Tuesday, October 26, 2021
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Homeसंवादनशे की गिरफ्त में बॉलीवुड

नशे की गिरफ्त में बॉलीवुड

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बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन को पिछले दिनों नशीले पदार्थ के सेवन और उन्हें रखने के गंभीर आरोपों में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने गिरफ्तार किया। इस मामले से पहले भी कई दफा बॉलीवुड के तार नशे के सौदागारों से जुड़े हैं। बॉलीवुड के कई कलाकार ड्रग्स सेवन और उन्हें रखने के आरोपों में केस भुगत रहे हैं। फिल्मी दुनिया बाहर से जितनी चकाचौंध और ग्लैमरस लगती है अंदर से उतनी ही काली और वीरान होती है। नशा और मादक पदार्थों का सेवन हमेशा से बॉलीवुड हॉलीवुड के सितारों पर हावी रहा है। अक्सर हमें कई कहानियां देखने और सुनने को मिलती हैं कि बॉलीवुड या हॉलीवुड के इस कलाकार को ड्रग्स की लत है। पिछले कई वर्षों से मादक पदार्थों की जांच में बार-बार बॉलीवुड हस्तियों का नाम आता रहा है। एक साल पहले सुशांत राजपूत की आत्महत्या मामले की जांच में भी कई खुलासे हुए। बॉलीवुड में नशे का खेल कितना बड़ा है? इसके बारे में बातें तो सब करते हैं, लेकिन खुलकर कोई इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाता। सुशांत मौत मामले की जांच में जिस तरह ड्रग्स एंगल पर बड़े खुलासे हुये थे वो हैरान करने वाले थे। ताजा मामला शाहरूख खान के बेटे का है। लेकिन ये पहली बार नहीं है।

बॉलीवुड में फिल्मी स्टार के ड्रग्स इस्तेमाल करने की बात पहले भी सामने आ चुकी है। और हर बार दो-चार दिन की गहमागामी के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। आर्यन मामले में जो मीडिया रिपोर्ट सामने आई हैं, वो बेहद चौंकाने वाली है।

समंदर में क्रूज पर जो रेव पार्टी हो रही थी, उसमें 21 ग्राम चरस, 13 ग्राम कोकीन, 5 ग्राम एमडी, एमडीएमए की 22 गोलियां आदि मादक पदार्थ बरामद किए गए। आर्यन के पास से 1.33 लाख रुपए नकद पकड़े गए हैं। फिल्म इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक बॉलीवुड के कुछ बड़े एक्टर के घर या फॉर्म हाउस में ड्रग्स की पार्टी आम बात है।

इसमें उन एक्टर के वही को स्टार और दोस्त शामिल होते हैं, जो खुद भी ड्रग्स लेते हैं। बॉलीवुड को ड्रग्स सप्लाई करनेवालों में जो सबसे बड़ा नाम आता है, वो भी कोई बाहरी नहीं है, बल्कि इसी बॉलीवुड के अंदर का है। एक नामचीन एक्टर। जो कई फिल्मों में काम कर चुका है।

बॉलीवुड के ड्रग्स सप्लाई करनेवाले इस एक्टर की वजह से ही एक नामी एक्टर का घर तक टूट गया। इसी वजह से बाद में बॉलीवुड को ड्रग्स सप्लाई करनेवाले इस एक्टर का फिल्म इंडस्ट्री के तमाम बड़े धुरंधरों ने बॉयकॉट कर दिया।

आर्यन सरीखे असंख्य युवा देश के कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, आईआईटी, लॉ स्कूल्स आदि शैक्षिक संस्थानों में चरस, गांजा, भांग, कोकीन आदि मादक पदार्थों का सेवन सामान्य-सा चलन हो गया है। नौजवान खोखले हो रहे हैं।

हमारी युवा पीढियां बर्बाद हो रही हैं। कई नशीले पदार्थ तो बेहद महंगे होते हैं और खुलेआम बाजार में बेचना भी अवैध है, लिहाजा गंभीर सवाल है कि युवाओं तक नशे की सप्लाई कौन कर रहे हैं?

बेशक विशेष पुलिस और एनसीबी तक इन नशेड़ी पीढियों की जानकारियां जरूर होंगी, लेकिन कभी-कभार खबर आती है, तो बॉलीवुड और टीवी सीरियल वालों की ही सुर्खियां बनती हैं मानो वहीं नशे के तमाम स्रोत उपस्थित हैं। यह भी अर्धसत्य है।

संजय दत्त और फरदीन खान से लेकर दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, श्रद्धा कपूर, भारती सिंह पति समेत, अरमान कोहली, अर्जुन रामपाल, रकुल प्रीत सिंह आदि न जाने कितने कलाकारों पर नशे के आरोप लगे। उन्हें तलब करके पूछताछ की गई। आज भी कुछ कलाकार जेल में होंगे।

लेकिन नशेडियों और नशे का धंधा करने वाली जमात यह नहीं है। अलबत्ता उन्हें नशे की तलब होगी, तो कुछ नशा कर लिया होगा! नशे की बंदरगाहें कहीं और हैं, जहां ढेर नशीले पदार्थ होंगे और वहीं से तस्करी, दलाली की जाती रही होगी! एनसीबी को ऐसे चक्रव्यूह तोड़ने चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ तालमेल, गठबंधन किए जा सकते हैं। बॉलीवुड के लिए भी एक निश्चित आचार-संहिता बननी चाहिए कि शूटिंग से पहले जांच की जाए कि किसी नशे का सेवन किया है या नहीं। बॉलीवुड ही नहीं देशभर में ड्रग्स सिंडिकेट का जाल फैला हुआ है।

देश के लगभग हर छोटे-बड़े शहर में कुछ नशा तस्कर बैखौफ होकर नशा बेचते हैं। इन लोगों को किसी न किसी का संरक्षण प्राप्त होता है। जिसके दम पर ये बेधड़क होकर काम करते हैं। ऐसे लोगों की जानकारी पुलिस को भी है, पर फिर भी वे इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करते।

नशे के चंगुल में हर वर्ग के लोग हैं। नशा आसानी से मिल रहा है। इसलिए लोग इसका प्रयाग कर रहे हैं। पहले यह शौक होता है पर बाद में यह आदत बन जाती है। समय की मांग है कि नशे को जड़ से समाप्त किया जाए, ताकि यह अपने जड़ों को और न फैला सके।

सभी स्कूल प्रबंधकों को चाहिए कि वे अपने स्कूल में बच्चों को नशों के बुरे प्रभाव के बारे में रेगुलर जानकारी दें। धार्मिक नेताओं को भी चाहिए कि वे नशों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में अपना योगदान जरूर दें। भारत में नशे के नासूर से जख्मी परिवारों का हिसाब लगाने बैठें, तो यह आंकड़ा हमें रुला देने वाला है।

भारत की 30 फीसदी जनसंख्या नशे के दलदल में फंसी हुई है, वहीं विश्व में यह कुल प्रतिशत 38.3 है। नशे के उमड़ते इस जंजाल को अब अनदेखा नहीं किया जा सकता है, जब यह हमारी नई पीढ़ी को निगल रहा हो। युवा वर्ग को नशे की गिरफ्त से बचाना सरकार का कर्तव्य है।

आर्यन मामले में एजेंसियों को ईमानदारी और निष्पक्ष तरीके से जांच करनी चाहिए और दोषियों को कानून सम्मत सजा मिलनी चाहिए, ताकि समाज के लिए एक उदाहरण बन सके।


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