- इस महीने के अंत में वापसी हो जाएंगे तीनों कृषि कानून
- किसान नेताओं का कहना है चुनाव में हार के डर से हो रहे हैं तीनों काले कृषि कानून वापस
जनवाणी ब्यूरो |
दिल्ली/उत्तर प्रदेश/पंजाब/हरियाणा/राजस्थान: देश के किसानों द्वारा दिल्ली बॉर्डर पर चारों तरफ से 10 महीने तक चलाया गए तीनों काले कृषि कानूनों के खिलाफ चलाए गए आंदोलन की रणनीति आखिरकार रंग ले आई गौरतलब है इन तीनों कानूनों के खिलाफ इस आंदोलन में करीब 700 से अधिक किसानों की मौत हुई थी।
देश के किसानों में इस भाजपा सरकार की जमकर आलोचना हुई थी जबकि कुछ किसान संगठन इस काले कानून का समर्थन भी कर रहे थे मगर आखिरकार 5 विधानसभा चुनाव में मिली हार और आगामी विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में हार के डर की वजह से केंद्र सरकार को यह काले कानून वापसी लेने का फैसला लेना पड़ा जिसका निर्णय इस महीने के अंत में होने वाले संसद सत्र में विधि विधान से ले लिया जाएगा।
केंद्र सरकार की नीति का बड़ा एलान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर दिया है सभी विपक्षी दलों के बड़े नेताओं में इस बड़े फैसले पर खुशी का माहौल है और वह इसे किसानों की जीत बता रहे हैं और किसानों में भी खुशी का माहौल व्याप्त हो गया है प्रधानमंत्री की इस घोषणा के बाद देश के किसान नेताओं ने इसे देश के किसानों की जीत बताया है।

