जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चिशोती गांव से एक गंभीर प्राकृतिक आपदा की खबर सामने आई है। मंगलवार देर रात पदर उपखंड के चिशोती इलाके में बादल फटने की घटना हुई, जिसके बाद पूरे गांव में अचानक बाढ़ आ गई। यह क्षेत्र मचैल माता यात्रा मार्ग पर स्थित है और यात्रा की तैयारियों के बीच यह हादसा हुआ। वहीं, बताया जा रहा है कि, इस आपदा में 10 से 12 लोगों के मारे जाने की आंशका जताई है।
क्या हुआ?
प्रशासन के अनुसार, बादल फटने के कारण भारी मात्रा में पानी और मलबा गांव की ओर बह आया, जिससे कई घरों को नुकसान पहुंचा है। दो पुल — एक लकड़ी का और दूसरा पीएमजीएसवाई का — क्षतिग्रस्त हो गए हैं। फिलहाल जान-माल की क्षति की आशंका जताई जा रही है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
#WATCH | J&K | A flash flood has occurred at the Chashoti area in Kishtwar, which is the starting point of the Machail Mata Yatra. Rescue Operations have been started. pic.twitter.com/dQbUBx46A9
— ANI (@ANI) August 14, 2025
बचाव कार्य तेज़, प्रशासन अलर्ट पर
जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं। किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और बचाव अभियान पूरी ताकत से चलाया जा रहा है।
राजनीतिक और प्रशासनिक निगरानी
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नेता प्रतिपक्ष सुनील कुमार शर्मा से तुरंत मिली, जिसके बाद उन्होंने उपायुक्त से बात कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि प्रशासन को बचाव और चिकित्सा प्रबंधन के लिए पूरी तरह अलर्ट कर दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष सुनील कुमार शर्मा और स्थानीय विधायक ने भी घटनास्थल का दौरा किया और राहत कार्यों की निगरानी की।
उपराज्यपाल ने जताया दुख
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल कार्यालय ने घटना पर दुख जताते हुए ट्वीट किया “चिशोती, किश्तवाड़ में बादल फटने की घटना से व्यथित हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। प्रशासन, पुलिस, सेना और बचाव दलों को पूरी सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं।”
स्थिति अब कैसी है?
संचार और परिवहन बाधित
इलाके में सतर्कता बढ़ाई गई
मचैल यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के लिहाज़ से समीक्षा जारी
नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है
स्थानीय लोगों में भय और चिंता
स्थानीय निवासियों ने बताया कि बाढ़ इतनी तेज थी कि लोगों को भागने तक का समय नहीं मिला। कई परिवारों को रातोंरात सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से तेज़ राहत और पुनर्वास कार्यों की मांग की है

