- लगातार बढ़ रहे खतरनाक रोग के मरीज, कोविड और शुगर मरीजों पर टूट रहा कहर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोरोना के बाद ब्लैक फंगस ने लोगों की जिंदगी में दहशत पैदा कर दी है। इस नई बीमारी से बुधवार को फलावदा में एक और व्यक्ति की मौत हो गई। बुधवार को इस बीमारी से 30 नये मरीज मिलने से हाहाकार मच गया है। अब इस बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ कर 60 हो गई है। सभी मरीज मेरठ के अलावा अन्य जनपदों के है। वहीं, मेडिकल कालेज से चार मरीजों को डिस्चार्ज भी कर दिया गया है।
ब्लैक फंगस (म्यूकोर माइकोसिस) से संक्रमित मरीज मिलने का सिलसिला जारी है। बुधवार को 24 और मरीजों का पता चला है। इस बीच लोकप्रिय अस्पताल में फलावदा थाना क्षेत्र के रहने वाले ब्लैक फंगस के एक और संदिग्ध मरीज की मौत भी हो गई। अब तक जिले में भर्ती इन मरीजों की संख्या 67 पहुंच गई हैं।
इस गंभीर रोग की चपेट में आए 28 मरीजों का इलाज मेडिकल कॉलेज, 10 का आनंद अस्पताल, सात लोगों का इलाज कनग अस्पताल, दो लोगों का केएमसी, तीन का लोकप्रिय, चार का मेरठ किडनी अस्पताल, सात का न्यूटिमा अस्पताल, एक का होप अस्पताल और एक का होली फैमिली अस्पताल, एक का साई अस्पताल, एक का सिरोही अस्पताल, एक का सुभारती मेडिकल कालेज, एक का विजन केयर सेंटर पर चल रहा है।
यह मरीज मेरठ के अलावा हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, गाजियाबाद, शामली और मुरादनगर आदि के रहने वाले हैं। इनमें से कुछ मरीजों को कोरोना संक्रमण भी हैं। डा. पुनीत भार्गव ने बताया कि उनके क्लीनिक पर चार मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं, ईएनटी के डा. अरुण गोयल ने बताया कि उनके क्लीनिक में आठ लोगों का इलाज चल रहा है।
लगातार मिल रहे मरीजों के बाद ब्लैक फंगस के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज को 66 इंजेक्शन मिले हैं। इनका नाम एंफोटेरिसन-बी 50 एमजी है। सर्विलांस अधिकारी डा. अशोक तालियान ने बताया कि व्यक्ति के वजन के हिसाब से इसकी डोज दी जाती है। अभी तक यहां इंजेक्शन नहीं थे।
अब इंजेक्शन आ गए हैं। मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने बताया कि मेडिकल कालेज में इस समय ब्लैक फंगस के 28 मरीज है। इनको अलग वार्ड में रखा गया है। इनमें दो मरीजों की आज मौत हो गई। इनके नाम प्रदीप और सिवान है। वहीं लखनऊ गाड़ी भेजकर 66 इंजेक्शन मंगवाए गए है। आज से मरीजों को इंजेक्शन लगने शुरु हो गए हैं।
क्या है ब्लैक फंगस?
अमेरिका के सीडीसी के मुताबिक, म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस एक दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है। लेकिन ये गंभीर इंफेक्शन है, जो मोल्ड्स या फंगी के एक समूह की वजह से होता है। ये मोल्ड्स पूरे पर्यावरण में जीवित रहते हैं। ये साइनस या फेफड़ों को प्रभावित करता है।
ब्लैक फंगस पीड़ित की आंखों में लालपन या दर्द, बुखार, खांसी, सिरदर्द, सांस में तकलीफ, साफ-साफ दिखाई नहीं देना, उल्टी में खून आना या मानसिक स्थिति में बदलाव ब्लैक फंगस के लक्षण हो सकते हैं। कोरोना से ठीक होने वाले या संक्रमण के दौरान मरीज ब्लैक फंगस की चपेट में आ रहे हैं।
इसके चलते मरीजों की मौत तक हो रही है। आमतौर पर पांच से 10 दिन तक ही स्टेरॉयड की जरूरत पड़ती है, इससे ज्यादा दिनों तक मरीज को यह दवाएं दी जाएं तो ब्लैक फंगस की आशंका काफी बढ़ जाती है। डाक्टरों का कहना है कि स्टेरॉयड दे रहे हैं तो मरीज की पूरी निगरानी करना भी स्वास्थ्य कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। ब्लैक फंगस से बचने के लिए मरीज की निगरानी बहुत जरूरी है।

कहीं स्वाब स्टिक भी तो नहीं ब्लैक फंगस की वजह
कोरोना के साथ ही ब्लैक फंगस का कहर भी बढ़ता जा रहा है। डॉक्टर इसके पीछे स्टेरॉइड का अधिक इस्तेमाल, आॅक्सीजन देते समय उचित सावधानी न बरतना, शुगर और कोरोना संक्रमण को कारण मान रहे हैं। कुछ ऐसे मामले भी सामने आये है कि लोगों को कोरोना नहीं हुआ, फिर भी ब्लैक फंगस के शिकार हो गए।
हालांकि एक तथ्य यही भी सामने आ रहा है कि जितने भी मरीज ब्लैक फंगस के शिकार हुए हैं, उन्होंने कोरोना की जांच अवश्यक कराई थी। अब सवाल उठता है कि कहीं गंदी स्वाब स्टिक का प्रयोग करने के कारण तो ब्लैक फंगस नहीं हो रही है। इसको लेकर डॉक्टरों ने चुप्पी साध रखी है।
हाल ही में महाराष्टÑ का एक झुग्गी झोपड़ी का वीडिया वायरल भी हुआ था, जिसमें एक गरीब परिवार के लोग स्टिक पैक कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने नहीं तो कोई ग्लब्ज पहन रखे थे और नहीं मास्क लगा रखे थे। ब्लैक फंगस नाक, मुंह के द्वारा ही आंख और मस्तिष्क तक पहुंचता है।
रुई और प्लॉस्टिक से बनी स्टिक भी नाक और मुंह में डाली जाती है। इसकी वजह से तो ब्लैक फंगस का संक्रमण नहीं हो रहा है। इसकी आंशका भी जाताई जा रही है। यदि इन पर वायरस या सूक्ष्म जीव हुए तो यह खतरनाक साबित हो सकते हैं।
फलावदा में सामने आया ब्लैक फंगस का दूसरा केस
खतरनाक ढंग से पैर पसार रहे ब्लैक फंगस से बड़ा गांव में एक व्यक्ति की मौत होने के बाद दूसरा मामला फलावदा में सामने आया है। मरीज का मेडिकल में उपचार चल रहा है। कोरोना महामारी के बाद फैलती जा रही खतरनाक बीमारी ब्लैक फंगस ने देहात में पैर पसारने शुरू कर दिए है।
गत दिवस अमरोली और बड़ागांव में ब्लैक फंगस की चपेट में आए तकरीम उर्फ भूरा की उपचार के दौरान मौत होने के बाद दूसरा केस फलावदा से प्रकाश में आया है। बताया गया है कि नगर पंचायत की एक पूर्व सभासद को ब्लैक फंगस ने अपनी चपेट में ले रखा है। फिलहाल उनका मेडिकल में इलाज चल रहा है। कस्बे में ब्लॉक कांग्रेस का यह पहला केस है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग मामले की जानकारी होने से इनकार कर रहा है।

