- दिनभर गर्म रहा अफवाहों का बाजार, पुराने मामलों में छापे की अफवाह
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शुक्रवार को दिनभर कैंट बोर्ड कार्यालय में सीबीआई टीम के पहुंचने से हड़कंप मचा रहा। सीबीआई की टीम ने यहां कैंट बोर्ड सीईओ से उनके कार्यालय में भी वार्ता की, जिसके बाद टीम वापस लौट गई। इसके बाद दिनभर कैंट बोर्ड कार्यालय में अफवाहों का माहौल गर्म रहा।
बोर्ड अधिकारियों के अनुसार टीम यहां रेड के लिये स्टाफ के सहयोग को पहुंची थी, हालांकि चर्चा रही कि पुराने मामले में भी टीम यहां पूछताछ करने के लिये आई है। कैंट बोर्ड से संबंधित कई मामले ऐसे हैं। जिनकी जांच सीबीआई के पास है।
बता दें कि कैंट बोर्ड हमेशा से ही विवादों में रहा है। यहां पहले भी कई बार ऐसे मामले हुए हैं। जिनकी सीबीआई जांच चल रही है। इसलिये सीबीआई टीम का कोई भी सदस्य पहुंचे तो पुराने मामले भी ताजा हो जाते हैं। शुक्रवार को सीबीआई टीम के कैंट बोर्ड पहुंचने की सूचना से यहां दिनभर हड़कंप मचा रहा।
कैंट बोर्ड कार्यालय में टीम के सदस्य कैंट बोर्ड सीईओ नवेन्द्र नाथ मिले और उनसे वार्ता की। टीम के सदस्य करीब आधा घंटा सीईओ से वार्ता करते रहे। इसके बाद टीम यहां से निकलकर वापस लौट गई। टीम के कैंट बोर्ड पहुंचने को लेकर जब कैंट बोर्ड कार्यालय अधीक्षक जयपाल सिंह तोमर से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि टीम के एक सदस्य सीईओ से मिले थे। जिन्होंने क्षेत्र में कहीं रेड के लिये कैंट बोर्ड के स्टाफ की मांग की। कहा कि किसी भी समय हमें आपके स्टाफ की आवश्यकता पड़ सकती है।
पुराने मामलों से भी जुड़े हो सकते हैं तार
यहां बता दें कि कैंट बोर्ड में पहले ऐसे कई मामले हो चुके हैं जिन्हें लेकर जांच सीबीआई कर रही है। इसके लिये यहां शुक्रवार को पहुंची टीम को भी पुराने विवादों से जोड़कर देखा जा रहा है। बोर्ड के पूर्व सदस्यों की मानें तो टीम यहां उन मामलों में भी पूछताछ के लिये आ सकती है। बता दें कि वर्ष 2011 में कैंट अस्पताल में दवा घोटाला हुआ था जिसकी जांच सीबीआई कर रही है।
इसके अलावा तीन साल पहले यहां एक भर्ती घोटाला भी हुआ था। जिसमें एक कर्मचारी योगेश को जेल भी जाना पड़ा था, इसकी जांच भी सीबीआई कर रही है। इसके अलावा यहां एक पूर्व उपाध्यक्ष की ओर से टोल के मामले को लेकर भी शिकायत की गई है। जिसे इससे जोड़ा जा रहा है। टोल के प्वाइंट अवैध रूप से बढ़ाये जाने की शिकायत है। बता दे कि कैंट के दवा घोटाले में यहां दो कंपाउंडरों को भी जेल जाना पड़ा था।
इस मामले की सीबीआई जांच की जा रही है। यहां बता दें कि इस घोटोले में करीब 40 लाख रुपये की दवाई का घोटाला किया गया था। इसमें यहां डा. अराधना पाठक, कार्यालय अधीक्षक एमए जफर का नाम भी सामने आया था। कैंट अस्पताल के दो कंपाउंडरों को तो इस मामले में जेल तक जाना पड़ा था। इसके अलावा अन्य मामलों में भी जांच का अंदेशा लगाया जा रहा है।
इसके अलावा कैंट बोर्ड के एक पूर्व मेंबर की ओर से टोल के ठेके को लेकर भी शिकायत की गई थी। जिसकी जांच आलाकमान के पास है। चर्चा है कि टोल के ठेके को लेकर भी यहां अधिकारियों से पूछताछ की जा सकती है, लेकिन कैंट बोर्ड अधिकारियों की ओर से इस विषय में यही कहा गया है कि टीम यहां रेड संबंधित कार्य के लिये पहुंची। इसके अलावा ओर कोई जानकारी नहीं दी गई।

