जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: व्हिकल एंट्री फीस के नाम पर कैंट बोर्ड के ठेके की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। शनिवार रात 12 बजे से सभी 11 प्वाइंटों पर टोल वसूली बंद हो जाएगी। इसलिए नए ठेका छोड़ने की कवायद चल रही है। इसके लिए करीब 3.25 लाख के नए ठेके के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बोर्ड सदस्यों को सीईओ कैंट ने शुक्रवार दोपहर 12 बजे बोर्ड बैठक का न्योता भेजा था।
कैंट बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियर अर्जुन सिंह राठौर व सीईओ कैंट नवेन्द्र नाथ समेत तमाम फौजी अफसर तथा एक निर्वाचित महिला सदस्य इंतजार करते रहे, लेकिन बोर्ड के सात निर्वाचित सदस्य नहीं पहुंचे, जिसके चलते बैठक का कोरम पूरा न होने की वजह से टोल के नए ठेके के लिए आई निविदा पर कोई चर्चा नहीं हो सकी। यदि प्रशासन के प्रतिनिधि के तौर पर एडीएम सिटी पहुंच गए होते तो संभवत: कोरम पूरा हो जाता और किसी नतीजे पर कैंट अफसर पहुंच जाते, लेकिन ऐसा हो न सका।

सीईओ के खिलाफ सदस्यों का मोर्चा
न्योते के बाद भी शुक्रवार की बोर्ड बैठक में न पहुंचने को सदस्यों का सीईओ के खिलाफ टोल के मुद्दे पर मोर्चा माना जा रहा है। इसके कई निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं। दरअसल, बोर्ड की पिछली बैठक में जो तय हुआ था उसी शर्त पर निविदा आयी है। मसलन दिल्ली रोड व रुड़की रोड प्वाइंट खत्म कि जाएंगे। जबकि एक नया टंचिंग ग्राउंड का प्वाइंट शामिल किया जाएगा, लेकिन जो सदस्य बोर्ड बैठक में नहीं पहुंचे उनको लेकर सवाल पूछा जा रहा है कि क्या वो ठेकेदार के साथ है या फिर पिछली बोर्ड में लिए गए फैसले।
कोर्ट में गए हैं ठेकेदार
कैंट बोर्ड के वर्तमान ठेकेदार पिछली बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में फरियाद करने के लिए गए हैं। बैठक में जो निर्णय लिया गया है उससे ठेकेदार इत्तेफाक नहीं रखते। हालांकि विधि विशेषज्ञों के राय में ठेकेदार के पास पर्याप्त विकल्प हैं, जबकि बोर्ड के पास सीमित विकल्प हैं। इसलिए सवाल उठ रहा है कि बोर्ड बैठक का अघोषित बहिष्कार क्या ठेकेदार का समर्थन है। या फिर यह मान लिया जाए कि ठेकेदार के ग्रीन सिग्नल का इंतजार किया जा रहा है।

अघोषित बहिष्कार के साइड इफेक्ट
बोर्ड बैठक के अघोषित बहिष्कार के साइड इफेक्ट से भी मैंबर अंजान नहीं हैं। नाम न छापे जाने की शर्त पर कुछ ने इस पर खुलकर चर्चा भी की है। उनका साफ मानना है कि अधिकारियों के खिलाफ पाला खींचकर पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर के समान है। तमाम सदस्यों की कुंडली बोर्ड प्रशासन के पास है। किस सदस्य की कौन-सी नस कमजोर है। यह भी अफसर जानते हैं, लेकिन बोर्ड बैठक में न जाने का निर्णय सामूहिक है, जब साथ रहने का फैसला हुआ है तो फिर अलग जाने लाइन लेना भी संभव नहीं।
सीईओ कैंट ने शनिवार को एक बार फिर बोर्ड बैठक बुलाई है। इसका न्योता सभी सदस्यों को भेज भी दिया गया है। जिन सदस्यों से जनवाणी संवाददाता की चर्चा हुई है। उन्होंने शनिवार को बुलाई बोर्ड बैठक में जाने की बात कही भी है, लेकिन शुक्रवार की बोर्ड बैठक के अघोषित बहिष्कार के सवाल पर उनका कहना था कि कुछ तो ऐसा छोड़ दो जिसकी पर्देदारी रह जाए।
दिल्ली और रुड़की रोड पर नहीं होगी टोल वसूली
कैंट बोर्ड प्रशासन ने व्हिकल एंट्री फीस के नाम पर दिए जाने वाले ठेके में दिल्ली रोड रुड़की रोड से गुजरने वाले टोल नॉकों पर वसूली को ना कर दिया है, लेकिन टंचिंग ग्राउंड किला मार्ग पर वसूली का नया प्वाइंट बनाया गया है। साथ ही मवाना रोड के प्वाइंट से गुजरने वाले मेरठ नंबर वाहनों से भी वसूली को मनाही कर दी गई है।
इससे पूर्व माना जा रहा था कि सभी प्वाइंटों पर मेरठ नंबर के व्यावसायिक वाहनों से टोल वसूली रोक दी गई है, लेकिन यह गलतफहमी आज दूर कर दी गई। केवल मवाना रोड से गुजरने वाले ही मेरठ नंबर वाले वाहनों से वसूली को ना किया गया है। इन तमाम शर्तों का विरोध ठेकेदार ने किया था। ठेकेदार प्रतिनिधि केपी सिंह का कहना है कि इन शर्तों के साथ करीब 18 करोड़ सालाना का ठेका चलाना संभव नहीं है।
सदस्यों में खिंची हैं तलवार, महाराजा गैस्ट हाउस में वार रूम
कैंट बोर्ड के सदस्यों में इन दिनों तलवार खींची हुई हैं। तीन गुट नजर आते हैं। पांच सदस्य एक तरफ, दो सदस्य एक तरफ, एक सदस्य ऐसे जिनका पता नहीं कि सुबह जिसके साथ चाय पी रहे हैं तो शाम को उनके साथ ही गिलास टकराएंगे, जबकि एक महिला सदस्य को बाकी सदस्यों ने अलग-थलग किया हुआ है।
दरअसल, इस सारे घमासान की फसाद उपाध्यक्ष की कुर्सी है। रक्षा मंत्रालय ने बोर्ड का कार्यकाल तो बढ़ा दिया है, लेकिन उपाध्यक्ष को लेकर तस्वीर साफ नहीं। उपाध्यक्ष के चुनाव पर कोई गाइड लाइन न होने के कारण ही बोर्ड के सदस्यों में घमासान मची है, लेकिन जानकारों की माने सदस्यों के गुटों में भी गुट बने हुए हैं। जिन सदस्यों का वार रूम महाराजा गेस्ट हाउस बताया जा रहा है, उनमें भी घमासान मची है।
इसकी जड़ चुनाव के नए दावेदार बताए जा रहे हैं। वार रूम में टिकट के नए दावेदारों की वजह से ही वहां मौजूद सदस्यों में शंका का बीज पड़ गया है। हेडट्रिक की तैयारी में लगे सदस्य को नए दावेदार की वार रूम में मौजूदगी फूटी आंख नहीं सुहा रही है। नौबत यहीं तक नहीं है।
जिनको अब तक उपाध्यक्ष खेमे में माना जाता रहा है उन्होंने भी कैंट बोर्ड के मौसम में आए बदलाव को देखते हुए अब महाराजा गैस्ट हाउस का रूख कर लिया है। हालांकि उपाध्यक्ष खेमे का दावा है एक और एक 11 का है। इसके पीछे उनका तर्क कैंट विधायक के साथ का है, लेकिन संगठन के सूत्रों की मानें तो महाराजा गेस्ट हाउस का खेमा तमाम चालें बेहद सधी हुई और संभल कर चल रहा है।
यह खेमा संगठन में धुर विरोधी माने जाने वाले सांसद व विधायक दोनों को साधने में लगा है। दोनों से तार जोडेÞ हुए हैं और संगठन तो पहले से ही साथ है। ये तमाम घटनाचक्र कैंट बोर्ड में आने वाले दिनों में नया गुल खिलाने का संकेत दे रहे हैं।
सब एरिया में एडजर्न मीटिंग कर रचा जा चुका इतिहास
बोर्ड के नखरों के चलते सब एरिया मुख्यालय में एडजर्न मीटिंग कर एक बार पूर्व में इतिहास रचा जा चुका है। साल 1996 के दौर में तत्कालीन सब एरिया कमांडर व बोर्ड अध्यक्ष अमरजीत सिंह पूनिया ऐसा कर चुके हैं। दरअसल हुआ यह था कि तत्कालीन बोर्ड के वार्ड चार के सदस्य नरेन्द्रग जायसवाल ने सीईओ एसएस पुजारी मैडम की ओर से बुलाई बैठक का बहिष्कार कर दिया था।
पूरे घटनाक्रम को लेकर सब एरिया कमांडर जो बोर्ड के अध्यक्ष भी थे बुरी तरह से उखड़ गए। बताया गया है कि उन्होंने उसी दिन दो घंटे बाद एडजर्न मीटिंग का एजेंडा तमाम सदस्यों को भेज दिया। अमरजीत सिंह पूनिया ने यहां तक आदेश दिए थे कि केवल दिनेश गोयल व राजकुमार गुप्ता ही बोर्ड बैठक में पहुंचे और हुआ भी ऐसा ही। तब जानकीनाथ सूरी खेमे के वार्ड एक के सदस्य केपी सिंह यादव, वार्ड तीन के सुनील वाधवा, वार्ड चार के नरेन्द्र जायसवाल वार्ड पांच के दीपक ऐलन व वार्ड सात के प्रहलाद सिंह वीर सब एरिया में बुलाई गई बैठक में नहीं भाग ले सके।
तब के बोर्ड अध्यक्ष अमरजीत सिंह पूनिया ने एडजर्न मीटिंग कर इतिहास भी रच दिया। सख्त मिजाज की सीईओ एसएस पुजारी तो अपने हाथ से बोर्ड मीटिंग की मिनिटस तैयार करती थीं। इस बात का सबूत तत्कालीन बोर्ड बैठकों की मिनिटस में आज भी मौजूद हैं। जैसा तब अमरजीत सिंह पूनिया ने किया था वैसा ही कुछ शुक्रवार को किए जाने कयास लगाए जा रहे थे।
बताया जाता है कि जैसे ही सदस्यों के पास बैठक का एजेंडा पहुंचा उसमें जाने से पहले सभी एक बोर्ड के निर्वाचित सदस्य के आवास पर जमा हुए। वहां ठेकेदार के आने की भी बात सुनने में आ रही थी, लेकिन न जाने ऐसा क्या हुआ कि बोर्ड बैठक का कार्यक्रम मुलतवी कर दिया गया।

