Monday, May 11, 2026
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क्या शहर से कोरोना की विदाई शुरू, मौतों पर ब्रेक नहीं ?

  • लगातार पांचवें दिन हजार से कम निकल रहे पॉजिटिव
  • 6812 टेस्टिंग में 314 संक्रमित, 11 मौत

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना की दूसरी लहर क्या शहर से विदा ले रही है। यह संकेत स्वास्थ्य विभाग की दैनिक रिपोर्ट दे रही है। लगातार पांचवें दिन एक हजार से कम संक्रमित निकल रहे हैं। बुधवार को जारी हुई रिपोर्ट में दर्शाया गया कि 6812 की टेस्टिंग में 314 लोग संक्रमित निकले और 11 लोगों की मौत हुई।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अखिलेश मोहन ने बताया कि पांच दिन से कोरोना का ग्राफ अचानक गिरा है। पहले रोज एक हजार से ज्यादा संक्रमित निकल रहे थे, जो अब घटकर 500 से कम हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कोरोना से अब तक 60749 लोग संक्रमित हो चुके हैं और 651 लोगों की मौत हो चुकी है।

इस वक्त 4680 लोग घर में रहकर इलाज करा रहे हैं। वहीं, 8170 लोग एक्टिव केस है। उन्होंने बताया कि कोरोना को हराकर 1135 लोग घर आ चुके हैं। कोरोना का ग्राफ भले कम हो रहा हो, लेकिन मौतों की संख्या में ब्रेक लगा पाना प्रशासन के लिये मुश्किल पैदा कर रहा है।

कोरोना संक्रमित भले ही पांच प्रतिशत से कम हो गया हो, लेकिन एक दिन में 50 फीसदी तक लोग संक्रमित हुए थे। वहीं, सच्चाई यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने आरटीपीसीआर जांच कम कर दी है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना कहर बरपा रहा है।

कई गांवों में लोग न केवल संक्रमित हो रहे हैं, बल्कि मौत के आगोश में भी लोग समा रहे हैं। हर कोई इस बात पर चकित है कि जिस रफ्तार से कोरोना संक्रमित निकल रहे थे, उनमें अचानक कमी कैसे आ रही है। या फिर स्वास्थ्य विभाग आंकड़ों के साथ खेल कर रहा है। छह दिन में 4076 लोग संक्रमित हुए और 73 लोगों की मौत हुई। जबकि गैर सरकारी आंकड़े मौतों की संख्या 125 से ज्यादा दर्शा रहे हैं।

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छह महीने में नौ हजार, सिर्फ अप्रैल में 30 हजार

प्रशासन लाख दावा कर ले कि कोरोना का संक्रमण कम हो रहा है, लेकिन दूसरी लहर ने जिस खतरनाक अंदाज में कहर बरपाया है। उसके सामने कोरोना की पहली लहर कोई मायने नहीं रखती है। गत वर्ष कोरोना की पहली लहर में मार्च से सितंबर तक सिर्फ नौ हजार पॉजिटिव निकले थे, जबकि दूसरी लहर में अकेले अप्रैल महीने में 30 हजार मामले में निकल आये हैं। जहां पहली लहर में मेरठ में 21 हजार मामले थे, जबकि इन 45 दिन में 40 हजार मामले सामने आ चुके हैं।

कोरोना की दूसरी लहर ने वेस्ट यूपी में सर्वाधिक कहर मेरठ में बरपाया है। मंडल का एकमात्र मेडिकल कालेज होने के कारण कोरोना से सिर्फ 15 मई तक 150 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इसमें दूसरे जनपद के कोरोना संक्रमित भी शामिल थे। जबकि अप्रैल महीने में यह आंकड़ा 300 से अधिक पहुंच गया था। जिस तरह से सूरजकुंड श्मशान घाट में रोज 60 से 70 शवों का अंतिम संस्कार हुआ।

उनमें सर्वाधिक शव मेडिकल कालेज से ही आ रहे थे। कोरोना की दूसरी लहर सही मायनों में 15 मार्च से शुरु हुई थी, लेकिन एक अप्रैल को मेरठ में 52 संक्रमित निकले थे और तीन लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद यह ग्राफ इस कदर तेजी से बढ़ा कि रुकने का नाम नहीं लिया। पांच मई को सर्वाधित 2562 संक्रमित निकले थे, उस दिन 5200 के करीब लोगों की टेस्टिंग हुई थी।

15 दिन तक लगातार रोज एक हजार से ज्यादा संक्रमित निकलते रहे। डेढ़ हजार से लेकर 1900 तक संक्रमित एक सप्ताह तक निकले। कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे प्रशासनिक और हेल्थ सिस्टम को एक्सपोज करके रख दिया। इस वक्त मेरठ में 62 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 650 से ज्यादा लोग मौत की नींद सो चुके हैं। प्रशासन दावा कर रहा है कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार कमी आ रही है, लेकिन मौतों की बढ़ती संख्या को लेकर पूरा सिस्टम खामोश है।

नहीं टूट रहा शवों के आने का सिलसिला

सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट पर शवों के आने का सिलसिला टूटता नजर नहीं आ रहा है। बुधवार को भी 32 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। कोरोना के शवों का भी अंतिम संस्कार कोविड नियमों को ध्यान में रखकर किया गया। उधर, अभी नये प्लॉटफार्म का इस्तेमाल नहीं होने से यहां लोगों को कई घंटों तक अंतिम संस्कार करने के लिये इंतजार करना पड़ा।

कोरोना के बाद से सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट के हालात खराब हैं। यहां प्रतिदिन 50 के आसपास शव अंतिम संस्कार के लिये आ रहे थे। अब भी 30 से 40 शवों का अंतिम संस्कार प्रतिदिन किया जा रहा है। बुधवार को भी 32 शवों का अंतिम संस्कार किया गया।

हालात यहां इतने खराब हो चुके थे कि शवों की संख्या बढ़ने पर यहां नगर निगम की ओर से नये प्लेटफार्म बनाये गये, लेकिन अभी तक उन नये प्लेटफार्म का इस्तेमाल तक नहीं किया गया। लोग यहां अपनों के शवों को लेकर अपनी बारी का इंतजार कर तक नजर आये। कई कई घंटे लोगों को शवों का अंतिम संस्कार करने के लिये इंतजार करना पड़ा।

उधर, क्षेत्रवासियों ने यहां अस्थायी अंतिम संस्कार प्लेटफार्म को भी बाहरी लोगों के विरोध के बाद बंद कर दिया गया। अब वहां भी अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहे हैं। जिस कारण लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है। बुधवार को भी यही हालात रहे। यहां 32 शव आये कई को तो घंटों भर बाद जगह मिली अंतिम संस्कार करने के लिये।

अपनों की याद में आंसू बहाते रहे लोग

कोरोना मरीजों के मरने के बाद उन्हें सीधे यहां श्मशान लाया जा रहा है। उनका शव कोविड नियमों का पालन कर थ्री लेयर पैक होता है। जिस कारण लोग अपनों को देख भी नहीं पाते। ऐसे ही कई परिजनों अपनों के आखिरी दर्शन करने को लाचार नजर आये, लेकिन उन्हें उनके दर्शन नहीं हो पाये। इस दौरान लोग आंसू बहाते नजर आये।


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