- हर रोज हो रही थी समीक्षा बैठक
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: प्रशासन कांवड़ यात्रा को लेकर तैयारियों में जुटा था। कई दौर की मीटिंग कमिश्नर सुरेन्द्र कुमार व डीएम के. बालाजी ले चुके थे। प्रत्येक विभागों के आला अफसरों को दिशा-निर्देश भी दिए गए थे। कोरोना संक्रमण के चलते सरकार पीछे नहीं हट रही थी, जिसके चलते प्रशासन भी कांवड़ यात्रा की तैयारियों में जुटा था।
प्रशासनिक अफसरों को लगातार लखनऊ से निर्देशित किया जा रहा था कांवड़ यात्रा को लेकर। कमिश्नर सुरेन्द्र कुमार सिंह, एडीजी राजीव सबरवाल व आईजी प्रवीण कुमार लगातार पुलिस व प्रशासनिक अफसरों के साथ कांवड़ यात्रा को लेकर तैयारियों पर बैठक भी कर रहे थे। एक तरह से प्रशासन ने अंतिम रूप तैयारियों को दे दिया था।
मेरठ, हापुड, बुलंदशहर, बागपत, जिले में गंगा के किनारे शहरों व घाटों पर लगातार निरीक्षण भी कर रहे थे। क्योंकि मेरठ के औघड़नाथ ऐतिहासिक मंदिर हो या फिर बागपत के पुरामहादेव मंदिर, दोनों पर ही तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा था। मंदिर कमेटी के लोग भी जलाभिषेक को लेकर तैयारी कर रहे थे। अधिकारियों की भी उनके साथ मीटिंग हो चुकी थी।

हालांकि उत्तराखंड सरकार पहले ही इस पर रोक लगा चुकी थी, लेकिन इसके बाद भी मेरठ मंडल के अधिकारी कांवड़ यात्रा को लेकर तैयारी में जुटे थे। उन्हें भी लखनऊ से कांवड़ यात्रा को लेकर हर रोज दिशा-निर्देश मिल रहे थे, जिसके चलते मीटिंग दर मीटिंग की जा रही थी।
कांवड़ मार्गों को दुरुस्त करने सुबह से लग गया था नगर निगम दस्ता
प्रदेश सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा रद किये जाने से प्रशासन की सारी की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई हैं। नगर निगम ने तो बाकायदा कांवड़ मार्गों की मरम्मत के लिए सुबह सवेरे से ही अपना निर्माण विभाग का अमला भेज दिया था। उधर, यात्रा रद होने से पुलिस व प्रशासिनक अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।
कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने पहले ही कांवड़ यात्रा पर अंकुश लगा दिया था, लेकिन प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा पर किसी भी तरह की पाबंदी न लगाते हुए अधिकारियों को तैयारियों के निर्देश दे दिये थे। इसके बाद पूरे प्रदेश का पुलिस व प्रशासनिक अमला इसकी तैयारियों में जुट गया।
ऊर्जा निगम को कांवड़ मार्गों के खंभों पर करंट फैलने की संभावित घटना को देखते हुए प्लास्टिक बांधने तथा जर्जर तारों को बदलने, वन विभाग को बिजली तारों के पास जर्जर पेड़ों की डालियों की छंटाई करने, सिंचाई विभाग को नहर कांवड़ मार्ग ठीक करने, स्वास्थ्य विभाग को पूरे कांवड़ मार्गों पर जगह-जगह शिविर लगाने, एमडीए को टूटे डिवाइडर सही कराने, जल निगम को पेयजल के लिए कांवड़ शिविरों के पास पानी के टेंकर लगाने, पीडब्ल्यूडी को कांवड मार्गों के गड्ढे भरने, नगर निगम को शिवालयों के आसपास सफाई के साथ-साथ नगरीय सीमा के कांवड़ मार्गों की मरम्मत के निर्देश दिये गये थे।
जबकि एडीजी व आईजी को सुरक्षा इंतजाम तथा यातायात पुलिस को यह तय करना था कि कहां पर वन-वे रहेगा और कहां पर ट्रैफिक बंद किया जायेगा। डीएम को मॉनिटरिंग करनी थी कि पूरे कांवड़ यात्रा में कहां और किस स्थान पर कितने मजिस्ट्रेट तैनात किये जायेंगे।
गत दिवस नगर निगम सभागार में नगर आयुक्त मनीष बंसल ने इस बाबत बैठक लेकर निर्देश भी दिये थे, लेकिन शनिवार की रात्रि में कांवड़ संघ की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मुलाकात के बाद राज्य सरकार ने कांवड़ यात्रा रद्द कर दी। इससे सरकारी विभागों के अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।


