- 183 करोड़ का सुपर स्पेशियलिटी का ट्रीटमेंट प्लांट बना सफेद हाथी
- पेड़ों के लगाने से नहीं बल्कि प्रदूषित करने वालों पर कठोर कार्रवाई से होगी निर्मल
जनवाणी ब्यूरो |
मेरठ: दशकों से प्रदूषण से शापित काली नदी को निर्मल बनाने के प्रशासन व सामाजिक संस्थाओं के प्रयासों में मेडिकल प्रशासन पलीता लगाने पर तुला है। मेडिकल से निकलने वाला बॉयो बेस्ट करोड़ों रुपये की लागत से बनवाए गए ट्रीटमेंट प्लांट में साफ किए बगैर ही सीधे काली नदी में बहाया जा रहा है, जिसकी वजह से प्रदूषण का दंश झेल रही काली नदी को निर्मल बनाने की राह में बाधा आ रही है। एलएलआरएम मेडिकल के पिछले हिस्से से सटकर ही काली नदी गुजरती है।
यहां आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि जब से मेडिकल कालेज व अस्पताल जब से बनकर तैयार हुआ है। तभी से इसका बॉयो बेस्ट भारी भरकम सीमेंट के सीवर पाइपों से काली नदी में डाला जा रहा है। वक्त के साथ साथ मेडिकल में जैसे-जैसे मेडिकल का विस्तार होता गया और यहां आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ती गयी, वैसे ही वैसे मेडिकल के काली नदी में गिरने वाले बायो वेस्ट की मात्रा भी बढ़ती गयी।
मेडिकल कैंपस में बड़ी संख्या में स्टॉफ व मेडिकल प्रशासन के अफसरों के अलावा बड़ी संख्या में अवैध रूप से कब्जा कर बनाए गए मकानों में रहने वाले हैं। इनके घरों से निकलने वाला सारा कूड़ा कचरा सीवर के रास्ते काली नदी में ही जाकर गिरता है।

इस बात को खुद यहां रहने वाले स्टॉफ ने भी स्वीकार की कैंपस के रिहायशी पार्ट से बड़ी मात्रा में गंदगी काली नदी में जाकर गिर रही है। मेडिकल में 183 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के साथ ही ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाया गया है।
नाम न छापे जाने की शर्त पर मेडिकल के एक अधिकारी ने बताया कि भारी भरकम रकम से बनाया गया ट्रीटमेंट प्लांट सफेद हाथी बना हुआ है। इसको ऑपरेट करने वाला कोई नहीं।
जनवाणी संवाददाता ने शनिवार सुबह जब यहां के कर्मचारी वीरेन्द्र से इसके बारे में पूछा तो उसने बताया कि नाम मात्र को ही यह चलाया जाता है। करोड़ों खर्च कर बनवाए गए जिस ट्रीटमेंट प्लांट की बात की जा रही है, बताया गया है कि उसको अभी तक ओन रिकार्ड हैंड ओवर तक नहीं किया जा सका है।
बताया जाता है कि तकनीकि खामियों के चलते इसको हैंड ओवर नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा जिस कंपनी ने इसका निर्माण किया है, उसके भी लोग यहां से चले गए हैं। जिसकी वजह से ट्रीटमेंट प्लांट पर अक्सर ताला ही पड़ा रहता है।

ट्रीटमेंट प्लांट फिर भी सीवर लाइन
मेडिकल के बायो वेस्ट से काली नदी को बचाने के लिए ही ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाने का दावा मेडिकल प्रशासन के पूर्व के अधिकारी किया करते थे, लेकिन हैरानी तो इस बात की है कि ट्रीटमेंट प्लांट के बावजूद आज तक भी मेडिकल की बड़ी बड़ी सीवर लाइनें काली नदी को प्रदूषित कर रही हैं। कौन और कब इस पर रोक लगाएगा यह बड़ा सवाल है।
निर्मल काली के प्रयास पर फेर रहे पानी
काली नदी को निर्मल बनाए जाने का बीड़ा मंडलायुक्त ने उठया। शुरूआत मंडलायुक्त ने की तो अनेक सामाजिक संगठन भी इस महाकार्य में हाथ बटाने आ गए। काली के किनारों पर बड़ी संख्या में पेड़ पौधे लगाए जा रहे हैं। प्रयास है कि पेड़ पौधे लगाकर काली नदी की मिट्टी का कटाव रोका जा सके। मिट्टी का कटाव रुकने से नदी में पानी का बहाव बना रहेगा।
ये कहना है प्राचार्य का
मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने बताया कि ट्रीटमेंट प्लांट चल रहा है। शीघ्र ही पूरी क्षमता से चलने लगेगा। काली नदी को निर्मल बनाया जाए मेडिकल प्रशासन का भी प्रयास है।

