Sunday, March 15, 2026
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किसान आंदोलन से बदलते समीकरण

  • पश्चिमी यूपी की किसान पंचायतों में साथ आ रहे मुस्लिम और जाट

रामबोल तोमर |

मेरठ: वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए साम्प्रदायिक दंगों में 63 लोग मारे गए थे, जिसमें 42 मुस्लमान थे। इन दंगों ने जाटों व मुस्लिमों के बीच बड़ी खाई खोद दी थी, लेकिन कृषि बिल के खिलाफ किसान पंचायतों में हिन्दू-मुस्लिम एक साथ आ रहे हैं। वर्ष 2012 में पश्चिमी यूपी के 17 जनपदों में 93 सीटे भाजपा ने जीती थी।

2012 में भाजपा ने 14 सीटें जीती थी, लेकिन 2017 में भाजपा ने 73 सीटें जीती। हालांकि किसान आंदोलन के बाद भाजपा नेताओं के माथे पर बल दिखाई दे रहे हैं। केन्द्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान के खिलाफ शामली के भैंसवाल गांव में नारेबाजी की।

इसके बाद मुजफ्फरनगर के ऐतिहासिक गांव सोरम में तब संजीव बालियान समर्थकों व किसानों के बीच मारपीट हो गई, जब ग्रामीण किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। यही नहीं, डा. संजीव बालियान ने इस पूरे मामले को मस्जिद से यह कहकर जोड़ने का प्रयास किया कि उनके खिलाफ जो साजिश हुई, उसमें सोरम गांव की मस्जिदों से हमले का ऐलान किया गया।

भाजपा नेताओं का पश्चिमी यूपी में विरोध भी हो रहा हैं। हालांकि भाजपा नेता इसी प्रयास में जुटे है कि किसी तरह से किसानों की नाराजगी दूर की जा सके, मगर फिलहाल ऐसा दिखता नहीं है कि कृषि कानून वापस लिये बिना किसानों की नाराजगी को दूर किया जा सकता है।

दरअसल, पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर में हुए 2013 के साम्प्रदायिक दंगों के बाद राजनीतिक तस्वीर बदल गई। पश्चिमी यूपी में रालोद का डंका बजता था, लेकिन 2013 में मुजफ्फरनगर में साम्प्रदायिक दंगा हुआ, जिसके बाद रालोद आउट हो गई। अब रालोद फिर से अस्तित्व में आने के लिए तड़प रही है। कृषि कानून के खिलाफ किसानों के चल रहे आंदोलन में महापंचायतों ने जाटों व मुस्लिमों को फिर से एक साथ लाने का काम किया है।

खुद भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत भी मुजफ्फरनगर में हुई 28 जनवरी की महापंचायत में यह ऐलान कर चुके है कि रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह को हराकर गलती की। इसे सहज ही सार्वजनिक मंच से स्वीकार कर किसान नेता ने भाजपा को बड़ा संदेश देने का प्रयास किया। यही नहीं, भाकियू से दूरी बनाने वाले गुलाम मोहम्मद जौला सरीखे नेता भी लंबे समय बाद फिर से भाकियू के गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में मंच पर पहुंचे।

भाकियू के संस्थापक चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत का गुलाम मोहम्मद जौला बेहद करीब थे, लेकिन वर्ष 2013 के दंगे के बाद गुलाम मोहम्मद जौला ने भाकियू से त्यागपत्र देकर भाकियू से रिश्ता तोड़ लिया था, लेकिन फिर से मुस्लिम व जाट किसान नेता एक मंच पर हैं, जिसके बाद साफ दिखाई दे रहा है कि वेस्ट यूपी के राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं।

मुस्लिमों की आबादी

  • उत्तर प्रदेश 19.26 फीसदी
  • पश्चिमी यूपी 26.21 फीसदी
  • रामपुर में 50.57 फीसदी
  • मुरादाबाद में 47.12 फीसदी
  • संभल में 45 फीसदी
  • बिजनौर में 43.03 फीसदी
  • सहारनपुर में 41.95 फीसदी
  • अमरोहा में 38 फीसदी
  • हापुड़ में 37.14 फीसदी
  • शामली में 35 फीसदी
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