- ईज आॅफ लिविंग के लिए तय मानदंडों से कोसों दूर अपना शहर
जनवाणी ब्यूरो |
मेरठ: क्रांति के लिये पूरे भारत में चर्चाओं में रहने वाला मेरठ आधारभूत सुविधाओं के न होने के कारण देश के खूबसूरत शहरों में शुमार नहीं हो पा रहा है। जहां तक इस शहर को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना अभी तक पूरा नहीं हुआ है ऐसे में ईज आफ लिविंग के मामले में शहर देश के अन्य शहरों के मुकाबले काफी पिछड़ा हुआ है।
ऐसा नहीं है कि इस शहर के लोग खुद को खूबसूरत शहर का वासी कहलाना पसंद नहीं करते लेकिन दुर्भाग्य से सरकारी सिस्टम इस कदर पंगु हो चुका है कि एक खूबसूरत शहर को बनाने के लिये तय किये गए मानदंडों में मेरठ फिट नहीं बैठ रहा है। हर कोई इस शहर का नाम कूड़ों के ढेर, उफनते नाले, डेरियों से निकलने वाले बेइंतहा गोबर और अनियंत्रित ट्रैफिक से जोड़ देता है। ऐसे में भला खूबसूरती की दौड़ में यह शहर कैसे टिक पाएगा।

भारत में 10 लाख से अधिक की आबादी वाले शहरों में ईज आॅफ लिविंग के मामले में बेंगलुरु टॉप पर है। बेंगलुरु के अलावा पुणे और अहमदाबाद जैसे शहर भी लिस्ट में टॉप पर हैं, लेकिन बरेली, धनबाद और श्रीनगर आखिरी पायदान वाले शहरों में से एक हैं।
शहरी विकास मंत्रालय की ओर से तैयार ईज आॅफ लिविंग इंडेक्स 2020 में यह बात कही गई है। 10 लाख से कम की आबादी वाले शहरों की बात करें तो इसमें शिमला पहले स्थान पर है और बिहार का मुजफ्फरपुर आखिरी नंबर पर आता है।

प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, आर्थिक स्थिति, आवास, भूउपयोग, पार्क, परिवहन और मोबिलिटी जैसे 15 मानकों के आधार पर इस रैंकिंग को जारी किया जाता है। भारत की आर्थिक ग्रोथ उसके शहरों के विकास से भी दिखती है। भारत इस वक्त दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
ये हैं मानक
प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ, सुरक्षा, आर्थिक स्थिति, आवास, भू-उपयोग, पार्क, परिवहन और मोबिलिटी जैसे 15 मानकों के आधार पर इस रैंकिंग को जारी किया जाता है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सचिव अंकित सिंघल का कहना है कि नगर निगम को शहर भर में कूड़ों के निस्तारण पर गंभीरता से काम करना चाहिये। पूरे शहर की सड़कों के किनारे कूड़ों का ढेर लगा रहता है। कालोनियों में स्थित पार्कों का सौंदर्यीकरण किया जाए ताकि बाहर का कोई व्यक्ति इन कालोनियों में घुसे तो उसे बंगलूरु और पुणे की याद आ जाए। रोजगार की समस्या विकसित करने से लोगों का इस शहर की तरफ रुझान बढ़ेगा और उससे शहर लोगों की पसंद में आने लगेगा। वहीं शिक्षा का हब होने के बाद भी युवा उच्च शिक्षा के लिये दूसरे शहरों की तरफ भाग रहे हैं।
वरिष्ठ चिकित्सक डा. तनुराज सिरोही का कहना है कि शहर के सौंदर्यीकरण में शहर में सफाई व्यवस्था बहुत मायने रखती है। शहर भर में खत्तों के कारण जहां गंदगी बढ़ रही है वहीं नालों में डेयरियों से निकलने वाले गोबर के कारण हमेशा जलभराव की समस्या बनी रहती है। खूबसूरत शहर में रोजगार, उद्योग, यातायात, ट्रैफिक आदि सुविधाएं भी मजबूत की जानी चाहिये तभी मेरठ ईज आफ लिविंग की सूची में आ सकता है। सिर्फ हवाई दावों से कुछ नहीं होने वाला है।
हैंडलूम वस्त्र व्यापारी संघ के पूर्व प्रधान और हॉरमनी होटल के निदेशक नवीन अरोड़ा का कहना है कि शहर में जगह जगह गंदगी के ढेर देखकर बाहर से आने वाले लोग एक अलग धारणा बना लेते है। शहर में सड़कें सबसे ज्यादा चौड़ी है, लेकिन उस पर किये गए अतिक्रमण के कारण हमेशा सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रहती है। जब तक शहर में एक एक्सपोर्ट हाउस और टैक्सटाइल पार्क की स्थापना नहीं होगी तब तक विकसित शहरों में इसकी गिनती नहीं हो पाएगी। सबसे बड़ी समस्या डेयरियों को लेकर है। इससे निकलने वाले गोबर ने पूरे शहर के नालों को चोक कर दिया है।
भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय कोषाध्यक्ष और संयुक्त व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष बिजेन्द्र अग्रवाल का मानना है कि रिंग रोड बनने के बाद शहर में ट्रैफिक पर लोड कम पड़ेगा जिससे लोगों को जाम की समस्या से थोड़ी निजात मिल जाएगी। नगर निगम सफाई और कूड़े के निस्तारण को लेकर गंभीर हो जाए तो शहर को सुन्दर बनने से कोई नहीं रोक सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि शहर भर के नाले कवर्ड होने चाहिये। दिल्ली की तर्ज पर सड़कों पर अवैध रुप से खड़ी गाड़ियों को क्रेन की मदद से उठाना शुरु किया जाए इससे काफी हद तक शहर सुन्दर बनने की ओर बढ़ेगा। सबसे बड़ी बात यह है रोजगार और शिक्षा की उच्च व्यवस्था से शहर टॉप के शहरों में आ सकता है।
भाजपा नेता और संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति कमजोर होने के कारण शहर खूबसूरत नहीं हो पा रहा है। जनप्रतिनिधि न तो अधिकारियों के पेंच कस पा रहे हैं और न ही जनता का सहयोग ले पा रहे हैं। पूरा शहर गंदगी, डेयरियों से निकल रहे गोबर, ट्रैफिक जाम और उद्योगों की बुरी हालत से जूझ रहा है, लेकिन किसी को भी शहर को टॉपटेन में लाने की चिंता नहीं है। सारी योजनाएं कागजों पर बन रही है और शहर को हवा में चलाया जा रहा है।
संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की कमी के कारण शहर का न तो विकास हो रहा और न ही खूबसूरत बन रहा। सांसद कैलाश प्रकाश के अलावा किसी भी जनप्रतिनिधि ने शहर को खूबसूरत बनाने का काम नहीं किया। सफाई, ट्रैफिक, अतिक्रमण, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं के नाम पर शहर शून्य है।


इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सचिव अंकित सिंघल का कहना है कि नगर निगम को शहर भर में कूड़ों के निस्तारण पर गंभीरता से काम करना चाहिये। पूरे शहर की सड़कों के किनारे कूड़ों का ढेर लगा रहता है। कालोनियों में स्थित पार्कों का सौंदर्यीकरण किया जाए ताकि बाहर का कोई व्यक्ति इन कालोनियों में घुसे तो उसे बंगलूरु और पुणे की याद आ जाए। रोजगार की समस्या विकसित करने से लोगों का इस शहर की तरफ रुझान बढ़ेगा और उससे शहर लोगों की पसंद में आने लगेगा। वहीं शिक्षा का हब होने के बाद भी युवा उच्च शिक्षा के लिये दूसरे शहरों की तरफ भाग रहे हैं।
वरिष्ठ चिकित्सक डा. तनुराज सिरोही का कहना है कि शहर के सौंदर्यीकरण में शहर में सफाई व्यवस्था बहुत मायने रखती है। शहर भर में खत्तों के कारण जहां गंदगी बढ़ रही है वहीं नालों में डेयरियों से निकलने वाले गोबर के कारण हमेशा जलभराव की समस्या बनी रहती है। खूबसूरत शहर में रोजगार, उद्योग, यातायात, ट्रैफिक आदि सुविधाएं भी मजबूत की जानी चाहिये तभी मेरठ ईज आफ लिविंग की सूची में आ सकता है। सिर्फ हवाई दावों से कुछ नहीं होने वाला है।
हैंडलूम वस्त्र व्यापारी संघ के पूर्व प्रधान और हॉरमनी होटल के निदेशक नवीन अरोड़ा का कहना है कि शहर में जगह जगह गंदगी के ढेर देखकर बाहर से आने वाले लोग एक अलग धारणा बना लेते है। शहर में सड़कें सबसे ज्यादा चौड़ी है, लेकिन उस पर किये गए अतिक्रमण के कारण हमेशा सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रहती है। जब तक शहर में एक एक्सपोर्ट हाउस और टैक्सटाइल पार्क की स्थापना नहीं होगी तब तक विकसित शहरों में इसकी गिनती नहीं हो पाएगी। सबसे बड़ी समस्या डेयरियों को लेकर है। इससे निकलने वाले गोबर ने पूरे शहर के नालों को चोक कर दिया है।

संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की कमी के कारण शहर का न तो विकास हो रहा और न ही खूबसूरत बन रहा। सांसद कैलाश प्रकाश के अलावा किसी भी जनप्रतिनिधि ने शहर को खूबसूरत बनाने का काम नहीं किया। सफाई, ट्रैफिक, अतिक्रमण, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं के नाम पर शहर शून्य है।