- छत के मलबे में दबकर हुई महिला-बच्चों की मौत
- रेहडा चालक के परिवार पर कहर बनकर टूटी बारिश
जनवाणी ब्यूरो |
शामली: एक मकान से चार जनाजे उठते ही देखने वालों की चित्कार से मोहल्ला पंसारियान में शोक पसर गया। जहां से भी जनाजे निकलने वहां पूरा आलम गमगीन हो गया। हर किसी की आंखें नम हो गई। चारों जनाजों के पीछे सैंकड़ों लोग चल रहे थे जिनमें ज्यादातर की आंखों में आंसू थे। भरा पूरा परिवार तेज हवा के साथ बारिश में एक झटके में समाप्त हो गया। बाद में गमगीन माहौल में चारों जनाजों को ईदगाह के कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया।
शामली शहर के मोहल्ला मोहल्ला पंसारियान निवासी शाहिद पुत्र जिंदा के परिवार पर अचानक तेज हवाओं के साथ बारिश का ऐसा कहर टूटा कि उसकी पत्नी और तीन बच्चों की मौत हो गई। करीब 50 गज में मजदूर शाहिद ने एक कमरे का घरौंदा बनाया था। इस घरौंदे पर लकड़ी की पुरानी कड़ियों व एक गाटर लगाकर पत्थर की सिल रखकर मिट्टी डाली गई थी।
उधर, ताउते तूफान के बाद मौसम विभाग ने तेज हवाओं के साथ बारिश की चेतावनी दे रखी थी। हुआ भी ऐसा ही और बुधवार दोपहर बाद से तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। बारिश पूरी रात चलती रही और शाहिद का घरौंदे से मिट्टी बहती रही।
कमरे में बैड पर शाहिद की पत्नी अफसाना (38), सुहैल (14), बेटी सानिया (12) व इरम (10) सोए हुए थे। कमरे के एक हिस्से में शाहिद अपने 16 वर्षीय पुत्र साहिल के साथ सोया हुआ था। अलसुबह पांच बजे अचानक ही कच्ची छत की कड़ियां टूटी और छत का मलबा भरभराकर नीचे सो रहे लोगों पर गिर गया।

मलबे में अफसाना समेत तीनों बच्चे दब गए जबकि शाहिद व बेटा साहिल दूसरी तरफ कड़ियों की ओट में बाल-बाल बच गए। मलबा गिरते ही चीख-पुकार मच गई जिसे सुनकर आसपास पड़ोस के लोग पहुंचे तो अंदर का मंजर देखकर सब सन्न रह गए। लोगों ने राहत बचाव कार्य करते हुए मलबे को उठाना शुरू किया तो महिला और तीनों बच्चे दबे हुए निकले। वहीं सूचना पर पहुंची पुलिस ने आनन-फानन में महिला व तीनों बच्चों को अस्पताल पहुंचा जहां पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
महिला बच्चों की मौत से पूरे परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों के आग्रह पर पुलिस ने शवों का पंचनामा भरकर परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद शवों को शाहिद के चचेरे भाइयों के मकान में ले जाया गया। दोपहर बाद जब मकान से चार जनाजे निकले तो पूरे मोहल्ले में रोने-बिलखने की आवाजे गूंजने लगी। इसके बाद जहां से भी एक साथ चार जनाजे निकले वहां-वहां हर किसी की आंखे नम हो गई। जनाजों के पीछे चलने वाले हर आदमी की आंखों में आंसू थे। बाद में गमगीन माहौल में शवों को सुपुर्द ए खाक कर दिया गया।
रेहड़ा चलाकर पत्नी-बच्चों का पालन करता था शाहिद
लॉकडाउन के बाद फिर से लॉकडाउन में शाहिद टूट चुका था। शाहिद पहले से ही मजदूरी करता था और रेहड़ा चलाकर अपने व चार बच्चों का पालन कर रहा था। पिछले लॉकडाउन में काम नहीं लगने पर शाहिद टूट गया था और कर्जदार हो चला था। एक साल पहले ही शाहिद के पुत्र जिंदा का इंतकाल हो गया। लॉकडाउन खुलने के बाद में कुछ महीनों में काम लगा तो खान-पान की स्थिति में सुधार आया। अचानक फिर से लॉकडाउन लग जाने से फिर से स्थिति खराब होने लगी थी। इस दौरान में शाहिद अपने मकान की कच्ची छत को भी सही से नहीं बना पाया।
डेढ़ साल से अधिकारियों के चक्कर काट रहा था दंपति
इसे अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही के साथ भ्रष्टाचार से भी जोड़ा जा सकता है। शाहिद ने करीब डेढ़-दो साल पहले ही किसी तरह जोड़ तोड़कर 50 गज में एक कमरे की दीवारें खड़ी कर उस पर पुरानी कड़ियां लगाकर किसी तरह छत बनाई थी। ताकि पत्नी बच्चे किराये या किसी के मोहताज न हो सके। मृतका अफसाना के भाई ने बताया कि शाहिद ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कच्चे मकान को बनाने के लिए आवेदन किया था। इसके बाद से अफसाना व शाहिद लगातार कभी डूडा विभाग तो कभी अन्य अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे लेकिन उनकी सुनने या देखने वाला कोई नहीं था। परिजनों के मुताबिक एक बार कुछ कर्मचारी उनके मकान पर आए थे और फोटो लेकर चले गए लेकिन आज तक उनके मकान को योजना का लाभ नहीं मिल पाया था।
गम के माहौल में नहीं याद रहा सोशल डिस्टेंस
अस्पताल से जैसे ही शव मोहल्ला पंसारियान में शाहिद के चचेरे भाइयों के मकान पर पहुंचे तो वहां घर परिवार, रिश्तेदार व कुनबे के साथ शहर के विभिन्न मोहल्लों से महिला-पुरूष सैंकड़ों की संख्या में पहुंचने लगे। पूरे मोहल्ला पंसारियान में लोग नजर आ रहे थे। हर कोई मासूम बच्चों के शवों का आखिरी दीदार करना चाहता था। ऐसे में भीड़ में लोग यह भी भूल गए कि कोरोना जैसी भयंकर महामारी चल रही है जिससे बचने के लिए हमें मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना है। गम के इस माहौल में सभी कोरोना गाइड लाइन को भूल गए थे।
बेटी के दवाई देने की बात करते बिलखता रहा शाहिद
शाहिद को पेट में कुछ परेशानी थी जिसके चलते वह पास के ही एक चिकित्सक से दवाई लाया था। सुबह के समय हादसे में अपनी पत्नी व बेटियों व बेटे को खो चुका शाहिद जब गुमसुम बैठा था तो अचानक वह फूट-फूटकर रोने लगा। शाहिद बिलखते हुए कह रहा था उसकी बेटी सानिया उर्फ चांद ने उसकी तबियत खराब होने पर उसे दवाई देकर अपना फर्ज निभाया था। जबकि वह उस समय सो रहा था लेकिन उसकी बेटी ने जगाकर उसे दवाई खिलाई थी। अपने छोटे बेटे मृतक सुहेल, बेटी इरम, सानिया व पत्नी को याद करते हुए शाहिद बिलख रहा था। बल्कि अपने छोटे बेटे सुहैल को बारिश में देर से घर पर पहुंचने पर शाहिद ने फटकार लगाते हुए उसे हिदायत दी थी। जिससे सोच-सोचकर शाहिद रो रहा था। शाहिद को देखकर मोहल्लेवासियों की भी आंखे नम थी।
एक साथ स्कूल जाते थे तीनों भाई-बहन
मृतक तीनों भाई-बहन एक साथ स्कूल जाते थे। मोहल्लेवासियों ने बताया कि तीनों बच्चे आपस में पहुत प्यार करते थे। मृतक सुहैल कक्षा 7 में, मृतक सानिया उर्फ चांद कक्षा 5 में और इमर कक्षा नर्सरी में प्राईमरी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। लॉकडाउन से पहले जब स्कूल खुले थे तब तीनो भाई-बहन एक साथ स्कूल जाते थे। तीनों बच्चों को याद करते हुए मोहल्लेवासी भी भावुक हो गए।

