जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: फुटपाथों के हालात मेरठ में भी सूरत से जुदा नहीं है। यहां भी पहले कई हादसे हो चुके हैं, मगर बावजूद इसके रात को फुटपाथों पर जगह-जगह लोग सोते नजरआते हैं। सूरत में हुए हादसे के बाद जनवाणी ने बुधवार रात में पड़ताल की तो यहीं स्थिति सामने आई।
सड़क के बीच में बने डिवाइडर पर भी लोग सोते हुए मिले। फुटबाल चौराहा, घंटाघर, बच्चा पार्क, बेगमपुल डिवाइडर पर लोग सोते हुए मिले। भिखारी और बाहरी मजदूर सड़क किनारे फुटपाथों व डिवाइडर पर सोते नजर आये। रात में रफ्तार से दौड़ने वाले वाहनों से इनकी जान को खतरा बना रहता हैं। ट्रक चालक शराब पीकर भी वाहनों को चलाते हैं, जिससे इस तरह के ज्यादा हादसे हो रहे हैं।
ये बरत रहे अनदेखी
नगर निगम ने शहर में रैन बसेरे बना रखे हैं, लेकिन फुटपाथ पर सोने वालों को रैन बसरों तक ले जाना चाहिए।
प्रशासन इनके पुर्नवास के प्लान को क्रियान्वित नहीं कर पा रहा हैं। समाज कल्याण विभाग इन्हें चिन्हित ही नहीं कर पा रहा है। पुनर्वास योजना सिर्फ बैठकों व कागजों तक सीमित, धरातल पर काम नहीं हो पा रहा है।
पुनर्वासन पर करने होंगे प्रयास
एनजीओ व राज्य सरकार की संयुक्त रूप से भिखारियों के पुर्नवास केन्द्र खोलने की दिशा में काम कर रही है। इसमें अब कहां देरी हैं, यह कुछ नहीं मालूम, लेकिन इसमें राज्य सरकार व एनजीओ प्रभावी तरीके से रुचि नहीं ले पा रहे हैं। भिखारियों के लिए पुनर्वास योजना अधिनियम लागू हैं, लेकिन इस पर काम नहीं हो पा रहा है।

