Monday, September 20, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutईमानदार मुख्यमंत्री, भ्रष्टाचारी प्रदूषण अधिकारी

ईमानदार मुख्यमंत्री, भ्रष्टाचारी प्रदूषण अधिकारी

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  • आखिर प्रोन्नत अधिकारी को क्यों बनाया गया मेरठ का प्रदूषण अधिकारी
  • सीनियर अधिकारी को दिया जाता रहा मेरठ में प्रदूषण अधिकारी का चार्ज

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: प्रदूषण विभाग द्वारा प्रदूषण की रोकथाम के लिए तमाम तरह के दावे किए जाते हैं, लेकिन मेरठ शहर में यह दावे पूरी तरह से हवा हवाई साबित हो रहे हैं। क्योंकि प्रदूषण की रोकथाम कागजों में तो की जा रही है, लेकिन धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

उत्तर प्रदेश के ईमानदार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार बढ़ते प्रदूषण को लेकर बेहद गंभीर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनके आदेशों को मेरठ में प्रदूषण अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। आखिर इसका क्या कारण है कि प्रदूषण अधिकारियों पर इतनी मेहरबानी शासन द्वारा क्यों की जा रही है।

अगर हम आंकड़ों पर नजर डाले तो शहर में 525 ईंट भट्ठें हैं। जबकि बागपत में 212 ईंट-भट्ठे हैं। ईंट-भट्ठों पर बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए जिगजैग प्रणाली लागू की गई थी, लेकिन यह सिर्फ कागजों में लागू होकर रह गई है। अगर धरातल पर देखे तो लगभग 60 प्रतिशत भट्टे ऐसे हैं। जहां प्रदूषण की रोकथाम के लिए कोई भी इंतजाम नहीं है और इन ईंट-भट्ठों के कारण प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।

मेरठ में 11 हॉट मिक्स प्लांट है। इन प्लांट से सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलने की संभावना रहती है, लेकिन इनके खिलाफ कार्रवाई कागजों में तो की गई है। धरातल पर आज तक नहीं हुई है। प्रदूषण को रोकने के लिए ग्रेप सिस्टम प्लान लागू किया गया था, लेकिन आज तक इस सिस्टम को विभागीय अधिकारियों द्वारा लागू नहीं किया गया, जोकि चिंता का विषय है।

मेरठ और बागपत के प्रदूषण पर निगाह डाली जाए तो यहां प्रदूषण लगातार बढ़ोतरी में ही है। बढ़ता प्रदूषण प्रदूषण अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के साथ-साथ भ्रष्टाचार होना भी प्रतीत होता है।

कम अनुभवी को कैसे दे दिया मेरठ के प्रदूषण अधिकारी का चार्ज

अगर क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय मोदीपुरम की बात की जाए तो यहां प्रदूषण अधिकारी डा. योगेंद्र कुमार हैं। जोकि 2016 से इस कार्यालय में ही तैनात है। पहले योगेंद्र कुमार सहायक वैज्ञानिक अधिकारी के पद पर तैनात थे, लेकिन पिछले एक वर्ष से क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी के पद पर तैनात हैं।

प्रोन्नत होने के बाद योगेंद्र कुमार को यहां का चार्ज दे दिया गया। हालांकि अभी तक देखने में आया है कि यहां का चार्ज अनुभवी और व्यवहार कुशल अधिकारी को दिया जाता रहा है, लेकिन पहली बार देखने में आया है कि कम अनुभवी व्यक्ति को इस पद का चार्ज दे दिया गया है।

प्रदूषण अधिकारियों की उदासीनता का शिकार हुई आधुनिक लाइव

गंगा के प्रदूषण जांचने के लिए छह माह पूर्व क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय पर आधुनिक लैब बनाई गई थी, लेकिन अभी तक इस लैब पर कोई भी जांच नहीं हो रही है। जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि लाखों रुपये की कीमत से तैयार हुई है। विभागीय अधिकारी की अनदेखी का शिकार हो रही है। इससे प्रदूषण अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठता है।

कागजों में सील मौके पर खुले प्लांट

क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय पर दो एई एक जेई, एक जूनियर रिसर्च फेलोशिप अधिकारी दो लिपिक एवं अन्य स्टॉफ मौजूद है। उसके बाद भी प्रदूषण को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। शहर की आबोहवा खराब हो रही है। औद्योगिक फैक्ट्री एवं हॉट मिक्स प्लांट और ईंट-भट्ठों पर सील तो लगा दी जाती है, लेकिन कुछ दिन बाद ही यहां की सील कुछ दिन बाद खुल जाती है। जिसके चलते प्रदूषण अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने की संभावना जगजाहिर हो जाती है।

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