Tuesday, March 2, 2021
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कैंटोनमेंट हॉस्पिटल खुद बीमार, मरीजों का नहीं कोई पुरसाहाल

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  • दवाइयों का कोटा हुआ खत्म, नहीं मिलती दवाई, कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा कैंट अस्पताल
  • महिला चिकित्सक भी लापरवाह, बीच सड़क पर देख रही महिला मरीजोंं को

ऋषिपाल सिंह |

मेरठ: केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकार गरीबों को अच्छा और सस्ता इलाज देने के लिये योजनाएं चला रही है। अभी हाल ही में जारी हुए बजट में भी स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किया जा रहा है, लेकिन क्या इन योजनाओं का लाभ लोगों को मिल पाता है यहा नहीं इसका जीता जागता उदाहरण कैंट अस्पताल में देखने को मिला। यहां लोगों के साथ इलाज के नाम पर धोखा किया जा रहा है। यहां ना स्टाफ है न दवाइयां हैं। जो डॉक्टर यहां हैं भी वह भी खानापूर्ति के लिये रह गये हैं।

छावनी परिषद के कैंट अस्पताल में लोगों से इलाज के नाम पर धोखा किया जा रहा है। यहां मरीज इलाज के लिये पहुंचता तो है, लेकिन उसे यहां दवाइयां तक नहीं मिल पाती। इलाज के नाम पर यहां 20 रुपये की पर्ची तो काट दी जाती है, लेकिन मरीज उस पर्ची से दवा नहीं ले सकता। मंगलवार को अस्पताल में कुछ ऐसा ही नजारा रहा। यहां कमरों में बेड तो हैं, लेकिन उन पर मरीज नहीं है। कमरे हैं दरवाजे नहीं हैं। यहां महिला डॉक्टर भी इतनी लापरवाह हैं कि सड़क पर बैठकर ही महिलाओं का इलाज करतीं हैं।

स्टाफ की कमी से जूझ रहा अस्पताल

कैंट अस्पताल में स्टाफ की कमी के कारण यहां इलाज कराने आये लोगों को परेशान होना पड़ता है। अस्पताल में एक फिजीशियन, एक महिला रोग विशेषज्ञ, एक टेक्निशियन, एक लेब असिस्टेंट, एक फार्मासिस्ट है। अगर किसी भी दिन एक की छुट्टी हो तो उसकी जगह दूसरा नहीं होता, जिससे यहां लोगों के उनसे संबंधित कार्य नहीं हो पाते। जैसे मंगलवार को यहां का टेक्निशियन दुष्यंत छुट्टी पर था।

दुष्यंत एक्सरे करता है। मरीज को एक्सरा कराना था, लेकिन यहां लैब पर ताला लगा था। दुष्यंत के न होने के कारण एक्सरा नहीं हो पाया जिससे मरीज को वापस लौटना पड़ा। इसी तरह यहां डॉक्टरों की भी कमी है। यहां कोई हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं था जिसके कारण मरीज को परेशान होना पड़ा।

दवाइयों का कोटा हुए समाप्त

अस्पताल के फार्मासिस्ट प्रदीप ने बताया कि अस्पताल का दवाइयों का कोटा समाप्त हो चुका है जिस कारण यहां रोज आने वाले मरीजों को दवाई नहीं मिल पा रही है। सभी प्रकार की दवाइयां खत्म हो चुकी हैं। उनकी ओर से दवाइयों के लिये ऊपर जानकारी दे दी गई है। मंगलवार को जब पर्ची बनवाने के बाद मरीज दवाई लेने पहुंचे तो उन्हें यहां दवाई नहीं मिल पाई। जिसके चलते मरीजों को वापस लौटना पड़ा।

सड़क पर मरीज देख रहीं महिला चिकित्सक

अस्पताल में दवा, स्टाफ आदि की समस्या तो मुख्यालय स्तर की है, लेकिन यहां तैनात महिला चिकित्सक तो खुलेआम लापरवाही कर रही हैं। यहां तैना महिला चिकित्सक अनुराधा गुप्ता कमरा होने के बावजूद बीच सड़क पर बैठक मरीज को देख रही हैं। जबकि महिला मरीज को देखने के लिये वहां पर विशेष कमरे तक बने हुए हैं, लेकिन चिकित्सक अपनी सीट ने उठना तक मुनासिब नहीं समझती। मंगलवार को भी मरीज बाहर सड़क पर ही दिखाकर वापस लौटते रहे।

कमरे हैं दरवाजे नहीं, बेड हैं मरीज नहीं

अस्पताल की हालत इस कदर खराब है कि इसे देखकर कोई भी कई सकता है कि अस्पताल को खुद इलाज की जरूरत है। यहां आकर मरीज ठीक तो क्या होगा, उल्टा बीमार हो जाएगा। अस्पताल के मुख्य हॉल में बेड तो हैं, लेकिन यहां मरीज ही नहीं है। मरीजों की संख्या न के बराबर है इसका सबसे बड़ा कारण यहां स्टाफ और दवाई आदि की कमी होना है। इसके अलावा छावनी परिषद की ओर से यहां मूलभूत सुविधाओं की भी कोई व्यवस्था नहीं की गर्इं है। यहां स्थित शौचालयों पर न तो दरवाजे हैं और न ही पानी की सही व्यवस्था है।

कोरोना को लेकर सावधानी नहीं

कोरोना को लेकर भी यहां कोई सावधानी नहीं बरती जा रही है। कोरोना ने एक बार फिर से मेरठ समेत पूरे देश में पैर पसारने शुरू कर दिये हैं उसके बावजूद कैंट अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्थाओं को कोई ध्यान नहीं रखा गया है। यहां मुख्य गेट के पास ही स्थित एक कमरे में सैनिटाइजेशन किया जाता था, लेकिन यहां अब ताला पड़ा है। कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे सीधे मरीज अंदर प्रवेश कर जाते हैं।

इस खिड़की को तोड़कर अंदर घुसा था तेंदुआ

कैंट अस्पताल परिसर में ये खिड़की आजतक भी टूटी हुई है। इसकी खिड़की को तोड़कर वर्ष 2014 में तेंदुआ अस्पताल के अंदर कमरे में घुसा था। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बात को सात वर्ष होने को हैं, लेकिन अभी तक इस टूटी खिड़की को सही नहीं कराया गया है। तेंदुए ने इसी खिड़की से अंदर घुसकर यहां उत्पात मचाया था।

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