ खड़े किये, खुलेआम हो रही राजस्व चोरी
- बसों में ज्वलनशील पटाखे, केमिकल तक जा रहे, एक दर्जन प्वाइंट सक्रिय
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री आहवान कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा व्यापारी जीएसटी में पंजीकरण कराएं और राजस्व में वृद्धि करें वहीं संभागीय परिवहन अधिकारी और रोडवेज के अधिकारी खुलकर रोडवेज और प्राइवेट बसों में माल ढुलाई को अनदेखा करके सरकार को करोड़ों के राजस्व को चूना लगवा रहे हैं। शहर में एक दर्जन ऐसे कुख्यात प्वाइंट्स बन गये हैं। जहां से इन बसों में माल भरकर दूसरे शहरों और राज्यों में भेजा जाता है।
शहर में राजकीय इंटर कालेज, भैंसाली बस अड्डा, बंसल सिनेमा, घंटाघर, तिरंगा गेट हापुड़ अड्डा, मेट्रो प्लाजा, नवीन मंडी गेट, सोहराब गेट बस अड्डा, दिल्ली रोड, एल ब्लॉक शास्त्रीनगर आदि जगहों पर खुलेआम रोडवेज और प्राइवेट बसों में माल लाद कर दूसरे शहरों में भेजा जाता है।
यह नेटवर्क इतना जबरदस्त है कि दूसरे राज्यों में भी आसानी से माल भेजा जा रहा है। बस कंडक्टरों की सेटिंग पुलिस और रोडवेज तथा आरटीओ आॅफिस से होती है और उनकी कोई चेकिंग तक नहीं करता है। मेरठ से राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सामान इंटर कनेक्टिंग बसों के जरिये भेजा जा रहा है।
दरअसल, बसों के लिये किसी भी शहर में नो एंट्री का नियम लागू नहीं होता है जबकि ट्रकों पर यह नियम सख्ती से लागू होता है। बस के जरिये सामान भेजने का एक फायदा यह है कि सामान जल्दी पहुंच जाता है और उसमें सरकार को न टैक्स देना पड़ता है और न कागजात दिखाने पड़ते हैं।
जबकि ट्रांसपोर्टर के जरिये सामान भिजवाने तमाम तरह की औपचारिकताएं निभानी पड़ती है। बसों में माल ढुलाई का बुरा असर ट्रांसपोर्टरों के बिजनेस पर पड़ रहा है। कोरोना काल में बर्बाद हुए ट्रांसपोर्टर एक तरफ डीजल की दरों में वृद्धि से परेशान है। वहीं, रोडवेज की बसों ने रही सही कसर पूरी कर दी। मेरठ गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने कई बार आरटीओ से शिकायत की तो उनको जवाब मिला कि रोडवेज की बसों को रोकते हैं तो सवारी बवाल कर देती है।
वहीं, रोडवेज के आरएम भी लाचारी जाहिर करते हैं। हाल ही में जीएसटी के अधिकारियों ने ट्रांसपोर्ट नगर में पंजीकरण को लेकर संपर्क अभियान चलाया तो एसोसिएशन ने यह मुद्दा उठाया था। एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता और महामंत्री राकेश विज का कहना है कि बसों में माल ढुलाई से करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है, लेकिन संबंधित विभाग इस ओर कदम उठाने को तैयार नहीं है।
हैरानी की बात यह है कि इन बसों में ज्वलनशील पदार्थों, पटाखे, केमिकल और अवैध सामान तक जाते हैं और इनको पुलिस और आरटीओ रोक कर चेक करना जरुरी नहीं समझते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि अगर ऐसा चलता रहा तो ट्रांसपोर्ट उद्योग खतरे में पड़ जाएगा।

