Saturday, October 23, 2021
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बिगड़ता पर्यावरण प्रकृति के लिए घातक: डॉ निशंक

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जनवाणी ब्यूरो |

देहरादून/डोईवाला: केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि बिगड़ता पर्यावरण प्रकृति के लिए घातक है। हिमालय के संरक्षण के लिए शोध व पुख्ता कार्य योजना बनाने की जरूरत है। उन्होंने हिमालय को शिव का नीलकंठ बताते हुए कहा कि आज हम अपने उपयोग व स्वार्थो के लिए उसे निरंतर प्रदूषित कर रहे हैं। जो प्रकृति के लिए घातक है।

प्रकृति को विनाश से बचाने के लिए पर्यावरण संरक्षण की जरूरत है। हिमालयीय विश्वविद्यालय फतेहपुर टांडा जीवनवाला (डोईवाला) परिसर में हिमालयी पर्यावरण, जैव विविधता व उसके सतत विकास कार्यों के शोध विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों ने हिमालय के संरक्षण के लिए किए जाने वाले शोध कार्यों पर चर्चा की।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने हिमालय के संरक्षण और शोध कार्यों के लिए एक ठोस कार्य योजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिमालय प्रदूषित विष का पान करते हुए भी हमें स्वच्छ प्राणवायु प्रदान कर रहा है। जिसके बिना जीवन संभव नहीं इसलिए हमें प्रकृति संरक्षण के लिए अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभानी होगी। इसमें सभी की भूमिका अहम है।

कार्यक्रम संयोजक हिमालयी पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संगठन (हेस्को)के संस्थापक डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि हिमालय को बचाने के लिए वैज्ञानिक सोच की जरूरत है। उन्होंने उपस्थित वैज्ञानिकों से कहा कि वह हिमालय को बचाने के लिए अपने शोध की रूपरेखा 15 दिन में तैयार कर करे। इसमें हेस्को और व विश्वविद्यालय भी सहयोग करेगा।

हिमालयीय विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति डॉ. राजेश नैथानी ने कहा कि हिमालय के पर्यावरण, जैव विविधता व सतत विकास पर शोध कार्य के लिए विश्वविद्यालय ने एक हिमालय अध्ययन एवं शोध केंद्र स्थापित भी किया है। साथ ही इस दिशा में शोध भी किया जा रहा है।

कार्यशाला में डॉ. बीपी नौटियाल, टीसी पोखरियाल, बीपी उनियाल, डॉ. आरके भट्ट ने भी व्याख्यान दिए। कार्यशाला को संचालन ममता कुंवर ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रदीप भारद्वाज, कुलपति डॉ. राकेश शाह, कुलसचिव डॉ. निशांत राय जैन, कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल झा, अनुज गर्ग, सीमा शर्मा भी उपस्थित रहे।

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