Monday, January 24, 2022
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दिल्ली-एनसीआर की हवा अब भी गंभीर श्रेणी में

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जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: दिवाली के बाद से दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा बेहद खराब हो गई है। लोगों को सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही है। आंखों की खुजली की परेशानी भी बढ़ गई है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा इसकी चपेट में है। सफर के अनुसार, दिल्ली की समग्र वायु गुणवत्ता 436 एक्यूआई के साथ ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी हुई है।

जिसमें पीएम10 का स्तर 412 और पीएम2.5 286 है।दिल्ली-एनसीआर के करीब 55 हजार वर्ग किमी पर ‘उजला अंधेरा’ सफेद धुंआ छाया है। नोएडा की हवा भी 450 एक्यूआई के साथ गभीर श्रेणी में बनी हुई है। उत्तर प्रदेश के मेरठ से लेकर हरियाणा के जींद तक की हवा ‘गंभीर’ स्तर तक प्रदूषित हो गई।

शनिवार को गाजियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। वहीं, नोएडा व गुरुग्राम दूसरे व तीसरे सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर बने रहे। प्रदूषण पर नजर रखने वाली एजेसियों ने बताया था कि रविवार को भी राहत नहीं मिलेगी।

हालात आपातकाल के नजदीक

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को गाजियाबाद का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 466 दर्ज किया गया। इस बीच शहर के कई इलाकों का प्रदूषण स्तर 500-600 से बीच रहा। दूसरी तरह 461 के सूचकांक के साथ नोएडा दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बना।

वहीं, गुरूग्राम का वायु गुणवत्ता 456 रिकॉर्ड किया गया। सीपीसीबी विशेषज्ञों का कहना है कि हालात आपातकाल के नजदीक जा रहे हैं। सोमवार तक इसमें बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं दिख रही है। हवा की चाल तेज होने से प्रदूषण स्तर में कमी आ सकती है। बाजवूद इसके प्रदूषण का स्तर बेहतर खराब बना रहेगा।

दिल्ली की हवा सिगरेट के धुएं से ज्यादा हानिकारक

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि दिल्ली की हवा सिगरेट के धुएं से ज्यादा हानिकारक हो गई है। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि प्रदूषण से कोरोना के मामले में भी बढ़ोतरी हो सकती है। प्रदूषण के चलते लोगों का जीवनकाल भी काफी कम हो गया है।

एम्स निदेशक ने कहा कि प्रदूषित क्षेत्रों में कोविड की गंभीरता काफी बढ़ जाती है। मरीजों के फेफड़ों में अधिक सूजन हो जाती है। जिससे कोरोना के मामले में बढ़ोतरी हो सकती है।

पराली की बढ़ी हिस्सेदारी, हवा की चाल ने संभाला प्रदूषण का स्तर

सफर के मुताबिक, शनिवार को बीते 24 घंटे में पड़ोसी राज्यों में पराली जलने की पांच हजार से अधिक घटनाएं दर्ज हुई हैं। इस सीजन की यह सबसे अधिक पराली जलाने की घटना है। दिल्ली-एनसीआर में चलने वाली हवाओं का रूख भी उत्तर पश्चिम बना हुआ है।

इससे दिल्ली के प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सा 41 फीसदी हो गया। शुक्रवार को यह आंकड़ा 36 फीसदी था। राहत की बात यह है कि हवा की रफ्तार तेज होने के कारण प्रदूषण फैल गया है। इससे शनिवार को दिल्ली समेत अन्य शहरों के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक में मामूली कमी दर्ज हुई है।

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