Saturday, March 21, 2026
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दोहरी मार से सहमे मेडिकल के हड़ताली कर्मचारी

  • प्रशासन और मेडिकल प्राचार्य संग बातचीत बेनतीजा, हड़ताल जारी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: चार से पांच माह के वेतन के लिए हड़ताल की राह पर निकले मेडिकल के तमाम संविदा कर्मचारी दोहरी मार से सहमे हुए हैं। वहीं, दूसरी ओर गुरुवार को जिला प्रशासन की ओर से मेडिकल प्रशासन व हड़तालियों के बीच चल रहा गतिरोध खत्म करने का प्रयास किया गया, लेकिन एसडीएम व मेडिकल प्राचार्य के साथ कर्मचारी नेताओं की वार्ता बेनतीजा रही। संविदा कर्मियों ने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।

जीत और अवनी परिधि के जो संविदा कर्मचारी हड़ताल पर गए हैं उन पर दोहरी मार पड़ रही है। दरअसल इन कंपनियों की टेंडर अवधि 31 मार्च को समाप्त होने जा रही है। जितने भी संविदा कर्मचारी काम कर रहे हैं उन सभी से सिक्योरिटी मनी के रूप से में कंपनी से 25-25 हजार के ड्राफ्ट लिए हैं।

स्टाफ नर्स व कुछ अन्य कर्मचारियों की स्थिति तो और भी बुरी है, उन्होंने काम के नाम पर तीन से चार लाख रुपये तक सुविधा शुल्क कंपनी को दिया है। इस आस में कि संविदा पर काम करते करते पक्के हो जाएंगे, लेकिन यहां तो अब कच्ची नौकरी पर भी संकट मंडरा रहा है। हड़तालियों का कहना है कि यदि कंपनी रातों रात गायब हो गयी तो चार माह के वेतन के अलावा जो 25 25 हजार के सिक्योरिटी राशि के ड्राफ्ट दिए हुए हैं वो भी मिलने की उम्मीद नहीं रहेगी।

नयी कंपनी को टेंडर

मेडिकल में संविदा कर्मचारियों को रखने के लिए इस बार लखनऊ से किसी नयी कंपनी के नाम टेंडर छोड़ा गया है। पुरानी किसी भी कंपनी को टेंडर नहीं दिया गया है। इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि जो नयी कंपनी संविदा कर्मचारियों को मेडिकल में भेजेगी वो कंपनी पुराने संविदा कर्मचारियों को मौका देगी या नहीं।

एसडीएम पहुंचे मेडिकल

संविदा कर्मचारियों की हड़ताल के मददे नजर बुरी तरह से प्रभावित हो रही मेडिकल की स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल कराने के लिए जिला प्रशासन के निर्देश पर एसडीएम गुरुवार को मेडिकल पहुंचे। उन्होंने प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार से हालात का जायजा लिया। उन्हें बताया कि किसी भी तरह हड़ताल खत्म कर स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य की जाएं। मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कोरोना संक्रमण काल में हड़ताल नहीं होनी चाहिए।

वार्ता बेनतीजा

कर्मचारी नेता शिव कुमार गौतम ने बताया कि प्रशासन व प्राचार्य के संग वार्ता बेनतीजा समाप्त हो गयी। एसडीएम चाहते थे कि सात दिन के लिए हड़ताल स्थगित कर दी जाए, लेकिन हड़ताली साथी कर्मचारियों ने चार माह का वेतन मिले बगैर हड़ताल खत्म करने से साफ इनकार कर दिया है। जिस कारण वार्ता बेनतीजा रही।

नर्सिंग स्टाफ लगाया

हड़ताल को देखते हुए मेडिकल प्रशासन ने अब नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे छात्र छात्राओं की ड्यूटी मेडिकल के तमाम वार्डों में लगा दी है। वहीं, दूसरी ओर हड़ताली की वजह से मरीजों से ज्यादा मेडिकल का वो स्टाफ मुसीबत में नजर आता है, जो संविदा कर्मचारियों के आने के बाद ड्यूटी करने से आमतौर पर कन्नी काटता रहा है। उन्हें अब ड्यूटी करनी पड़ रही है।

ये कहना है मेडिकल प्राचार्य का

मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने बताया कि हड़ताली कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं बनी। मेडिकल के सभी वार्ड का निरीक्षण किया गया है। स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।

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