- एसपी देहात ने जानी पुलिस को हड़काया, तलब किया
- गाड़ी मालिक को कोर्ट के चक्कर का डर दिखाकर वसूली रकम
- वाहन चोर को बताया निर्दोष, साढ़े तीन लाख लेकर बाइज्जत रिहा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जानी थानांतर्गत हाइवे की एक कालोनी में 12 दिन से चोरी करके लाई गई फार्च्यूनर गाड़ी जीपीएस के कारण दिल्ली पुलिस के कारण भले मिल गई हो, लेकिन इसके पीछे जानी थाना पुलिस ने जमकर खेल किया। पुलिस ने गाड़ी को बिना कानूनी लिखत पढ़त के छोड़ने के लिये मोटी रकम वसूल ली।
हैरानी की बात यह है कि जब मौके से वाहन चोर पकड़ा गया तो उससे साढ़े तीन लाख रुपये लेकर बाइज्जत रिहा कर दिया गया। इस पूरे मामले में जानी थाना प्रभारी की भूमिका संदिग्ध है। जब इस बात की जानकारी एसपी देहात को हुई तो उन्होंने सुभारती चौकी प्रभारी को तलब कर लिया और जमकर हड़काया।
हाइवे की कालोनी में बारह दिन पहले दो वाहन चोर दिल्ली से फार्च्यूनर चोरी करके लाये थे। इन चोरों ने एक महीने पहले कालोनी में रहने के लिये कमरा भी लिया था। सोमवार को चोरों ने गाड़ी को ठिकाने लगाने के लिये जैसे ही गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश की तभी गाड़ी में लगे जीपीएस से गाड़ी मालिक ने गाड़ी लॉक कर दी।
वाहन चोर गाड़ी को स्टार्ट करने में लगे रहे। पुलिस के आते ही एक वाहन चोर कालोनी की दीवार फांद कर फरार हो गया जबकि दूसरा मौके से रंगे हाथों पकड़ा गया। सवाल यह उठ रहा है कि पुलिस ने शाम होते होते वाहन चोर को छोड़ दिया जबकि उसे रंगे हाथों पकड़ा था।
अगर इस चोर को पकड़ कर सख्ती से पूछताछ की जाती तो कई वाहन चोरी की घटनाओं का खुलासा हो जाता। पुलिस ने निजी लाभ के लिये चोर को छोड़ा। जब इस बारे में सोमवार को जानी थाना प्रभारी संजय वर्मा से पूछा गया था तब उनका कहना था कि उनकी जानकारी में यह मामला नहीं है, इस बारे में सुभारती चौकी प्रभारी बता सकते है।
इस खुली अंधेरगर्दी का खुलासा तब हुआ जब एसपी देहात केशव कुमार ने चौकी प्रभारी और मुंशी को तलब करके पूछा कि किसके आदेश पर गाड़ी छोड़ी गई और जब चोर मौके से पकड़ लिया गया था तब उसे क्यों छोड़ दिया गया। सूत्रों ने बताया कि गाड़ी मालिक के बार बार कागज दिखाने के बाद भी पुलिस उससे मोटी रकम मांग रही थी। बाद में एक लाख रुपये गाड़ी मालिक के देने पर गाड़ी उसके सुपुर्द की गई।
इस बारे में चौकी प्रभारी और इंस्पेक्टर के बीच खास बातचीत होने के बाद ही गाड़ी को छोड़ने को कहा गया था। जानी पुलिस के संतोषजनक जबाव न देने के कारण एसपी देहात ने इस मामले की जांच के आदेश कर दिये। दरअसल इस पूरे मामले में इंस्पेक्टर जानी की भूमिका बेहद संदिग्ध है कि गाड़ी प्रकरण की जानकारी सीओ सरधना और एसपी देहात के अलावा एसएसपी को क्यों नहीं दी।
खुद अदालत लगाई पुलिस ने
चोरी की गाड़ी बरामद करके कोर्ट में पेश करने की जेहमत न उठानी पड़े इसके लिये पुलिस ने गाड़ी रिलीव करने के लिये गाड़ी मालिक से एक लाख रुपये झटके और 20 हजार रुपये चौकी ने अपनी बख्शीश ले ली।
वाहन चोर को बताया निर्दोष
जिस वाहन चोर को पुलिस ने ड्राइविंग सीट पर रंगे हाथ पकड़ा और उसे चौकी पर लाकर पूछताछ की उसे एक झटके में निर्दोष बता दिया। इसे निर्दोष बताने के लिये पुलिस ने इससे साढ़े तीन लाख रुपये झटक लिये। हैरानी की बात यह है कि जानी पुलिस के पास पूरे सबूत थे कि इन्हीं वाहन चोरों ने गाड़ी चोरी की है इसके बाद भी चोर को बाइज्जत छोड़ दिया गया।

