- किसानों की समस्याओं का अभी तक नहीं हुआ समाधान
- अधिकारियों ने जन सुनवाई केन्द्र बनाये जाने का प्रस्ताव भेजा
- किसान मांगों को लेकर अड़े, नहीं लेने दे रहे कब्जा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आवास विकास परिषद ने लोगों को एक ही स्कीम में वन बीएचके-2 बीएचके फ्लैट, भूखंड आदि देने के लिये वर्ष 2009 में स्कीम 11 की शुरूआत की थी, लेकिन दस साल होने को है यह स्कीम अभी तक लोगों को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पाई है। आवास विकास परिषद अभी तक यहां के किसानों से जमीन एक्वायर किये जाने को लेकर चले आ रहे विवादों का समाधान नहीं कर पाया है। जिस कारण स्कीम 11 की कनेक्टिविटी मुख्य मार्गों से सही प्रकार से नहीं हो पाई है। वहीं अधिकारियों ने आने वाले एक साल में सभी विवादों का निपटारा करने की बात कही है तो किसान मुआवजा व प्लॉट न दिये जाने पर आंदोलन का मन बनाये बैठे हैं।
आवास विकास परिषद की ओर से जागृति विहार एक्टेंशन में वर्ष 2009 में स्कीम 11 के लिये किसानों से जमीन एक्वायर की गई थी। इस स्कीम में वनबीएचके, टूबीएचके फ्लैट, आवासीय भूखंड, कॉमर्शियल भूखंड, कॉम्प्लेक्स आदि शामिल हैं। आवास विकास ने इस स्कीम को शुरू किया और यहां पर फ्लैट और भूखंड आदि के लिये लोगों से आवेदन भी लिये, लेकिन यह स्कीम अभी तक कामयाब नहीं हो पाई है। कुछ आवेदन रद हुए तो कुछ को कब्जा तक नहीं मिल पाया। विभाग अभी तक किसानों के साथ मुआवजे को लेकर चले आ रहे विवाद हो सुलझा नहीं पाया है, जिस कारण यहां अभी तक किसी को भी कब्जा नहीं मिल पाया है।
2009 में की थी जमी एक्वायर
किसान नेता रोहित गुर्जर ने बताया कि आवास विकास ने किसानों से वर्ष 2009 में स्कीम 11 के लिये जमीन एक्वायर की थी। आवास विकास ने काजीपुर,सरायकाजी के किसानों से 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर, कमालपुर के किसानों से 800 रुपये और घोसीपुर के किसानों से 600 रुपये प्रतिवर्ग मीटर के हिसाब से जमीन एक्वायर की थी। आरोप है कि आवास विकास ने वर्ष 2012 में घोसीपुर के किसानों का 196 रुपये प्रति वर्ग मीटर बढ़ा दिया और कमालपुर का भी 800 से 1000 कर दिया, लेकिन काजीपुर के किसानों का एक्वायर रेट नहीं बढ़ाया गया, जिसे लेकर किसानों का विवाद चला आ रहा है। किसान बढ़ाये गये सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा दिये जाने की मांग करता आ रहा है। इसके अलावा किसानों को पांच प्रतिशत के हिसाब से भूखंड भी आवंटित किये जाने थे, लेकिन वह भी अभी तक नहीं हो पाये। यहां विनोद, असफाक, इम्तियाज, तुलसीदास, नरेश, बिल्लू, श्रीपाल आदि रहे।
मुख्य मार्ग से नहीं हो पाई कनेक्टिविटी
स्कीम 11 को शुरू हुए 10 साल होने को हैं, लेकिन इस स्कीम की अभी तक मुख्य मार्ग से सही प्रकार से कनेक्टिविटी नहीं हो पाई है। यहां जाने के लिये एक रास्ता कुटी चौराहे से होकर जाता है जो कि काफी हद तक संकरा है। दूसरा मार्ग गढ़ रोड सरायकाजी से होकर जाता है यहां 45 फीट का मुख्य मार्ग बनाया जाना है, लेकिन अभी तक किसानों से विवाद न सुलझाये जाने पर यहां मार्ग नहीं बन पाया है। यही हाल सराय काजी और काजीपुर व घोसीपुर को होकर जाने वाले मार्गों को है यहां भी किसानों ने कब्जा नहीं लेने दिया, जिस कारण यहां आज तक कार्य बंद पड़ा है और मुख्य मार्ग का निर्माण नहीं हो पाया है। हालांकि विभाग की ओर से स्कीम के अंदर सड़क निर्माण व अन्य कार्य किया जा रह हैं।
जल्द सुलझाया जाएगा विवाद, बनेगा सुनवाई केन्द्र
अधिशासी अभियंता नीरज कुमार ने बताया कि मेरठ शहर में आवास विकास की यह स्कीम सबसे अच्छी स्कीम साबित होगी। किसानों के साथ भी विवाद को सुलझाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी इस स्कीम के तहत और फ्लैट व भूखंड आदि पास होने हैं। सेक्टर छह में उनकी ओर से जमीन की वास्तविक जांच (फिजीबिलेशन) कर शासन को भेज दिया गया है कि कहां फ्लैट, भूखंड, सड़क व पावर पंप आदि का निर्माण किया जा सकता है।
इसके बाद ही रजिस्ट्रेशन आदि की प्रक्रिया को शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को भी जल्द पूरा किया जाएगा बशर्ते जो किसान वास्तविक हकदार हैं वह अपनी बात अधिकारियों के सामने रखें। किसानों की समस्या के समाधान को सुनवाई केन्द्र बनाये जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। सालभर के अंदर किसानों की समस्याओं को समाधान किया जाएगा जिससे स्कीम 11 जल्द विकसित होगी। किसानों की समस्या का समाधान होते ही मुख्य मार्गों से योजना की सीधी कनेक्टिविटी होगी। दोनों ओर 45 फीट का मार्ग है।
किसान अब भी बो रहे जमीन
यहां किसान अभी तक जमीन पर फसल बोते चले आ रहे हैं। स्कीम 11 में काफी जमीन पर अभी तक किसानों का कब्जा है। किसान हर साल यहां फसल बोते चले आ रहे हैं, जिस कारण निर्माण कार्यों में परेशानी हो रही है। अभी तक कई प्रक्रियाओं को इस कारण शुरू नहीं किया जा रहा है।

