Monday, May 11, 2026
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जिला अस्पताल में बदहाल सेवाएं

  • नशामुक्ति केन्द्र बना जी का जंजाल, परिसर में बने छह प्राइवेट वार्डों में सुविधाएं बदहाल
  • शवगृह में नशेड़ी लगातार कर रहे चोरी, अस्पताल प्रशासन लाचार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जनता को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए शहर के बीचो बीच जिला अस्पताल मौजूद है, लेकिन यहां इलाज तो छोड़िए मरीजों को मिलने वाली आम सुविधाओं का भी अभाव है। अस्पताल परिसर में मरीजों के लिए निजी वार्ड है जिसमें मरीज अपनी सुविधा के मुताबिक कमरा लेकर इलाज करा सकता है, लेकिन निजी वार्ड सालों से शोपीस बना हुआ है। वहीं अस्पताल के बैक साइड में बने शवगृह का भी हाल बेहाल है। यहां आए दिन चोरी की घटनाएं हो रहीं है, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसको लेकर खुद को लाचार बताया है।

बदहाल निजी वार्ड

जिला अस्पताल में भर्ती मरीज अगर सरकारी वार्ड में मिलने वाली सुविधाओं से संतुष्ट नहीं है तो वह निजी कमरा ले सकता है। इसके लिए अस्पताल प्रशासन 350 से 400 रूपये प्रतिदिन की दर से किराया लेता है। लेकिन पिछले चालीस साल से एक भी मरीज निजी वार्ड में कमरा लेने नहीं पहुंचा।

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मिली जानकारी के अनुसार निजी वार्ड में बने सभी छह कमरे बदहाल स्थिति में है। यहां न तो पानी की सुविधा है, न जलनिकासी की, यहां तक की मरीजों के लिए एक भी बैड इन कमरों में नजर नहीं आया। वार्ड के कमरों में लगे शीशे चकनाचूर है, बिजली की सुविधा नहीं है तो ऐसे में भला कौन मरीज यहां कमरा लेने आएगा।

शवगृह में लगातार हो रही चोरी की घटनाएं

किसी की मौत होने के बाद उसके शव को सुरक्षित रखने के लिए बने शवगृह के हालात तो और भी नाजुक नजर आए। इसमें रखा एकमात्र फ्रिज जर्जर हालत में है। हालांकि बिजली कनेक्शन होने की वजह से कमरे में रोशनी जरूर थी लेकिन बाकि इसमें सबकुछ टूटा हुआ था। खिड़की के सरिए निकाले गए थे और आसपास गंदगी का अंबार लगा था। यानी मौत के बाद किसी का शव यहां रखा जा सके इसकी कोई उचित व्यवस्था यहां नहीं है।

कुल 250 बेड है अस्पताल में

जिला अस्पताल के सभी वार्डो में कुल बैडों की संख्या 250 है। इनमें से 20 बैड पिडियाट्रिक वार्ड के लिए, आॅक्सीजन की सुविधा वाले बैडों की संख्या भी 20 जबकि अलग-अलग वार्डो में कोविड के लिए कुल 122 बैड सुरक्षित रखे गए है।

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लेकिन बच्चा वार्ड व कोविड वार्ड में बैडों पर दूसरे मरीजों का इलाज होता नजर आया। जो बैड बच्चों के लिए आरक्षित है उनपर वयस्क मरीज इलाज कराते नजर आए। यही हाल कोविड के लिए आरक्षित बैडों का भी है, इनपर भी दूसरे मरीज इलाज करा रहें है।

निजी वार्ड कमरों की कई बार मेंटेनेंस कराई जा चुकी है लेकिन कोई मरीज कमरा लेने नहीं आता। ऐसे में बिना मरीज के कमरों की हालत जर्जर हो गई है। शवगृह में लगातार चोरियां हो रही है, इसके लिए परिसर में ही बना नशामुक्ति केन्द्र जिम्मेदार है। यहां इस समय 60 नशेड़ियों का इलाज चल रहा है जो अपनी नशे की लत पूरी करने के लिए चोरी करते है। इसको लेकर हम क्या कर सकते है, हम खुद लाचार हैं। -डा. कौशलेन्द्र, सुप्रिटेडेंट जिला अस्पताल, मेरठ।

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