- एसडीएम व सीओ पुलिस के साथ खड़े होकर रोक रहे थे प्रत्याशी व समर्थकों को
जनवाणी संवाददाता |
बड़ौत: जिल पंचायत अध्यक्ष की चुनावी प्रक्रिया में अपनी फजीहत करा चुका जिले का प्रशासन ब्लाक प्रमुखी के चुनाव में भी बाज नहीं आया। बाज आया तो फिर से अपनी फजीहत कराकर ही। छपरौली में प्रत्याशी को नामांकन करने से रोका गया। आखिर यह कौन सा आदेश था कि वह प्रत्याशी को नामांकन करने रोक रहे थे।
फिर वह भाजपा नेताओं की भले बनने के लिए पूरी ताकत के साथ बेरिकेडिंग के सामने खड़े होकर उन्हें नामांकन नहीं करने दे रहे थे। इस संबंध में न तो एसडीएम व और न ही मौके पर रहे सीओ बड़ौत कुछ बता रहे थे।
ब्लाक प्रमुख पद के लिए छपरौली में दैनिक जनवाणी ने गुुरुवार के अंक में आशंका जताई थी कि छपरौली में रालोद नेता व कार्यकर्ता हलालपुर गांव निवासी अंशु चौधरी के पक्ष में खड़े हो सकते हैं। हालांकि अंशु चौधरी को रालोद की ओर से प्रत्याशी बनने की हरी झंडी नहीं दी थी।
न ही रालोद ने ब्लाक प्रमुख चुनाव में कोई रिस्क लिया। लेकिन अंशु चौधरी व उसका परिवार रालोद से संबंध रखता है। भाजपा को आशंका थी कि यदि अंशु चौधरी मैदान में आई तो मुकाबला होगा। उनकी आशंका सही साबित हुई। पहले तो अंशु चौधरी के पति ब्रजपाल सिंह को गांव से बाहर निकलते ही पुलिस ने गिरफ्तार किया।

हालांकि पुलिस ने उसे जिला बदर करना बताया है। फिर जब अंशु चौधरी नामांकन करने के लिए छपरौली ब्लाक में जा रही थी तो तब उसे बेरिकेडिंग पर रोक लिया। आश्चर्य यह है कि पुलिस उसके कागजों की जांच करने लगी। उसे नामांकन करने नहीं जाने दिया।
खूब धक्का-मुक्की हुई। रालोद नेता व कार्यकर्ताओं ने पुलिस का सामना किया। एसडीएम दुर्गेश मिश्र और सीओ आलोक सिंह के अलावा छपरौली थानाध्यक्ष महिला व पुरुष पुलिस कर्मियों के साथ मोर्चा बनाकर डटे हुए थे। धक्का-मुक्की और रालोद कार्यकर्ताओं के पीछे न हटने की जिद के बाद अंशु को नामांकन करने के लिए जाने दिया। अब सवाल है कि आखिर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी किस आदेश के तहत अंशु चौधरी को नामांकन दाखिल करने से रोक रहे थे?
इसे लेकर हर कोई आश्चर्यचकित है। कहीं पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी भाजपा नेताओं की सहानुभूति लेने के लिए दूसरे प्रत्याशियों को नामांकन करने जाने से रोक रहे थे। जबकि भाजपा के कई नेता व कार्यकर्ता एआरओ के पास ही खड़े होकर भाजपा की प्रत्याशी का नामांकन जमा करा रहे थे।
अंशु चौधरी के साथ केवल प्रस्तावक ही अंदर जाने दिए। इस संबंध में पूछने पर न तो एसडीएम ने कुछ बताया और न ही सीओ ने कुछ कहा। यहीं नहीं बल्कि चुनावी प्रक्रिया के बाद दोनों अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो दोनों अधिकारियों ने फोन भी रिसीव नहीं किए।

