- ऋषभ एकेडमी 1992 में आया था अस्तित्व में
- 2003 में समिति द्वारा दिये शपथ पत्र में बताया पिछली कोई चल-अचल संपत्ति नहीं
- तीन बार श्री दिगंबर जैन मंदिर समिति का हो चुका है रजिस्ट्रेशन
- कहां गई करोड़ों की संपत्ति, मंंदिर में आने वाला दान व सोना-चांदी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ऋषभ एकेडमी का नाम आते ही घोटालों व भ्रष्ठाचार से रूबरू होने तस्वीर बनने लगती है। यह वह नाम है जिसका हमेशा ही विवादों से नाता रहा है। इसमें स्कूल के बॉथरूम में खुफिया कैमरों का आरोप हो या शिक्षकों का उत्पीड़न, लेकिन इन सब प्रकरणों का असर तो बच्चों की पढ़ाई पर ही पड़ रहा है। जानते है ऋषभ एकेडमी का इतिहास है क्या?
ऋषभ एकेडमी जिस श्रीश्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति का हिस्सा है। उसका रजिस्ट्रेशन 1972 में हुआ था। उस समय मंदिर में दान व अन्य स्रोतों से जमा की गई करोड़ों की चल-अचल संपत्ति थी। इसके बाद पुराना रजिस्ट्रेशन होने के बावजूद 1985 में समिति का दूसरी बार रजिस्ट्रेशन कराया गया।
इस समय भी मंदिर समिति के पास करोड़ों की चल-अचल संपत्ति थी। बात यहीं खत्म नहीं होती है। तीसरी बार 2003 में मंदिर समिति का रजिस्ट्रेशन फिर कराया गया। इस बार समिति के अध्यक्ष द्वारा एक शपथपत्र दिया गया। जिसमें बताया गया कि 2003 से पहले समिति के पास कोई चल-अचल संपत्ति नहीं है।
1992 में ही बन चुका था ऋषभ एकेडमी
जानकारी मिली है कि ऋषभ एकेडमी की शुरुआत 1992 में दिगंबर जैन मंदिर समिति द्वारा बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए की गई थी। उस समय जैन समाज द्वारा बच्चों को अच्छी शिक्षा व संस्कार दिलानें के लिए दान दिया जाता था। उससे स्कूल में शिक्षकों की तनख्वाह के साथ अन्य खर्च वहन किये जाते थे।
2003 में दिये शपथ पत्र में बोला था झूठ
2003 में जब श्रीश्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति का तीसरी बार रजिस्ट्रेशन कराया गया तो दिए गये शपथपत्र में बताया गया कि इससे पहले मंदिर समिति के पास कोई चल-अचल संपंत्ति नहीं है तो फिर 1992 से चल रहा ऋषभ एकेडमी क्या हवा में चल रहा था।
कुल मिलाकर ऋषभ एकेडमी का जन्म श्रीश्री1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति से ही हुआ है, लेकिन इस समिति का तीन बार रजिस्ट्रेश कराया गया है। यह साबित करनें के लिए काफी है कि इस पूरे प्रकरण में कितना बड़ा घोटाला है। बताया जा रहा है 100 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्ति व सोनें-चांदी के जेवरों की भी बंदरबाट हुई है।
इस मामले की शिकायत 21.12.21 को एसएसपी मेरठ से की जा चुकी है। जिसकी अभी जांच करनें की बात सामनें आ रही है। शिक्षा के क्षेत्र में एक बदनुमा नाम है। ऋषभ एकेडमी न जाने यहां पर शिक्षा लेने वाले बच्चों का भविष्य कैसा होगा।

