- बड़ी तादाद में एकत्र हुए किसान, किया हल्ला बोल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शनिवार की सुबह मेरठ विकास प्राधिकरण के ऑफिस पर किसानों ने हल्ला बोल दिया। बड़ी तादाद में किसान एकत्र होकर प्राधिकरण ऑफिस पर पहुंचे तथा प्राधिकरण अधिकारियों के रवैए से क्षुब्ध होकर नारेबाजी की। प्राधिकरण उपाध्यक्ष की गैर मौजूदगी में किसानों की भीड़ प्राधिकरण सचिव प्रवीण अग्रवाल के ऑफिस में नीचे फर्श पर ही बैठ गई।
प्राधिकरण सचिव ने कहा कि आप फर्श पर बैठे हैं, यह उन्हें अच्छा नहीं लग रहा है। इसलिए आप लोगों से आग्रह है कि सभागार में सभी लोग साथ में कुर्सी पर बैठे और उसके बाद समस्या को लेकर चर्चा की जाएगी। प्राधिकरण सचिव प्रवीण अग्रवाल की अपील पर किसान सहमत हो गए और किसान इसके बाद प्राधिकरण सभागार में पहुंचे तथा कुर्सियों पर बैठकर सचिव ने किसानों की समस्याएं सुनी।
किसानों की मांग लंबे समय से प्रतिकर मुआवजे की मांग चली आ रही है, इसी मांग को लेकर किसानों ने शनिवार को एमडीए ऑफिस पर हल्ला बोल दिया। प्रदर्शनकारी किसान सबसे पहले नारेबाजी करते हुए एमडीए में पहुंचे, जिसके बाद एमडीए में उपाध्यक्ष नहीं थे। इसके बाद किसानों की भीड़ एमडीए सचिव के ऑफिस में पहुंच गई, जहां पर फर्श पर ही धरना देकर बैठ गई।
भीड़ की नाराजगी को सचिव प्रवीणा अग्रवाल भाप गई, जिसके बाद किसानों को लेकर सचिव एमडीए सभागार में पहुंची। यहां पर किसानों से संवाद किया। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना था कि लंबे समय से गंगानगर, लोहिया नगर व वेदव्यासपुरी के किसानों को बढ़ा हुआ प्रतिकर नहीं दिया गया है, जिसकी मांग एक दशक से की जा रही है।
इस पर एमडीए के अधिकारी सहमत भी हो चुके हैं, लेकिन फिर भी किसानों को चेक व प्लाट नहीं दिये जा रहे हैं। क्योंकि किसानों व एमडीए अधिकारियों के बीच एग्रीमेंट हुआ था कि जिन बड़े किसानों की जमीन का अधिग्रहण हुआ है, उन्हें प्लाट दिये जाएंगे। बाकी छोटे किसानों को चेक दिये जाएंगे।
इस पर पूर्ण सहमति दोनों तरफ से बन गई थी, लेकिन फिर भी किसानों को प्रतिकर का मुआवजा नहीं मिल रहा है। किसानों ने कहा कि सब कुछ निर्धारित होने के बाद मुआवजा क्यों नहीं मिल रहा हैं? इस बीच किसानों व एमडीए अधिकारियों के बीच तल्खी भी हो गई थी, लेकिन एमडीए सचिव ने संभाल लिया। किसानों का कहना था कि अब सब्र का बांध टूट रहा हैं। इसके बाद किसान एमडीए में अनिश्चित कॉलीन धरना घोषित कर दिया जाएगा।
इस पर सचिव ने आंदोलित किसानों को आश्वासन दिया कि अगले गुरुवार तक का समय एमडीए को चाहिए। इसमें अवश्य ही किसानों को प्रतिकर मुआवजा व प्लाट का तोहफा मिल जाएगा। रिकॉर्ड भी बन गया है, सिर्फ उस कमिश्नर स्तर से मुहर लगना बाकी है। इसके लिए एमडीए के अधिकारी अब कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह से चर्चा करेंगे, जिसके बाद ही किसानों को प्रतिकर के मुआवजे के रूप में प्लाट व चेक दिये जाएंगे।
विधायक भी बने थे एमडीए व किसानों के बीच धुरी
भाजपा के मेरठ दक्षिण विधायक डा. सोमेन्द्र तोमर किसानों व एमडीए के बीच समझौते की धुरी भी बने थे, लेकिन अब किसान आक्रोशित हो गए हैं। शनिवार को कहीं विधायक किसानों व एमडीए अधिकारियों के बीच की धुरी से अलग दिखाई दिये।
यही वजह है कि विधायक से किसानों ने भी कोई बात नहीं की तथा सीधे एमडीए पर प्रदर्शन करने के लिए पहुंच गए। किसानों का कहना था कि भाजपा विधायक ने भी एमडीए पर दबाव बनाया था, लेकिन एमडीए के अधिकारी किसानों को टरका रहे हैं। इसलिए इसमें बड़े आंदोलन की आवश्यकता है, जिसके लिए किसान तैयार हो गए हैं।
किसानों के प्रदर्शन के मुख्य बिन्दु
शनिवार को सीटीपी के बुलावे पर वेदव्यास पुरी, लोहिया नगर, गंगानगर के सैकड़ों किसान वार्ता के लिए पहुंचे थे एमडीए सभागार में ।
डिप्टी कलेक्टर मनोज कुमार सिंह ने किसानों के बीच पहुंचकर किया था समझाने का प्रयास। एमडीए सचिव प्रवीणा अग्रवाल ले रही थी अधिकारियों की मीटिंग उपाध्यक्ष भी नहीं थे, तब वीसी कार्यालय में नहीं थे मौजूद।
- नाराज किसानों ने उपाध्यक्ष तथा सचिव के खिलाफ की नारेबाजी।
- सचिव कार्यालय में ही मौन धरने पर बैठे किसानों को बाद में समझाने का प्रयास किया सचिव ने तो मान गए किसान और फिर चली सभागार में घंटों वार्ता।
- किसानों के मुताबिक सचिव ने किसानों से मांगा प्रतिकर की राशि चार दिन में देने का समय।
- सचिव के आश्वासन के बाद किसान हुए राजी और लौट गए वापस अपने घरों को लौटे।
- किसान नेताओं का दावा, प्रतिकर की राशि या प्लॉट मिलने से होगा करीब 10 से 12000 किसानों को लाभ।
ये थे प्रदर्शनकारी किसान
किसानों के प्रदर्शन का नेतृत्व भाजपा मंडल अध्यक्ष तथा पूर्व पार्षद सुरेंद्र भड़ाना ने किया। प्रदर्शन में विनोद चेयरमैन, पॉपिंन प्रधान, जसवीर सिंह, सत्यपाल चौधरी, अनिल चौधरी, मंगतराम आदि शामिल रहे।

