जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: राम मंदिर के चंदा एकत्र करने को लेकर टकराव की स्थिति बार-बार बन रही है, लेकिन भाजपा के नेता भी इसको लेकर सबक नहीं ले रहे हैं। एक-दो मामलों में भाजपा नेता आपा तक खो बैठे हैं, जिसके चलते भाजपा नेताओं की खासी किरकिरी हो रही है।
इंस्पेक्टर खरखौदा और भाजपा जिलाध्यक्ष अनुज राठी के बीच तो तनातनी सार्वजनिक हो चुकी हैं। यही नहीं, इंस्पेक्टर खरखौदा ने भाजपा जिलाध्यक्ष के व्यहवाहर से क्षुब्ध होकर जीडी में तस्करा तक डाल दिया था। मेरठ के खरखौदा में ही नहीं, बल्कि बुंलदशहर व सहारनपुर में भी इस तरह के मामले में सामने आ चुके हैं।
राम मंदिर के लिए चंदा एकत्र करना कोई गलत नहीं है। चंदा एकत्र करना चाहिए। क्योंकि राम मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी हैं, मगर जिस तरह की घटनाएं पेश आ रही हैं, वो माहौल बिगाड़ने वाली हैं। इसमें भाजपा नेताओं को भी सौहार्द का परिचय देना चाहिए, लेकिन यहां तो भाजपा के नेता उल्टे पुलिस से भी भिड़ रहे हैं।
इस तरह की घटनाओं से भाजपा नेता सबक नहीं ले रहे हैं। राम मंदिर के लिए चंदा एकत्र करने को लेकर सबसे पहला विवाद परतापुर थाना क्षेत्र के गून गेझा गांव में हुआ था, जहां पर हिंदू युवा वाहिनी के नेताओं को ग्रामीणों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था।
हालांकि बाद में दोनों पक्षों में परतापुर थाने पहुंचकर समझौता हो गया था, लेकिन टकराव की नौबत आखिर आई क्यों? इस घटना के बाद खरखौदा थाना क्षेत्र में भाजपा नेताओं और ग्रामीणों के बीच चंदा वसूली को लेकर टकराव बन गया था, जिसमें दोनों पक्षों के बीच मारपीट तक हो गई थी।
एक पक्ष भाजपा की तरफ से मुकदमा दर्ज कराया गया था, जबकि दूसरे पक्ष का मुकदमा पुलिस ने दर्ज नहीं किया। इसी को लेकर खरखौदा इंस्पेक्टर और भाजपा जिलाध्यक्ष अनुज राठी के बीच फोन पर ही वाक युद्ध हो गया था। इस मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष के रवैया से भाजपा की खासी किरकिरी हुई है।
इंस्पेक्टर खरखौदा ने भाजपा जिलाध्यक्ष के खिलाफ थाने की जीडी में तस्करा भी डाल दिया था। यही नहीं, बुलंदशहर में भी इस तरह का टकराव हो चुका है। राम मंदिर चंदा वसूली को लेकर जिस तरह के हालात बन रहे हैं, उससे तो यही लग रहा है कि चंदा वसूली कम टकराव ज्यादा हो रहा है।
सहारनपुर में भी बजरंग दल के कार्यकतार्ओं ने सार्वजनिक शौचालय को क्षतिग्रस्त कर दिया था। इसको लेकर भी टकराव बना, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी शौचालय को क्षति पहुंचाने वालों के खिलाफ प्रशासन मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करेगा?

