Thursday, April 2, 2026
- Advertisement -

अमृतवाणी: मित्रों का स्थान

अमृतवाणी ! 

महादेव गोविंद रानाडे बचपन से ही अत्यंत दयालु थे। वह कभी अमीर-गरीब के बीच अंतर नहीं करते थे। उनके लिए सभी मानस समान थे। उनके मित्र गरीब भी थे और अमीर थी उनके मित्रों में उनकी नौकरानी का बेटा भी शामिल था। रानाडे नौकरानी के बेटे के साथ खेलते थे और अपनी हर चीज उनसे मिल-बांट कर खाते थे। एक दिन रानाडे की मां ने लड्डू बनाए। उन्होंने दो लड्डू रानाडे को देते हुए कहा, बेटा, इसमें से एक लड्डू तुम खा लेना और दूसरा अपने मित्र को दे देना। रानाडे अपने मित्र के पास गए और बड़ा लड्डू मित्र को दे दिया व छोटा लड्डू स्वयं खाने लगे। यह देखकर उनका मित्र बोला, तुमने मुझे बड़ा लड्डू क्यों दिया? रानाडे मुस्करा कर बोले, तुम मेरे सबसे प्रिय दोस्त हो और दोस्त को हमेशा वह चीज देनी चाहिए जैसी हम अपने लिए कल्पना करते हैं। मेरा मन भी बड़ा लड्डू पाने का था, इसलिए मैंने वह तुम्हें दे दिया। मित्र रानाडे के गले लग गया और उसकी आंखों से आंसू निकल आए। वह बोला, रानाडे, मैं तुम्हें जीवन भर नहीं भूलूंगा और अपने जीवन में हमेशा अपने सच्चे दोस्तों को वही स्थान दूंगा जो तुमने मुझे दिया है। इसके बाद मित्र वहां से चला गया। रानाडे की मां यह देख रही थी। मित्र के जाने के बाद वह बोली, बेटा, तुम्हें यह विचार कैसे आया कि सच्चे दोस्त को उसी तरह कोई वस्तु देने का प्रयास करना चाहिए जैसी हम स्वयं पाना चाहते हैं। रानाडे बोले, मां, हम सभी को ज्यादा अच्छी वस्तु आकर्षित करती है। हमें दूसरों की भावना का सम्मान करते हुए उन्हें वह देने का प्रयास करना चाहिए जो वह पाना चाहते हैं लेकिन पा नहीं सकते। यह जवाब सुनकर रानाडे की मां ने उन्हें गले से लगा लिया।
spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Meerut News: कचहरी में बाइक में लगी अचानक आग, अफरा-तफरी का माहौल

जनवाणी संवाददाता | मेरठ: आज गुरूवार को मेरठ कचहरी परिसर...

MP: कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को FD घोटाले में 3 साल की जेल, तुरंत मिली जमानत

जनवाणी ब्यूरो | नई ​दिल्ली: दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट...

Rajnath Singh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का दावा,भारत ऊर्जा संकट से निपटने को पूरी तरह तैयार

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: केरल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर...
spot_imgspot_img