Tuesday, April 28, 2026
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एफआईआर के बावजूद बाहर नहीं हुई डेयरियां

  • नालों में खुलेआम डाला जा रहा गोबर, शास्त्रीनगर में 23, कंकरखेड़ा में 50 से अधिक डेयरियां

हाईकोर्ट के आदेश हुए थे कि मेरठ शहर में सड़कों पर लगाई जा रही पैंठ पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए। सड़कों से पैंठ नहीं हटी। रोहटा रोड पर सरेआम पैंठ लग रही हैं। यहां से निकलना भी दूभर हो जाता हैं। सड़क आवागमन के लिए बनाई गयी हैं, लेकिन यहां पर कारोबार संचालित किये जा रहे हैं। इसी तरह से पशुओं की डेयरी शहर से बाहर शिफ्ट करने के आदेश हुए थे, लेकिन आदेश का कहीं कोई पालन नहीं हुआ। शहर में पशुओं की डेयरी भी चल रही हैं। तमाम नाले गोबर से अटे पड़े हैं, बारिश में शहर में जलभराव भी इसी वजह से होता हैं। आखिर डेयरियों को शहर से बाहर कब शिफ्ट किया जाएगा। एफआईआर तक कराई गयी, लेकिन क्या हुआ? एक भी पशु डेयरी शहर से नहीं हट पाई।

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर में हजारों की संख्या में छोटी बड़ी अवैध डेयरियां संचालित हैं। इन डेयरियों को शहर से बाहर करने के निर्देश हैं, लेकिन अभी तक डेयरियां शहर से बाहर नहीं हो पाई हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि इन डेयरियों से निकलने वाला गोबर नाले नालियों में बुरी तरह से जम चुका है। नगर निगम की ओर से ऐसी ही अवैध डेयरियों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज कराई गर्इं थी, लेकिन बावजूद इसके कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है। यह डेयरियां अभी भी खुलेआम चल रही हैं और इनका गोबर नालों में खुलेआम बहाया जा रहा है।

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शहर में कोई भी ऐसी जगह नहीं बची है। जहां अवैध रूप से डेयरियों का संचालन न हो रहा हो। इन डेयरियों में कई पशु बांधे जाते हैं और उनका गोबर खुलेआम नालियों और नालों में बहाया जाता है, लेकिन नगर निगम की ओर से कुछ नहीं किया जाता। शहर के पॉश एरिया शास्त्रीनगर में ही आरटीओ पुल के पास नाले के किनारे पूरी जमीन पर अवैध डेयरियों को चलाने वालों का कब्जा है। यहां डेयरी संचालकों ने पशु पाल रखे हैं और यहीं पर सरकारी जमीन को कब्जाकर डेयरियों को चलाया जा रहा है। पिछले कई सालों से शासन की ओर से शहर में चलने वाली डेयरियों को शहर से बाहर ले जाने के आदेश होते रहे हैं, लेकिन यहां मेरठ में इसका कोई असर होता नहीं दिखाई दिया।

एफआईआर से आगे नहीं बढ़ी कार्रवाई

शहर के नालों के चौक होने और उनमें कूड़ा अटने का सबसे बड़ा कारण यह डेयरियों ही हैं। शहर के ओडियन नाले की बात करें या आबूनाले की इन सभी नालों में धड़ल्ले से गोबर बहाया जाता है। अगर यह गोबर नालों में न जाये तो नाले काफी हद तक अटने बंद हो जायेंगे। इनकी सफाई के लिये निगम के अधिकारियों को परेशान नहीं होना पड़ेगा।

इन डेयरियों को बंद करने के लिये अभी नगर निगम की ओर से बीते माह अभियान चलाया गया था। जिसमें शहर में डेयरी संचालकों के खिलाफ मुकदमे कायम कराये गये थे, लेकिन मुकदमों से आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब भी सभी क्षेत्रों में धड़ल्ले से डेयरियों का संचालन हो रहा है और कोई कुछ कहने को तैयार नहीं है।

निगम की ओर से पिछले माह कंकरखेड़ा में 55, शास्त्रीनगर में 23, ब्रह्मपुरी में 27, माधवपुरम में 22 से अधिक डेयरियों को चिह्नित किया गया था और संबंधित थानों में इनके खिलाफ मुकदमे कार्य कराये गये थे, लेकिन मुकदमों के बावजूद यहां डेयरियां खुलेआम चल रही हैं। पूरे शहर की बात करें तो सैकड़ों की संख्या में डेयरियां चल रही हैं और मुकदमें तक हो चुके हैं, लेकिन इनका संचालन फिर भी किया जा रहा है।

सरकारी जमीन पर कब्जा कर चल रही डेयरियां

शास्त्रीनगर स्थित आरटीओ पुल के पास सेक्टर-12 में नाले के किनारे ही लोगों ने सरकारी जमीन पर छप्पर डालकर अवैध डेयरियां चला रखी हैं। बल्कि यहां पर डेयरियों से निकलने वाला गोबर खुलेआम इसी नाले में फेंका जाता है बावजूद इसके इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। जबकि इन डेयरियों के संचालकों के खिलाफ भी मुकदमा कायम हो चुका है। फिर भी इन्हें यहां से नहीं हटाया जा रहा है।

शहर में अधिकांश जगहों पर खुलेआम डेयरियों से निकलने वाला गोबर नालों में बहाया जा रहा है, लेकिन इनका संचालन फिर भी बंद नहीं हो पाया है। अब शायद नगर निगम को नये नगरायुक्त के आने के का इंतजार से इसके बाद भी ही कुछ कार्रवाई शायद आगे बढ़ पाये।

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