जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: यूपी की राजनीति अचानक गरमा गई है। कृषि कानून के खिलाफ किसानों का दिल्ली में आंदोलन चल रहा है। किसानों की मांग है कि कृषि कानून वापिस हो और एमएसपी पर कानून बने, लेकिन केंद्र सरकार, किसानों की मांग मानने को तैयार नहीं है, जिसके बाद किसान भी आंदोलन पर अडिग है।
अब हालत यह हो गई हैं आंदोलन दिल्ली से निकलकर गांव-गांव और घर-घर यूपी में पहुंच गया है। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब में आंदोलन की आंच आ रही। किसान आंदोलन का जो तूफान उठा है उसमें आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो एवं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी कूद गए है। क्रांतिधरा मेरठ पर उनकी पहली किसान पंचायत हो रही हैं।
वेस्ट यूपी की राजनीति के लिए यह महापचायत अहम और राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। किसान आंदोलन तो देश भर में चल रहा है, लेकिन आम आदमी पार्टी ने अपना पूरा फोकस वेस्ट यूपी पर कर दिया है। किसान आंदोलन के जरिए आम आदमी पार्टी वेस्ट यूपी में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रही है।
अब इसमें आम आदमी पार्टी अपना संदेश देने में कितना कामयाब होती है, यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना अवश्य है कि भाजपा के लिए टेंशन पैदा किसानों ने कर दी हैं। आम आदमी पार्टी और कितनी महापंचायत करेगी यह तो घोषणा नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से आज की महापंचायत में भीड़ जुटी है उसको देखकर लगता है कि वेस्ट यूपी में आम आदमी की ओर भी किसान महापंचायत हो सकती हैं।
यही नहीं, कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी वेस्ट यूपी में 4 किसान महापंचायत कर चुकी है। रालोद अध्यक्ष अजित सिंह और उनके पुत्र जयंत चौधरी भी किसानों की महापंचायत कर रहे हैं। एक तरह से किसान आंदोलन पर राजनीतिक रंग भी चढ़ने लगा।

