Monday, January 24, 2022
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खतरा: डेंगू स्ट्रेन-2 हो रहा जानलेवा

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  • चपेट में आने से बुखार, उल्टी, जोड़ों में दर्द, अल्टर्ड सेंसेंरियम जैसी होती हैं गंभीर समस्याएं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: डेंगू स्ट्रेन-2 सबसे ज्यादा खतरनाक हो रहा है। डेंगू का स्ट्रेन-2 जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए डेंगू से सावधानी बरतना बेदह आवश्यक है। डेंगू वायरस के स्ट्रेन-2 को सबसे गंभीर बताया जा रहा है। इसकी चपेट में आने वाले मरीज को शॉक भी आ सकता है। डेंगू का नया स्ट्रेन बहुत ही विषैला है। इससे लोगों की जान भी जा सकती है। इसमें बुखार, उल्टी, जोड़ों में दर्द, अल्टर्ड सेंसेंरियम जैसी समस्याएं होती हैं।

यह बुखार मरीज मे कई तरह की दूसरी जटिलताएंंं भी पैदा कर सकता है। जिसके चलते डेंगू रक्तस्त्रावी बुखार और डेंगू शॉक सिंड्रोम हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति पहले इसके सीरो टाइप से संक्रमित हुआ था तो दूसरे प्रकार के सीरो संक्रमण से डेंगू रक्तस्त्रावी बुखार होने का खतरा बढ़ जाता है।

चिकित्सकों का कहना है कि इसमे पैरासिटामोल दवा ले सकते हैं। साथ ही हाइड्रेट रहने की सलाह भी दी जाती है। डेंगू से बचने के लिए खुद को मच्छर के डंक से बचाना जरूरी है। अपने घर के आसपास कही भी पानी जमा न होने दें। क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने का सबसे अच्छा जरिया है। शाम को दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें। खूब पानी पिएं और स्वस्थ रहें।

डेंगू का संक्रमण खतरनाक 34 नए मरीज मिले

जिले में डेंगू का संक्रमण तेज रफ्तार के साथ बढ़ रहा है। शहर और गांव-देहात में रोजाना डेंगू के नए मरीज मिल रहे हैं। सरकारी एवं निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीज बड़ी संख्या में भर्ती हैं। डेंगू का संक्रमण बेकाबू होता जा रहा है। सोमवार को जिले में डेंगू के 34 नए मरीज मिले। वहीं, डेंगू के सक्रिय मरीजों की संख्या 276 रही।

विभिन्न अस्पतालों में भर्ती मरीजों की कुल संख्या 96 है। उधर, घर पर इलाज ले रहे मरीजों की संख्या 180 है। जबकि जिले में अब तक 839 मरीज रिकवर हो चुके हैं। डेंगू मरीजों का आंकड़ा 1111 पार पहुंच गया है। डेंगू से बचाव के लिए सतर्कता बरतना बेहद आवश्यक है। मेरठ में डेंगू का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

अब तक जिले मं डेंगू से कई लोगों की मौत हो चुकी है। डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ता ही जा रहा है। डेंगू बुखार ने पूरे जिले में अपने पैर पसार लिए हैं। लोगों में डेंगू फीवर को लेकर काफी दहशत है। पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस वर्ष डेंगू के सर्वाधिक केस बढ़े हैं। जिससे डेंगू ने पिछले वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

अब जिले में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाले मरीजों के बीच का अंतर खत्म हो गया है। पहले शहरी क्षेत्र में दोगुना मरीज मिल रहे हैं। इस कारण ओपीडी में मरीजों की संख्या कई गुना तक बढ़ गई है। इसके साथ ही इमरजेंसी में भी लगभग 40 से 50 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं, लेकिन बेड की कमी के चलते मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। वहीं, लोग डेंगू बुखार को हल्के में ले रहे हैं।

इस कारण डेंगू बुखार ने लोगों को बड़ी तेजी से अपना शिकार बना रहा है। डेंगू ने अब तक कई लोगों की जिंदगी छीन ली है। जिले में जिस रफ्तार से डेंगू के मरीज मिल रहे हैं, वह बेहद खतरनाक है। जहां डेंगू के अधिक या संदिग्ध मरीज मिल रहे हैं, वहां जिला मलेरिया की टीम ने लार्वा रोधी गतिविधियां शुरू कर दी हैं।

जिन स्थानों पर लार्वा मिला है, उन्हें नोटिस दिया गया है। इसके साथ ही क्षेत्र में संदिग्ध मरीजोंं के घरों पर जाकर फॉगिंग की जा रही है। जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड की इंचार्ज ने कहा कि डेंगू के लक्षण उभरने पर तत्काल जांच कराएं।

डेंगू से महिला की मौत

सरधना: ग्रामीण क्षेत्र में डेंगू तेजी से पैर पसार रहा है। सोमवार को दबथुवा गांव में डेंगू की चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गई। महिला की मौत से उसके परिजनों में कोहराम मच गया। शाम को गमगीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसके अलावा आसपास के गांवों में भी डेंगू के मरीज सामने आ रहे हैं।

जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। सरधना तहसील के दबथुवा गांव निवासी कमलेश पत्नी राकेश को कुछ दिन पहले बुखार आया था। पहले तो परिजनों ने उसे स्थानीय चिकित्सक से दवाई दिलाई। मगर तबीयत में सुधार नहीं होने पर अस्पताल में भर्ती कराया। जांच कराई तो पता चला कि कमलेश को डेंगू है।

वर्तमान में कंकरखेड़ा स्थित लक्ष्य अस्पताल में उसका उपचार चल रहा था। सोमवार दोपहर उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। महिला की मौत से उसके परिजनों में कोहराम मच गया। शाम को गमगीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र में डेंगू के केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। इस संबध में सरूरपुर सीएचसी प्रभारी डा. ओपी जायसवाल का कहना है कि मामला जानकारी में आया है। टीम भेजकर जांच कराई जाएगी।

सरूरपुर: देहात क्षेत्र में डेंगू का बढ़ता डंक

देहात क्षेत्र में डेंगू का प्रकोप लापरवाही से लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केंद्रों पर डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। खुद प्रभारी चिकित्सा अधिकारी व खंड विकास अधिकारी भी डेंगू की चपेट में आ गए हैं। सोमवार को अकेले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरूरपुर पर लगभग 20 मरीज डेंगू की जांच के लिए आए। जिनमें से पांच में डेंगू की पुष्टि हुई। जबकि यहां अभी तक यह संख्या बढ़कर 150 के करीब हो गई है।

इसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रोहटा पर भी लगभग 17 डेंगू के सैंपल की गई। सोमवार को जिनमें से तीन लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई। यहां भी संख्या बढ़कर 170 के करीब पहुंच चुकी है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सरूरपुर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. ओपी जायसवाल व सरूरपुर के ही खंड विकास अधिकारी दीपक तेवतिया डेंगू की चपेट में आ गए हैं।

जिसे लेकर फिलहाल दोनों अधिकारी छुट्टी पर है। क्षेत्र के लोगों ने एंटी लार्वा के छिड़काव की मांग करते हुए डेंगू की रोकथाम के लिए प्रशासन से ठोस कदम उठाए जाने की मांग की गई है। इसे लेकर सोमवार को रोहटा के समाजसेवी दुष्यंत ने जिलाधिकारी से भी मुलाकात की तथा डेंगू के बढ़ते प्रकोप आयुष्मान कार्ड धारकों की परेशानी को लेकर समस्या से अवगत कराया।

दौराला में मिले डेंगू के 12 मरीज, मचा हड़कंप

देहात में भी डेंगू ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए है। लगातार डेंगू से पीड़ितों के मामले सामने आ रहे है। स्वास्थ्य विभाग कैंप कर जांच कर रहा है। सोमवार को 11 लोग डेंगू से पीड़ित मिले। सीएचसी प्रभारी डा. विपुल शर्मा ने बताया कि जवान राजदीप की मौत के बाद चिंदौड़ी गांव में कैंप आयोजित किया गया। इस दौरान कैंप में 80 लोगों की जांच की गई। जांच में 12 संदिग्ध लक्षण वाले लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए।

इसके अलावा चिरौड़ी निवासी मनोहर शर्मा, भाई मनोज शर्मा को डेंगू के लक्षण मिलने पर प्यारेलाल में भर्ती कराया गया। जबकि, जमालपुर निवासी प्रदीप, पनवाड़ी निवासी उमा, दौराला निवासी राहुल, दौराला निवासी रामनिवास, दौराला निवासी प्रदीप, दौराला निवासी अर्चना, मंजू, भराला निवासी देवेंद्र, भरौटा निवासी कामिनी को सीएचसी दौराला में डेंगू से पीड़ित होने पर सीएचसी में भर्ती कराया गया है।

इसके अलावा लावड़ निवासी सर्वेश में भी डेंगू के लक्षण पाए गए। परिजनों ने उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया। चिंदौड़ी के अलावा मछरी गांव में भी कैंप आयोजित किया गया। कैंप में ग्रामीणों को जागरूक किया गया और फॉगिंग कराई गई।

मेरठ जिला अस्पताल: तीमारदार ही चलाते हैं स्ट्रेचर, नहीं मिलते वार्ड ब्वॉय

जिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही आए दिन देखने को मिल जाती है। जिला अस्पताल में वैसे कहने को तो वार्ड ब्वॉय हैं, लेकिन इसका फायदा मरीजों एवं उनके परिजनों को नहीं मिल रहा है। जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों को वार्ड में भर्ती कराने के लिए परिजनों को वार्ड ब्वॉय नहीं मिलते हैं। परिजन खुद ही अपने मरीज को स्ट्रेचर पर लेकर भर्ती कराने जाते हैं। जबकि जिला अस्पताल में वार्ड ब्वॉय मौजूद रहते हैं।

इसके बावजूद जिला अस्पताल के गेट पर जैसे ही गाड़ी से कोई गंभीर मरीज नीचे उतरता है तो परिजनों को स्ट्रेचर और वार्ड ब्वॉय को खोजना पड़ता है। स्ट्रेचर तो मिल जाता है, लेकिन वार्ड ब्वॉय नहीं मिलते हैं। ऐसी स्थिति में परिजन खुद ही अपने मरीज को स्ट्रÑेचर पर किसी प्रकार लिटाते हैं और वार्ड में ले जाकर भर्ती कराते हैं।

तीमारदार शबाना ने बताया कि एम्बुलेंस ड्राइवर से वार्ड ब्वॉय बुलाने को कहा, लेकिन उन्होंने बोल दिया कि मरीज को खुद ही ले जाओ, कोई नहीं आएगा। जिससे तीमारदारों को स्वयं इमरजेंसी में ले जाना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी के बाहर वार्ड ब्वॉय के ने होने के चलते मरीजों के परिजन द्वारा स्वयं मरीज को एम्बुलेंस से उतारना एवं स्ट्रेचर खींचते हुए मरीज को इमरजेंसी तक ले जाना अब आम बात हो गई है।

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