- सरकार की बदइंतजामी से यात्रियों का मन हो रहा खट्टा
- पर्यटन मंत्री सतपाल महराज फोड़ रहे स्थानियों पर ठीकरा
स्टेट ब्यूरो |
देहरादून: राज्य सरकार की कई योजनाएं ऐसी हैं जो परवान चढ़ जाएं तो यहां की अर्थ-व्यवस्था में चार चांद नहीं, हजार चांद लग जाए। लेकिन, ऐसा हो नहीं रहा है। यह जरूर है कि हर साल यात्रियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। लेकिन, यहां की अव्यवस्थाओं से आने वाले श्रद्धालु खिन्न रहते हैं। इससे राज्य की छवि भी खराब हो रही है। जाहिर है कि इसमें सरकार और अफसरों की नाकामी नजर आती है। इस बार भी पानी की किल्लत है। रास्ते में घंटों तक जाम लग रहा है। खाद्य सामग्री भी आसानी से नहीं मिल पा रही है। आने वाले भक्त दांतों तले उंगली दबा ले रहे हैं।
उत्तराखंड अपनी खूबसूरती के लिए और आस्था तथा विश्वास के लिए पूरी दुनिया में अलग पहचान रखता है। इसीलिए यहां पर्यटन और तीर्थाटन की अपार संभावनाएं हैं। फिलवक्त, पिछली दस मई को चार धाम यात्रा का श्रीगणेश हो चुका है। भक्तों के लिए भगवान के द्वार खुल चुके हैं लेकिन, अर्थ-व्यवस्था की मजबूती और रोजगार के रास्ते में कई रुकावटें हैं। बता दें कि चारधाम यात्रा से उत्तराखंड के हजारों-लाखों की आजीविका जुड़ी हुई है।
चमोली और रुद्रप्रयाग जनपद ही नहीं, देश के कई राज्यों से लोग यहां रोजगार के लिए पहुंचते हैं। होटल, लाज, ढाबा, डंडी-कंडी, घोड़ा-खच्चर, पूजा की सामग्री, कंठी-माला समेत तमाम तरह के छोटे-छोटे व्यवसाय के जरिये लोग अच्छी कमाई करते हैं। लेकिन, यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सड़क, आवास, पानी, संचार जैसी कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। रास्ते में कई जगहों पर श्रद्धुलओं का रोका जाना भी बेजा लगता है।
हालांकि, इस साल रिकार्ड भीड़ जुट रही है। लेकिन सुविधाएं वैसी नहीं हैं। मसलन, परिवहन नेटवर्क कतई मजबूत नहीं है। निजी वाहनों पर रोक न लगने से इनकी संख्या लाखों में हो जाती है और जाम लग जाता है। साथ ही पर्यावरण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। सोन प्रयाग से केदारनाथ तक रोपवे का निर्माण पूरा हो जाए तो सहूलियत होगी और अर्थ व्यवस्था भी मजबूत हो सकेगी। रोपवे का शिलान्यास हो चुका है पर काम कछुआ गति से हो रहा है। रामबाड़ा से केदारनाथ तक के पुराने पैदल मार्ग को सरकार दुरुस्त नहीं करा सकी है। यमुनोत्री पैदल मार्ग का चौड़ीकरण भी नहीं हो सका है।
सरकार चाहे तो यात्रियों के लिए रियायती तौर पर होटलों आदि में पैकेज देकर आकर्षित कर सकती है। लेकिन, ऐसा नहीं हो रहा। हेमकुंड साहिब में भी रोपवे निर्माण जल्द होना चाहिए। एक जानकारी के मुताबिक कोरोना काल के बाद 22 में चारधाम यात्रा से 211करोड़ का कारोबार हुआ था। सन 23 में भी इसमें इजाफा हुआ। यात्रियों की संख्या को देखकर लगता है कि कारोबार तो होगा लेकिन, अगर यात्रियों को और सहूलियतें दी जाएं तो कारोबार और भी बढ़ सकता है।
हाल ये है कि 25से तीस घंटे तक जाम लग रहा है। रास्तों में तमाम जगहों पर न खाना है न पानी। शौचालय की बात तो बेमानी लगती है। इस बाबत सूबे के तीर्थाटन और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने इस अव्यवस्था के लिए लोकल लोगों पर दोषारोपण करते हुए सरकार का बचाव किया है। उन्होंने मीडिया से कहा कि बदइंतजामी के लिए स्थानीय लोग दोषी हैं। सवाल है कि फिर सरकार क्या कर रही है?

