जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी हैं। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती है। उनकी पार्टी के कई कद्दावर नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं। वहीं कई नाराज हैं।
ऐसे में उन्होंने भाजपा के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस और वामदल का साथ मांगा था। हालांकि दोनों ही पार्टियों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया था। वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने उन्हें गठबंधन के स्थान पर अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने की सलाह दी थी। अब वामदल ने भी टीएमसी को अपना जवाब दे दिया है।
वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमन बोस ने रविवार को कहा, ‘पश्चिम बंगाल को धार्मिक ध्रुवीकरण से बचाने के लिए हम भाजपा और टीएमसी के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। हमारे (कांग्रेस और वाम मोर्चा) के बीच कोई गलतफहमी नहीं है। हालांकि सीट बंटवारे पर अभी चर्चा होना बाकी है।’
To save West Bengal from religious polarisation, we will fight the election together against BJP & TMC. There is no misunderstanding between us (Congress and the Left Front). Though discussion on seat-sharing is yet to take place: Left Front Chairperson Biman Bose pic.twitter.com/O7hU1GisCl
— ANI (@ANI) January 17, 2021
कांग्रेस ने टीएमसी की सलाह के बाद पेशकश की है कि वह भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए गठबंधन बनाने के स्थान पर पार्टी (कांग्रेस) में विलय कर लें। राज्य कांग्रेस प्रमुख अधीर रंजन चौधरी ने प्रदेश में भाजपा के मजबूत होने के लिए सत्तारूढ़ दल को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा,’हमें तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन में कोई दिलचस्पी नहीं है।
पिछले 10 सालों से हमारे विधायकों को खरीदने के बाद तृणमूल कांग्रेस को अब गठबंधन में दिलचस्पी क्यों है। अगर ममता बनर्जी भाजपा के खिलाफ लड़ने को इच्छुक हैं तो उन्हें कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए क्योंकि वही सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई का एकमात्र देशव्यापी मंच है।’
टीएमसी ने बुधवार को वाम मोर्चा और कांग्रेस से भाजपा की ‘सांप्रदायिक एवं विभाजनकारी’ राजनीति के खिलाफ लड़ाई में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ देने की अपील की थी। हालांकि, दोनों दलों ने इस सलाह को सिरे से खारिज कर दिया था।
पार्टी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने पत्रकारों से कहा था कि अगर वाम मोर्चा और कांग्रेस वास्तव में भाजपा के खिलाफ हैं तो उन्हें भगवा दल की सांप्रदायिक एवं विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ लड़ाई में ममता बनर्जी का साथ देना चाहिए।

