Sunday, May 17, 2026
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बेगमपुल स्टेशन टनल के लिए टीबीएम की एसेम्ब्लिंग अंतिम चरण में

  • स्टेशनों को आपस में जोड़ने के लिए टनल बनाने का कार्य भैंसाली से मेरठ सेंट्रल की दिशा में पहले ही हो चुका शुरू

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर पर मेरठ में भूमिगत स्टेशनों का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। इन स्टेशनों को आपस में जोड़ने के लिए टनल बनाने का काम भैंसाली से मेरठ सेंट्रल की दिशा में पहले ही शुरू हो चुका है और तेज गति से चल रहा है। अब एमईएस कॉलोनी के पास के नॉर्थ शाफ्ट से बेगमपुल आरआरटीएस स्टेशन की ओर टनल बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) की असेंबलिंग अंतिम चरण में पहुच गयी है। जल्दी यह टीबीएम टेनेलिंग शुरू करेगी।

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर पर मेरठ में मेरठ सेंट्रल, भैंसाली और बेगमपुल तीन भूमिगत आरआरटीएस स्टेशन हैं। इन स्टेशनों को आपस में जोड़ने के लिए कुल तीन जुड़वां समानान्तर टनल बनेंगी, जिनमें पहली टनल भैंसाली से मेरठ सेंट्रल (2 किमी) के बीच, दूसरी टनल भैंसाली से बेगमपुल (1 किमी) और तीसरी टनल एमईएस कॉलोनी के पास के नॉर्थ शाफ्ट से बेगमपुल (लगभग 700 मीटर) के बीच बनेगी।

बेगमपुल और नॉर्थ शाफ्ट के बीच बनने वाली टनल मेरठ की सबसे छोटी टनल होगी। बेगमपुल स्टेशन से नॉर्थ शाफ्ट की ओर जाते हुए आरआरटीएस ट्रेनें रैम्प के जरिये एमईएस कॉलोनी स्टेशन पर एलिवेटेड हो जाएंगी। मेरठ सेंट्रल, भैंसाली और बेगमपुल तीनों स्टेशनों को टनल के जरिये आपस में जोड़ने की योजना पर पहले ही काम शुरू हो चुका है। नॉर्थ शाफ्ट से बेगमपुल की ओर के टनल के लिए नॉर्थ शाफ्ट पर करीब 17 मीटर की गहराई में टीबीएम लॉन्चिंग शाफ्ट बनाई गयी है।

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इस लौंचिंग शाफ्ट में दो टीबीएम लॉंच की जाएगी जो बेगुमपुल की ओर की टनल बनाएगी। इस क्रम में पहली टीबीएम की असेंबलिंग पूरी होने वाली है। इसके बाद इस टनल के समानान्तर दूसरी टनल बनाने वाली दूसरी टीबीएम की भी असेंबलिंग यहाँ प्रारम्भ होगी। आरआरटीएस नेटवर्क पर बनाई जा रही टनल का व्यास 6.5 मीटर होगा। भारत में मास ट्रांजिट प्रोजेक्ट में पहली बार 6.5 मीटर व्यास की टनल का निर्माण किया जा रहा है। नॉर्थ शाफ्ट से बेगमपुल तक टनल निर्माण पूरा होने के बाद टीबीएम को बेगमपुल में बनाई गई रिट्रीविंग शाफ्ट से बाहर निकाला जाएगा।

इस टनल में यात्रियों की सुविधा के लिए लगभग 250 मीटर पर एक आपातकालीन क्रॉस पैसेज बनाया जाएगा। बेगमपुल स्टेशन से नॉर्थ शाफ्ट की ओर जाते हुए आरआरटीएस ट्रेनें रैम्प के जरिये एमईएस कॉलोनी स्टेशन पर एलिवेटेड हो जाएंगी। 6.5 मी. व्यास की टनल ट्रेनों की गति अधिक होने के कारण यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने में सहायता प्रदान करेगी। टीबीएम द्वारा टनल सैगमेंट्स की मदद से भूमि के भीतर टनल के रिंग बनाए जाते हैं।

टनल रिंग बनाने के लिए आम तौर पर सात (7) टनल सेगमेंट्स का उपयोग किया जाता है। एनसीआरटीसी के कास्टिंग यार्ड में सुनिश्चित और गुणवत्ता नियंत्रण के साथ सुरंग सेगमेंट्स का निर्माण किया जा रहा है। टीबीएम मशीन कई कलपुर्जों को जोड़कर तैयार की जाती है और सुरक्षा मानदंडों के तहत इसकी असेम्ब्लिंग की इस प्रक्रिया में समय लगता है। इस टीबीएम में कटर हेड, फ्रंट शील्ड, मिडिल शील्ड, टेल शील्ड, इरेक्टर, स्क्रू कंवेयर और कई अन्य महत्वपूर्ण भाग शामिल हैं।

आरआरटीएस ट्रेन के लिए दुहाई डिपो में ट्रैक तैयार

मेरठ: दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर के प्रायोरिटी सेक्शन पर मार्च 2023 तक देश की पहली आरआरटीएस ट्रेन चलाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एनसीआरटीएस तेजी से कार्य कर रहा है। इस कॉरिडोर पर चलने वाली आरआरटीएस ट्रेनें गुजरात के सावली से जल्द गाजियाबाद स्थित दुहाई डिपो पहुंचेंगी। दुहाई डिपो में इनके लिए ट्रैक बनकर तैयार हो चुके हैं और ट्रेन की टेस्टिंग के लिए भी पूरी तैयारी है।

आरआरटीएस ट्रेनों के संचालन के लिए दुहाई डिपो में ही प्रशासनिक भवन बनाया गया है। 17 किमी लंबे प्रायोरिटी सेक्शन में साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई आरआरटीएस स्टेशन और दुहाई डिपो हैं। आरआरटीएस ट्रेनों के लिए दुहाई डिपो में 11 स्टेबलिंग लाइन, 2 वर्कशॉप लाइन, 3 इंटरनल-बे लाइन (आईबीएल) और एक हेवी इंटरनल क्लीनिंग (एचईसी) लाइन बनाई जा रही हैं, जिनमें एक वर्कशॉप और एक आईबीएल लाइन का निर्माण अंतिम चरण में हैं, जबकि बाकी लाइनों का निर्माण पूरा हो चुका है।

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स्टेबलिंग लाइनों का प्रयोग ट्रेनों के खड़ा करने के लिए किया जाता है। वर्कशॉप लाइनों पर ट्रेनों के रख रखाव और तकनीकी खराबियों को ठीक किया जाता है। आईबीएल लाइनें ट्रेनों की टेस्टिंग के लिए बनाई जाती हैं और हेवी इंटरनल क्लीनिंग लाइन पर ट्रेनों के भीतर की सफाई की जाती है। आरआरटीएस ट्रेनों को जनता के लिए आॅपरेशनल करने से पहले इसकी कई प्रकार की टेस्टिंग की जाती है।

साथ ही सिग्नलिंग, रोलिंग स्टॉक और सतत विद्युत सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए इसे कई प्रक्रियाओं द्वारा जांचा-परखा जाता है। सभी प्रक्रियाओं की सफल टेस्टिंग के बाद प्री-आॅपरेशनल ट्रायल होता है जिसमें सफल होने के बाद ही ट्रेन को यात्रियों के लिए आॅपरेशनल किया जाता है। दुहाई डिपो में ट्रेनों के लिए रूफ शेड लगाने, अंडरपास और बाउंड्री वॉल के निर्माण समेत अन्य कई कार्य तेजी से चल रहे हैं। इसके साथ ही ट्रेनों के लिए विद्युत आपूर्ति के लिए ओएचई लगाने का काम जल्द शुरू होने वाला है।

डिपो में ओएचई लगाने के लिए पोल और केंटीलिवर लगाए जा चुके हैं। जल्द ही पूरा डिपो ट्रेनों के संचालन के लिए तैयार हो जाएगा। इसके साथ ही दुहाई आरआरटीएस स्टेशन को दुहाई डिपो से जोड़ने वाले वायाडक्ट का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है। इस वायाडक्ट के पूरा होने के साथ ही ट्रेनों के लिए डिपो से बाहर निकलने के लिए लाइन तैयार हो जाएगी। वहीं, प्रायोरिटी सेक्शन पर ट्रैक बिछाने और ओएचई लगाने का कार्य भी प्रगति पर है।

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