- दिनभर ऐसे ही चला आॅपरेशन शाम को फिर फेरबदल
- पिंजरे के दरवाजे पर डटे रहे दो तेंदुए नहीं घुसे अंदर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ/किठौर: पूरे आठ दिन बीत गए सर्च आॅपरेशन चलते हुए, लेकिन वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट और वनकर्मियों की टीमें तेंदुआ परिवार को पकड़ नहीं पाई हैं। शनिवार को नई लोकेशन पर लगे पिंजरे के पास दो तेंदुए 10 घंटे तक डटे रहे वनकर्मी उनकी निगरानी के साथ पुरानी लोकेशन पर मुस्तैद रहे। बाद में एसडीओ ने पुरानी लोकेशन वाले पिंजरे को भी नई लोकेशन के इर्द-गिर्द लगवा दिया। खास बात यह है कि एक्सपर्ट की राय पर तीनों पिंजरों में तेंदुए के लिए अलग-अलग जन्तु रखे गए हैं।
वनकर्मी और विशेषज्ञों की टीम के भरसक प्रयास के बावजूद तेंदुआ सर्च आॅपरेशन सफल होता नहीं दिख रहा है। शुक्रवार रात नई लोकेशन पर लगाए गए पिंजरे के पास एक तेंदुआ शनिवार तड़के तीन बजे और दूसरा 10 बजे जाकर बैठ गया। दोनों तेंदुए शाम लगभग 4:30 बजे तक बैठे रहे। इन तेंदुओं को ग्रामीणों, वनकर्मियों और एक्सपटर््स की टीम ने बखूबी देखा। लेकिन पकड़ नहींं पाए।
आलम यह रहा कि दोनों तेंदुए नई लोकेशन और टीम पुरानी लोकेशन पर डटी रही। मुस्तैद वनकर्मी नई लोकशन पर चक्कर लगाते और तेंदुओं को बैठा देख पुरानी लोकेशन पर पहुंच जाते। तेंदुओं के डटे होने की सूचना पर दोपहर में एसडीओ आंनद प्रकाश मिश्र पहुंचे और दोनों लोकेशनों का निरीक्षण कर पुरानी लोकेशन का पिंजरा हटवाकर नई लोकेशन के निकट लगवा दिया।

इस दौरान पिंजरा ऊपर से क्षतिग्रस्त हो गया। टीम ने यहां से कैमरा टैप भी हटा लिया है। खास बात यह है कि फिलहाल एक-दो किमी की दूरी पर लगे तीनों पिंजरों में तेंदुए के लिए अलग-अलग चारा एक में मुर्गा, दूसरे में मेमना और तीसरे में कुत्ता रख गया है। उधर, आॅपरेशन में लगी दोनों टीमें अपनी नाकामी का ठीकरा ग्रामीणों की भीड़ के सिर फोड़ रही हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि दृढ़ इच्छा शक्ति और संसाधनों का अभाव तेंदुए की गिरफ्त में सबसे बड़ी बाधा है।
हर मूवमेंट पर नजर मिलेग कामयाबी
तेंदुआ सर्च आॅपरेशन को लेकर डीएफओ राजेश कुमार का कहना है कि तेंदुए साक्षात् दिख रहें हैं तो पकड़े भी आवश्य जाएंगे। फिलहाल टीमें तेंदुआ परिवार की प्रत्येक गतिविधि पर बारीकी से नजर रखे हुए है। उनके ठहरने की थली, फेवरेट खाना, जंगल में मूवमेंट का समय और ढंग आदि समझते ही तेंदुआ निश्चित पकड़ लिया जाएगा। क्योंकि इस बार एक्सपटर््स साथ में हैं तो समय तेंदुआ पकड़ने में नहीं बल्कि उसकी निगरानी और गतिविधि समझने में लग रहा है। पुरानी लोकेशन पर भी पूरी नजर रखी जा रही है। उन्होंने भी ग्रामीणों की भीड़ को आॅपरेशन में बाधक बताया।

