Monday, June 14, 2021
- Advertisement -
HomeUttar Pradesh Newsबड़ौतदहेज न लेकर अभिनव ने कायम की थी मिसाल

दहेज न लेकर अभिनव ने कायम की थी मिसाल

- Advertisement -
+2
  • शादी में आए दहेज को लड़की पक्ष के लोगों को लौटा दिया था वापस

जनवाणी संवाददाता |

बड़ौत: फाइटर पायलट अभिनव ने शादी में दहेज नहीं लेकर, एक रूपया का रिश्ता कर एक मिशाल कायम की थी। जिसके बाद ही वे सुर्खियों में आए थे। उन्होंने ऐसा कारनामा कर दहेज के लालची लोगों की आंख खोलने का काम किया था। उनके साथ उनके इस मिशाल कायम करने वाले कार्य को भी हमेशा याद रखा जाएगा।

बता दे कि वायुसेना के फाइटर पायलट अभिनव चौधरी की शादी करीब डेढ़ वर्ष पूर्व 25 दिसंबर 2019 को बिनौली ब्लॉक के मवीकला गांव निवासी प्रधानाध्यापक शिवकुमार की पुत्री सोनिका उज्जवल के साथ हुई थी। करोड़ों के रिश्ते ठुकराकर युवा लेफ्टीनेंट के परिवार ने पूरे समाज को सकारात्मक संदेश दिया था।

परिवार ने रस्म में लड़की पक्ष से भेंट की गई नकद धनराशि भी ससम्मान वापस लौटा दी। ऐसा मिशालपूर्ण कार्य करके दहेज के लोभियों पर सबक सिखाने का काम किया था। फाइटर पायलट होने के बाद भी एक रूपय का रिश्ता करके अभिनव सुर्खियों में आ गए थे।

बता दे कि उनकी पत्नी सोनिका उज्ज्वल ने फ्रांस में रहकर मास्टर आॅफ साइंस की डिग्री हासिल की थी। बताया कि हाल में वह कहीं पर कोई नौकरी नहीं करती थी और अभिनव के साथ ही रह रही थी। जांबाज फाइटर पायलट अभिनव के साथ -साथ उनके कार्यो को भी कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

बचपन में ही माता-पिता के साथ चले गए थे मेरठ

परिजनों ने बताया कि अभिनव चौधरी व उनकी छोटी बहन मुद्रिका चौधरी बचपन से ही अपने माता सत्य चौधरी व पिता सतेन्द्र चौधरी के साथ गांव छोड़कर मेरठ में चले गए थे। गांव में उनके परिवार के लोग रह गए थे, जो हाल ही में भी यहीं रह रहे है। पिता की जमीन जायदाद भी गांव में ही है। अभिनव स्कूल की पढ़ाई के दौरान छुट्यिों में गांव में घूमने आते थे और बचपन के दोस्तों के साथ खूब मौच मस्ती करते थे। बताया कि सभी के साथ उनका अच्छा व्यवहार था और अपने बड़ो का आदर करते थे।

कुक्कु के नाम से चलता था पुसार में मेडिकल स्टोर

पायलट अभिनव चौधरी को घर के सभी लोग प्यार में कुक्कु पुकारते थे। घर व रिश्तेदारी में उनका यह नाम बहुत प्रसिद्ध था। अभिनव के नाम से बहुत कम लोग उन्हें जानते थे। गांव में भी उनके दोस्त व कुक्कु की कहर पुकारते थे। उनके इस प्यार के नाम से उनके पिता ने पुसार बस स्टैंड पर एक मेडिकल स्टोर खोला गया था। अभिनव जब भी गांव में आते थे तो वह मेडिकल स्टोर पर जरूर बैठते थे। यह मेडिकल स्टोर कई वर्षो तक चला। लेकिन अब यह मेडिकल स्टोर किसी दूसरे नाम से चल रहा है। जिसको देखकर आज भी पायलट के बचपन की याद ताजा हो जाती है।

What’s your Reaction?
+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

- Advertisement -

Leave a Reply

- Advertisment -spot_img

Most Popular

- Advertisment -

Recent Comments