Friday, June 19, 2026
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विधानसभा चुनाव 2022ः सपा में टिकट बंटवारे को लेकर होगा ’घमासान’

  • एक-एक सीट पर खड़े हैं कई-कई दावेदार, सपा में सदस्यता लेने वालों की भी लग रही लाईन
  • नए दिग्गजों के सपा में शामिल होने से पुराने कार्यकर्ताओं में निराशा

मिर्जा गुलजार बेग |

मुजफ्फरनगर: 2022 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ राजनेताओं ने भी अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दी है। राजनेता अपनी जोड़-घटा करने के बाद पार्टी बदलने में मशरूफ हैं। लगतार पार्टी छोड़ने व पार्टी में शामिल होने का सिलसिला जारी है।

भाजपा, सपा व रालोद में शामिल होने में राजनेता ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। समाजवादी पार्टी का कुनबा मुजफ्फरनगर में जिस तरह से बढ़ रहा है, उससे लगता है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर घमासान होने वाला है। जनपद की छह विधानसभा सीटों पर पहले ही सपा के कई-कई नेता टिकट की दावेदारी ठोंक रहे थे, सपा में नए दिग्गजों के शामिल होने के बाद दावेदारों की संख्या और बढ़ गई है।

मुजफ्फरनगर में छह विधानसभा सीटें हैं, जिन पर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने विजयश्री हासिल की थी। 2017 से पहले इन विधानसभा सीटों पर सपा व रालोद का वर्चस्व रहता था। मुजफ्फरनगर में जाट-मुस्लिम राजनीति जहां सफल गठजोड़ बनाती थी, वहीं दलित व मुस्लिम गठजोड़ भी यहां पर कामयाब रहता था, जिसके चलते सपा, बसपा व रालोद यहां पर अपनी सीट जीतने में कामयाब होते थे।

2013 में हुए साम्प्रदायिक दंगों के बाद यह गठजोड़ पूरी तरह से टूट गये थे और उसका परिणाम यह रहा था कि इन सभी सीटों पर सपा, बसपा व रालोद ने करारी शिकस्त खाई थी और भाजपा सभी छह सीटों को जीतने में कामयाब रही थी।

एक बार फिर जनपद में पहले वाले गठजोड़ बनते नजर आ रहे हैं, जिसके चलते रालोद व सपा के गठबंधन को मजबूती मिलने के आसार हैं, जबकि बसपा की निष्क्रियता के चलते वह अपना जनाधार खोती नजर आ रही। बसपा व कांग्रेस के दिग्गज नेता लगातार उसके अलविदा कहकर सपा व रालोद में शामिल हो रहे हैं। एक ओर सपा व रालोद का कुनबा तो बढ़ रहा हैं, वहीं दूसरी ओर सपा में टिकट मांगने वाले दावेदार भी बढ़ रहे हैं।

मुजफ्फरनगर सीट के दावेदार

मुजफ्फरनगर विधानसभा सीट की बात करें तो इस सीट पर पूर्व राज्यमंत्री चितरंजन स्वरूप के पुत्र गौरव स्वरूप ने 2017 का चुनाव लड़ा था और उन्होंने भाजपा के कपिल देव अग्रवाल से शिकस्त खाई थी, इससे पहले चितरंजन स्वरूप की मौत के बाद हुए उपचुनाव में भी वह शिकस्त खा गये थे।

गौरव स्वरूप इस बार भी इस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं, जबकि बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुए राकेश शर्मा भी इस सीट से दावेदारी कर रहे हैं। सू़त्रों की मानें, तो गौरव स्वरूप के बड़े भाई सौरव स्वरूप उर्फ बंटी भी इस सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। इसके अलावा सचिन अग्रवाल व गौरव जैन भी इस सीट से अपनी दावेदारी ठोंके हुए हैं।

चरथावल विधानसभा सीट के दावेदार

चरथावल विधानसभा सीट पर भी दावेदारी के लिए घमासान है। इस सीट पर सपा के पूर्व प्रत्याशी व दर्जाप्राप्त राज्यमं़त्री मुकेश चैधरी इस बार फिर से टिकट मांग रहे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी में तीन योजनाओं से जिला महामंत्री के पर तैनात जिया चैधरी भी अपनी दावेदारी ठोंक रहे हैं।

जिया चैधरी छात्र राजनीति से आये हैं और शुरू से ही समाजवादी पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं। इसके अलावा रालोद छोड़कर सपा में शामिल हुए बाॅबी त्यागी , चरथावल चेयरमैन सतेन्द्र त्यागी, सपा के पूर्व नगराध्यक्ष अंसार आढ़ती व अब्दुल्ला राणा द्वारा भी इस सीट के लिए दावेदारी की जा रही है।

खतौली विधानसभा सीट के दावेदार

2017 में खतौली विधानसभा सीट से पूर्व सांसद संजय चैहान के पुत्र चंदन सिंह चैहान ने सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, परन्तु वह भाजपा के विक्रम सैनी से पराजित हो गये थे। चंदन चैहान इस बार खतौली के बजाए मीरापुर सीट पर दावेदारी कर रहे हैं, जबकि खतौली विधानसभा सीट पर विनय पाल, श्यामलाल उर्फ बच्ची सैनी, बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुए राजपाल सैनी व उनके पुत्र शिवान सैनी दावेदार हैं।

मीरापुर विधानसभा सीट के दावेदार

मीरापुर विधानसभा सीट पर दावेदारों की संख्या अधिक है। 2017 में भाजपा से बहुत कम वोटों से पराजित होने वाले लियाकत अली के अलावा यहां पर चंदन सिंह चैहान भी अपनी दावेदारी ठोंक रहे हैं। चंदन सिंह चैहान का इस सीट पर वर्चस्व है, क्योंकि उसके पिता संजय सिंह चैहान मोरना से विधायक रहने के साथ ही बिजनौर से एमपी भी रहे हैं। इसके अलावा इस सीट पर सपा के जिला महासचिव रहे वसी अंसारी, पूर्व नगराध्यक्ष मेहराजुदीन तेवड़ा व पुलिस सेवा से निवृत हुए निरीक्षक अब्बास अली द्वारा टिकट मांगा जा रहा है।

पुरकाजी विधानसभा सीट के दावेदार

पुरकाजी विधानसभा सीट पर भी सपा से कई नेताओं द्वारा टिकट मांगा जा रहा है। इस विधानसभा सीट पर 2017 में चुनाव लड़ चुकी उमा किरण के अलावा बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुए अनिल कुमार, नरेन्द्र वाल्मीकि व दीप्ति पाल द्वारा टिकट मांग जा रहा है।

बुढ़ाना विधानसभा सीट से दावेदार

सपा-रालोद गठबंधन के चलते हालांकि बुढाना विधानसभा सीट रालोद के खाते में जाने की उम्मीद जताई जा रही है, परन्तु इसके बावजूद भी सपा से यहां टिकट के दावेदारों की लम्बी लाइन है। इस सीट से सपा के जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी जहां अपनी दावेदारी कर रहे हैं, वहीं पूर्व में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त करने वाले फारूख, राजीव बालियान, आकिल मुर्तजा द्वारा अपनी दावेदारी की जा रही है। जबकि रालोद से भी इस सीट के लिए कई दावेदार हैं, जिनमें पूर्व विधायक नवाजिश आलम खां, पूर्व राज्यमंत्री योगराज सिंह, पूर्व विधायक राजपाल बालियान के अलावा कई और भी दावेदार शामिल हैं।

सपा में हो सकता है अंर्तकलह

2022 चुनाव में टिकटों के बंटवारे को लेकर पार्टी हाईकमान को सतर्कता बरतनी पड़ेगी। टिकटों के बंटवारे के समय पार्टी को यह ध्यान रखना पड़ेगा कि कई इसका असर उसके मतदाताओं या पार्टी के कार्यकर्ताओं पर तो नहीं पड़ रहा है। टिकट न मिलने से अंसतुष्ट नेताओं द्वारा बगावती तेवर भी देखने को मिल सकते हैं, जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ेगा। जनपद की सभी छह विधानसभा सीटों पर जिस तरह से दावेदारी की जा रही है, उसके चलते पार्टी हाईकमान को बहुत सतर्कता बरतनी पड़ेगी।

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