Tuesday, June 28, 2022
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खोखों पर कार्रवाई, कई हेक्टेयर में अवैध कॉलोनियां

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  • कमिश्नर, एमडीए वीसी की सख्ती का इंजीनियरों पर नहीं कोई असर
  • इंजीनियरों की मेहरबानी से कई हेक्टेयर जमीन पर खड़ी हो गई अवैध कॉलोनी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: खोखों पर कार्रवाई की जा रही हैं, लेकिन कई हेक्टेयर में अवैध विकसित कर दी गई, जिन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही हैं। आखिर एमडीए इंजीनियरों की इन पर मेहरबानी की वजह क्या हैं? क्या ऐसी अवैध कॉलोनियों पर भी एमडीए का चलेगा बुलडोजर या फिर इसी तरह से मेहरबानी चलती रहेगी। कमिश्नर की सख्ती के बावजूद यह सब चल रहा है, जो इंजीनियरों का एक तरह से दुस्साहस ही कहा जाएगा।

कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह और एमडीए उपाध्यक्ष मृदुल चौधरी ने अवैध निर्माणों को लेकर तमाम सख्ती कर रखी हैं, लेकिन इसके बावजूद एमडीए के इंजीनियर बाज नहीं आ रहे हैं। एक के बाद एक अवैध कॉलोनियां विकसित करायी जा रही हैं। ऐसी ही एक अवैध कॉलोनी है एनएच-58 पर स्थित बीआईटी ग्लोबल स्कूल और जीडी गोयनका स्कूल से सटकर यह हेक्टेयर जमीन में अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही हैं। इस अवैध कॉलोनी पर एमडीए के इंजीनियर खास मेहरबान हैं। सड़कों का निर्माण कराया जा रहा हैं।

कॉलोनी में अभी सुविधाएं पूरी नहीं है कि विद्युतीकरण भी कर दिया गया हैं। आम आदमी बिजली का कनेक्शन लेने का प्रयास करें तो महीनों तक उसे ऊर्जा निगम के अधिकारी परेशान करते हैं, लेकिन यहां तो बिजली के खंभे भी लगा दिये हैं और विद्युत ट्रांसफार्मर भी। यह कैसे संभव हो गया। ऊर्जा निगम के अधिकारी भी भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं। जब बार-बार कमिश्नर और एमडीए उपाध्यक्ष लिख रहे है कि अवैध कॉलोनी में विद्युतीकरण नहीं किया जाए। फिर भी विद्युतीकरण कर दिया गया। इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। भ्रष्टाचार में एमडीए के इंजीनियर ही लिप्त नहीं है, बल्कि ऊर्जा निगम के इंजीनियर भी लिप्त हैं।

कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह की सख्ती के बाद शहर में अब तक 35 कॉलोनियों व अवैध निर्माणों का ध्वस्तीकरण किया जा चुका है। फिर भी शहर में अवैध निर्माण कैसे होने दिये जा रहे हैं? आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं? इंजीनियरों के स्तर पर कैसे निर्माण होने दिये जा रहे हैं? निर्माण करने वालों पर एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई जा रही हैं, यही तो भ्रष्टाचार का खेल चल रहा हैं।

कमिश्नर जितनी सख्ती कर रहे हैं, उसी तरह से भ्रष्टाचार भी इंजीनियरों के स्तर पर बढ़ रहा हैं। जिस कॉलोनी की हम बात कर रहे है, वह कॉलोनी एनएच-58 पर स्थित सुभारती कॉलोनी से ठीक पहले हैं, जहां पर बीआईटी ग्लोबल स्कूल और जीडी गोयनका स्कूल से सटकर यह हेक्टेयर जमीन में विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी पर कौन कार्रवाई करेगा? फिलहाल तो यह कॉलोनी इंजीनियरों को दिखाई नहीं दे रहे हैं। जब इसमें मकान बन जाएंगे, तब दिखाई देगी।

एक तरह से इस अवैध कॉलोनी का मानचित्र यदि एमडीए से स्वीकृत कराया होता तो करोड़ों का राजस्व प्राप्त किया जा सकता था, लेकिन यहां जब अवैध कॉलोनी को विकसित करने की छूट एमडीए इंजीनियरों ने दे रखी है, फिर मानचित्र स्वीकृत कौन करायेगा? एमडीए के इंजीनियरों पर अंगूली भी उठ रही है कि ध्वस्तीकरण करने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही हैं। इसी वजह से कमिश्नर ने इंजीनियरों से सीधे फोन पर धमकाना भी आरंभ कर दिया हैं।

हाइवे पर तैयार हो गया होटल

एनएच-58 पर ही इसी कॉलोनी से थोड़ा आगे चलेंगे तो बड़ा होटल तैयार हो गया हैं। यह होटल भी ग्रीन बेल्ट में बना हुआ हैं। ‘जनवाणी’ इसकी खबर कई बार प्रकाशित कर चुका हैं, लेकिन इसके बाद एमडीए के इंजीनियरों ने ग्रीन बेल्ट में बने अवैध होटल को नहीं गिराया। ग्रीन बेल्ट को लेकर एनजीटी ने सख्ती कर रखी हैं। डा. अजय भी एनजीटी में ग्रीन बेल्ट पर अवैध कब्जे के खिलाफ याचिका दायर कर रखी हैं। फिर भी एमडीए के इंजीनियर ग्रीन बेल्ट में अवैध होटल की बिल्डिंग बनाकर खड़ी करा दी। बिल्डिंग पर इंजीनियरों ने कोई कार्रवाई तक नहीं की। इंजीनियर देवेन्द्र चौहान के खिलाफ भी एमडीए कोई कार्रवाई नहीं कर रहा हैं। पहले इंजीनियर है, जो ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण दर अवैध निर्माण कराये जा रहे हैं।

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