Tuesday, April 7, 2026
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करोड़ों की लागत से बना एस्केलेटर फांक रहा धूल

  • सिटी रेलवे स्टेशन पर एस्केलेटर का सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने किया था उद्घाटन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: केंद्र सरकार रेलवे विभाग पर आने वाले यात्रियों की सुविधाओं के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन सिटी स्टेशन विभाग इसको लेकर सक्रिय नहीं हो पाया है। करीब दो वर्ष पूर्व सरकार ने करोड़ों रुपये की लागत से एस्केलेटर यात्रियों की सहूलियत की लिए सिटी स्टेशन पर लगाया था। जिसका उद्घाटन सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने किया था। जिसके बाद यात्रियों को इसका लाभ कुछ ही दिन मिल पाया।

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जिसके बाद से ही एस्केलेटर सफेद हाथी बना हुआ है। रेलवे बिजली की बचत करने की वजह से इसको चला नहीं रहा। जिस कारण लोगों को पैदल एलीवेटर से ही एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाते हैं। वहीं, कुछ यात्री सीढ़ियों पर चढ़ने की बजाय जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन को जाकर पार करते हैं। जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जबकि वहां आरपीएफ पुलिस फोर्स भी मौजूद रहती है। जिनकी नजर बचते ही यात्री लाइन क्रॉस कर लेते हैं।

सिटी स्टेशन बड़े स्टेशनों में से है। जिस पर लाखों की संख्या में यात्री सफर करते हैं। जहां, पर एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए पैदल सीढ़िया लगी हुई है, लेकिन केंद्र सरकार ने यात्रियों की सुविधाओं के लिए प्लेटफार्म नंबर-दो पर एस्केलेटर लगवाया था। जिसमें करीब करोड़ों की लागत से लगी है। जिसका लाभ यात्रियों को कुछ ही दिन मिल पाया। जिसके बाद से स्टेशन पर लगा एस्केलेटर सफेद हाथी बनकर रह गया है।

वहीं, बीच-बीच में कई बार एस्केलेटर को ठीक कराया गया। जिसके बाद वह कुछ ही दिन चलकर बंद हो गई है। वहीं, स्टेशन मास्टर ने बताया कि एस्केलेटर चालू है और यह आॅटोमेटिक है। यदि यात्री 25 मिनट तक इसका प्रयोग नहीं करते हैं तो यह स्वत: ही बंद हो जाती है और फिर यह बटन दबाने पर ही चालू होती है, लेकिन बड़ी बात तो यह है कि वहां इसे चालू करने के लिए किसी कर्मचारी की ड्यूटी भी नहीं लगाई है और वहां आने वाले यात्रियों को इसे चालू करने के बारे में नहीं पता चल पाता है।

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जिस वजह से यात्री इस पर चलकर ही ऊपर नीचे जाते हैं। एस्केलेटर पर नीचे और ऊपर लाल रंग का बटन है। जिसको दबाने पर भी वह चलती नहीं है। स्टेशन पर मौजूद रहने वाले लोगों ने बताया कि करीब डेढ़ माह से इसको चलते हुए नहीं देखा है। इस प्रक्रिया को देखते हुए तो रेलवे यात्रियों की आंखों में धूल झोंकता नजर आ रहा है।

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