Thursday, March 5, 2026
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एमडीए ने गिराई अवैध कॉलोनी, कई बिल्डिंग सील

  • लखवाया में अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही थी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने शनिवार को अवैध निर्माण और अवैध कालोनियों के खिलाफ अभियान चलाया। जोन डी में जोनल अधिकारी धीरज सिंह की अगुवाई में रोहटा रोड स्थित लखवाया में करीब 12 हजार वर्ग मीटर जमीन में अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही थी, जिस पर एमडीए इंजीनियरों की टीम ने शनिवार की सुबह जेसीबी मशीन चलाकर ध्वस्तीकरण कर दिया।

यह अवैध कॉलोनी राकेश सिंह पुत्र विश्राम सिंह लखवाया की बताई गई है। यही नहीं, प्राधिकरण इंजीनियरों ने कॉलोनी का तो ध्वस्तीकरण किया ही साथ ही इसमें खरीद-फरोख्त करने पर रोक लगाने के लिए एमडीए ने रजिस्ट्री ऑफिस को पत्र लिख दिया है।

यही नहीं, इसमें विद्युतीकरण भी नहीं हो पाएगा, इसके लिए भी मुख्य अभियंता विद्युत वितरण निगम को भी एक पत्र लिखा है, ताकि भोली भाली जनता को अवैध कॉलोनी में ठगी होने से बचाया जा सके। ध्वस्तीकरण का कुछ लोगों ने विरोध भी किया, लेकिन ध्वस्तीकरण अभियान जारी रहा। ध्वस्तीकरण करने के दौरान जोनल अधिकारी धीरज सिंह, अवर अभियंता एसके गुप्ता, ओंकार शर्मा, महादेव शरण, उमाशंकर एवं अन्य प्राधिकरण का आदि स्टाफ मौजूद रहा। इसके अलावा मेरठ विकास प्राधिकरण के जोन-बी-1 में भी अवैध निमार्णों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई एमडीए इंजीनियरों की हैं।

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नोडल अधिकारी सुभाष गौतम की अगुवाई में इंजीनियरों की टीम शनिवार सुबह अम्हेड़ा रोड पहुंची, जहां पर दर्जन भर अवैध निर्माणों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए निर्माणाधीन बिल्डिंग को सील किया गया। न्यू शिव कॉलोनी आदिपुर में चार दुकान व मकान को सील किया गया। न्यू शिव कॉलोनी आदिपुर में ही राकेश देवी के अवैध निर्माण को सील किया।

इसी कॉलोनी में जयकुमार के अवैध निर्माण को सील किया। इसी कॉलोनी में चौथा निर्माण एस कुमार का था, जिसको एमडी के इंजीनियर ने सील कर दिया। अम्हेड़ा बिजलीघर के निकट मुस्तकीम द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण को सील किया गया।

वृंदावन एन्क्लेव में मनवीर के दो अवैध निमार्णों को इंजीनियरों की टीम ने सील कर दिया। इसी कॉलोनी में योगेंद्र के दो अवैध निर्माण व वृंदावन एंक्लेव में ही योगेंद्र गौतम के चार अलग-अलग निर्मार्णों को सील करने की कार्रवाई एमडीए इंजीनियर ने की है। जोन-बी-वन में नोडल अधिकारी सुभाष गौतम एक-एक अवैध निर्माण पर कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं।

मास्टर प्लान: 2031 का सर्वे पूरा, अब बनेगा बेस

मेरठ विकास (एमडीए) प्राधिकरण मास्टर प्लान 2031 पर काम कर रहा है। मास्टर प्लान का प्रथम चरण करीब-करीब सर्वे का पूरा हो गया है। सर्वे के बाद बेसिक कार्य होगा। प्राधिकरण क्षेत्रफल करीब ग्यारह सो वर्ग किलोमीटर का है, जिसका मास्टर प्लान तैयार हो रहा हैं।

इसमें शहरी क्षेत्र के अलावा पहली बार सरधना, मवाना व हस्तिनापुर भी शामिल है। करीब अस्सी गांव भी इसमें शामिल किये गए हैं। इसका सर्वे फाइनल हो चुका हैं। चार हजार सात सौ पन्द्रह सीट्स सौंप दी गई है। इसमें आंशिक संसोधन किया गया है। सर्वे में यह भी पाया गया है कि जहां पर खाली जमीन मास्टर प्लान 2021 में दर्शायी गई थी, वहां पर बिल्डिंग खड़ी हुई है। इसका भी उल्लेख सर्वे में किया गया है।

यदि कहीं पर कॉलेज बना हुआ है, वहां पर पहले कृषि भूमि थी, इसको भी सर्वे में दर्शाया गया है। इस तरह से मास्टर प्लान का प्रथम चरण फाइनल हो चुका हैं। द्वितीय चरण में मास्टर प्लान का बेसिक फाइनल किया जाएगा। इस दिशा में काम चालू कर दिया गया है। वर्तमान स्थिति धरातल पर क्या हैं, इसी के लिए सर्वे किया गया था।

उसी को चार हजार सात सौ सीट्स में दर्शाया गया है। इसमें चार हजार सीट्स ऐसी थी, जो सही थी। साढ़े सात सौ सीट्स ऐसी थी, जिसमें माइनर करेक्शन थे। इसमें करेक्शन करने के बाद वापस एनआरआईसी को भेज दिया है। ये सीट्स नोडल कंपनी को भेज दी गई है। मास्टर प्लान में क्या प्लान था तथा मौके पर क्या प्लान है? यह सब इसमें उल्लेख किया गया है।

मौके पर क्या स्थिति है? फिलहाल इसको ही सर्वे में देखा गया है। हालांकि अभी मास्टर प्लान में क्या था और मौके पर क्या बन गया? उसका मिलान नहीं किया गया। भू-उपयोग की भी कोई जांच अभी नहीं होगी। ग्यारह सौ इसक्वायर किलोमीटर का बेस मैप तैयार किया जाना है। दौराला महायोजना भी इसमें शामिल है। सरधना, मवाना व हस्तिनापुर के नये क्षेत्र को भी शामिल किया गया है।

मेरठ का बिल्डप ऐरिया डेढ़ सौ इसक्वायर किलोमीटर से ज्यादा नहीं है। मेरठ शहर को गांवों से मास्टर प्लान 2031 में कनेक्ट करने के लिए यह सब कवायद चल रही है। गांव की कनेक्टिविटी को बेहतर करने के लिए ही यह प्लान तैयार किया जा रहा है।

क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों से आवश्यक वस्तु शहर को सुगम तरीके से उपलब्ध कराई जा सके, इसी को लेकर मास्टर प्लान 2031 का प्लान चल रहा है। जनसंख्या वर्तमान में कितनी हैं? इस हिसाब से जनसंख्या कितनी बढ़ जाएगी तथा कृषि भूमि कितनी हैं? आवासीय क्षेत्र कितना हैं? सामुदायिक सुविधाएं कितनी हैं? औद्योगिक क्षेत्र कितना हैं? इसी को लेकर सर्वे पूरा हो गया हैं।

अब बेसिक काम चलेगा। इसमें एमडीए की टीम तो है ही साथ ही प्राइवेट कंपनी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसी कंपनी के इंजीनियर इसमें जुटे हुए हैं। मेरठ ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के करीब चौदह शहरों का मास्टर प्लान पर तेजी से काम चल रहा है।

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