- गांव में बरसों से जर्जर अवस्था में खड़ा है मुक्तिधाम
जनवाणी संवाददाता |
फलावदा: क्षेत्र के गांव महलका में स्थित शमशान घाट बरसों से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।जर्जर भवन किसी भी दिन भयावह हादसे का सबब बन सकता है। ग्रामीणों को शव के दाह संस्कार के दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों द्वारा आशंका जताई जा रही है कि जर्जर भवन से किसी दिन महलका में मुरादनगर कांड की पुनरावृत्ति न हो जाए।
जानकारी के मुताबिक महलका के शमशान घाट में अपनी जर्जर दशा पर आंसू बहा रहे मुक्ति धाम का नाम निर्माण तत्कालीन ग्राम प्रधान रतनलाल द्वारा कराया गया था। करीब डेढ़ दशक बाद यह भवन जर्जर हो गया है।आलम यह है कि यहां आने वाले लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
खराब मौसम और बरसात के दिनों में ग्रामीणों को मुसीबत झेलनी पड़ती है। मुक्तिधाम की दशा सुधारने के लिए लाखों रुपए खर्च किए जा चुके लेकिन उसके बाद भी स्थिति दयनीय बनी हुई है। शमशान घाट गांव के बाहर स्थित है।ग्रामीणों ने बताया समस्त हिंदू समाज का एक ही श्मशान घाट है।
ग्रामीणों का कहना है कि शमशान के लिए सरकार से मिला धन कमीशन खोरी की प्रथा में बंदरबांट होकर रह गया।फिलहाल स्थिति यह है कि श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए बने चबूतरे जर्जर हो चुके हैं। बैठने का कोई उचित स्थान नही है।
दीवारो मे दरार आने के कारण भवन ज़मीदोज़ होने की आशंका बनी हुई है।उक्त स्थल की उपेक्षा होती आ रही है। सरकारी नुमाइंदे विगत दिनों मुरादनगर जिले में हुई हृदय विदारक घटना से सबक लेने को तैयार नहीं है।

