Saturday, February 7, 2026
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अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना का पर्व धनतेरस

Sanskar 3


दीपावली की रात भगवान श्री गणेश व देवी लक्ष्मी के लिए भोग चढ़ाया जाता है। कहा जाता है कि समुद्र मन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि और मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था, यही कारण है कि धनतेरस को भगवान धन्वन्तरि और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

दीपावली हिंदुओं का सबसे बड़ा धार्मिक पर्व है। दिवाली एक नहीं अनेक त्यौहारों का समूह है जिनका शुभारंभ धनतेरस से होता है और समापन भैया दूज से होता है। ईश्वर वंदना असीम आनंद की अनुभूति देती है उसी प्रकार ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के निमित किए जाने वालें धार्मिक अनुष्ठान और उत्सव भी उसी आनंद का अनुभव करवाते है। त्यौहार मानना अपने आप में ईश्वर की वंदना ही है।

भगवान धन्वंतरि जी और धनतेरस
दीपावली से दो दिन पूर्व धनतेरस का पर्व मनाया जाता है, जिसमें देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश के साथ देवताओं के चिकित्सक भगवान धन्वंतरि जी की पूजा अर्चना की जाती है और अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस या धन्वन्तरि जयंत के रूप में 2016 से मनाया जा रहा है।

धनतेरस पर बर्तन और चांदी खरीदने का चलन
धन्वन्तरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वन्तरि चूँकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। कहीं कहीं लोकमान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है। धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की भी प्रथा है; जिसके संभव न हो पाने पर लोग चाँदी के बने बर्तन खरीदते हैं। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में सन्तोष रूपी धन का वास होता है। सन्तोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है। जिसके पास सन्तोष है वह स्वस्थ है, सुखी है, और वही सबसे धनवान है। भगवान धन्वन्तरि जो चिकित्सा के देवता भी हैं। उनसे स्वास्थ्य और सेहत की कामना के लिए संतोष रूपी धन से बड़ा कोई धन नहीं है। लोग इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी, गणेश की पूजा हेतु मूर्ति भी खरीदते हैं।

धनतेरस पर घर के दक्षिण में दीपक रखने की प्रथा
धनतेरस की शाम घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाने की प्रथा भी है। लोककथाओं के अनुसार माना जाता है कि किसी समय में एक राजा थे जिनका नाम हेम था। देव कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। ज्योतिषियों ने जब बालक की कुण्डली बनाई तो पता चला कि बालक का विवाह जिस दिन होगा उसके ठीक चार दिन के बाद वह मृत्यु को प्राप्त होगा। राजा इस बात को जानकर बहुत दुखी हुआ और राजकुमार को ऐसी जगह पर भेज दिया जहां किसी स्त्री की परछाई भी न पड़े। देवयोग से एक दिन एक राजकुमारी उधर से गुजरी और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गए और उन्होंने गन्धर्व विवाह कर लिया। विधि का विधान सामने आया और विवाह के चार दिन बाद यमदूत उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे। जब यमदूत राजकुमार प्राण ले जा रहे थे उस वक्त नवविवाहिता उसकी पत्नी का विलाप सुनकर उनका हृदय भी द्रवित हो उठा। परन्तु विधि के अनुसार उन्हें अपना कार्य करना पड़ा।

यमराज को जब यमदूत यह कह रहे थे, उसी समय उनमें से एक ने यम देवता से विनती की- हे यमराज! क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु से मुक्त हो जाए। दूत के इस प्रकार अनुरोध करने से यम देवता बोले, हे दूत! अकाल मृत्यु तो कर्म की गति है, इससे मुक्ति का एक आसान तरीका मैं तुम्हें बताता हूं, सो सुनो। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी रात जो प्राणी मेरे नाम से पूजन करके दीपमाला दक्षिण दिशा की ओर भेट करता है, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। यही कारण है कि लोग इस दिन घर के आँगन की दक्षिण दिशा में यम देवता के नाम पर दीप जलाकर रखते हैं और यम देवता के नाम पर व्रत भी रखते हैं।

भगवान धन्वंतरि जी और देवी लक्ष्मी का जन्म
दीपावली की रात भगवान श्री गणेश व देवी लक्ष्मी के लिए भोग चढ़ाया जाता है। कहा जाता है कि समुद्र मन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि और मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था, यही कारण है कि धनतेरस को भगवान धन्वन्तरि और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है ।

जैन समुदाय में धन्य तेरस का महत्व :
जैन आगम में धनतेरस को ‘धन्य तेरस’ या ‘ध्यान तेरस’ भी कहते हैं। भगवान महावीर इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिए चले गए थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुए। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
                                                                                                   -राजेंद्र कुमार शर्मा


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