Monday, January 24, 2022
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutरंग लाई जनवाणी की मुहिम, गांधी आश्रम की तोड़फोड़ प्रशासन ने रोका

रंग लाई जनवाणी की मुहिम, गांधी आश्रम की तोड़फोड़ प्रशासन ने रोका

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गांधी आश्रम की ऐतिहासिक जमीन पर जो तोड़फोड़ चल रही थी, उसे प्रशासन ने शुक्रवार को बंद करा दिया। कुछ लोग इसमें चेष्टा कर रहे हैं कि गांधी आश्रम की प्राचीन बिल्डिंग पर कब्जा किया जाए और फिर इस मामले को लेकर न्यायालय की शरण ली जाए, ताकि गांधी आश्रम की प्राचीन बिल्डिंग पर आसानी से कब्जा किया जा सके।

गढ़ रोड स्थित गांधी आश्रम की भूमि पर कुछ लोग गलत तरीके से लीज तैयार करा कर कब्जा करना चाहते हैं। ‘जनवाणी’ ने इसको प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया है। आयोग के डायरेक्टर राजेश कुमार श्रीवास्तव ने डीएम के. बालाजी और कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह को पत्र लिखकर इसमें हस्तक्षेप करने की मांग की थी, ताकि जो तोड़फोड़ चल रही थी।

उसे रुकवाया जाए। डीएम के. बालाजी ने गुरुवार को आयोग के अधिकारियों को अपने आॅफिस बुलाकर प्राचीन गांधी आश्रम की बिल्डिंग पर कब्जे के सिलसिले में बातचीत की थी। इसके बाद ही डीएम ने कह दिया था कि गांधी आश्रम की प्राचीन बिल्डिंग में जो तोड़फोड़ की जा रही है, वह उनके संज्ञान में है तथा इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्माण कार्य रुकवा जाएगा।

शुक्रवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने गांधी आश्रम परिसर का दौरा भी किया तथा कहा जा रहा है कि प्रशासन ने जो तोड़फोड़ चल रही थी, जिसे रुकवा दिया है। क्योंकि शुक्रवार को जो मजदूर तोड़फोड़ में जुटे थे, वह काम पूरी तरह से बंद पड़ा था। चर्चा यह भी है कि जिस कंपनी ने लीज की डीड नियम विरुद्ध कराई है वह कंपनी ऐसी चेष्टा कर रही है कि गांधी आश्रम की प्राचीन बिल्डिंग पर किसी तरह से अपना कब्जा होना दर्शाया जाए, ताकि इसका लाभ लेने के लिए कोर्ट में तमाम दस्तावेजों को पेश किया जाए।

हालांकि लीज पर भी सवाल उठ रहे हैं। लीज करने वालों पर भी प्रशासन शिकंजा कस सकता है। क्योंकि इस तरह का मामला पहली बार सामने आया हैं। क्योंकि यह सब खेल 400 करोड़ की गांधी आश्रम की सम्पत्ति को हड़पने का खेल चल रहा है। इस खेल में कौन-कौन शामिल हैं?

इसकी जांच पड़ताल होने के बाद ही उनके नाम सामने आ सकते हैं। इस पूरे प्रकरण की जांच कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गई है। ग्रामोद्योग आयोग ने भी इसको लेकर मुंबई हेडक्वाटर को भी लिखा गया है, ताकि इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जा सके। इस मामले में लिप्त लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की गई हैं, ताकि इस तरह की फिर से कोई चेष्टा नहीं करें।

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