Friday, May 1, 2026
- Advertisement -

अर्थव्यवस्था पर चोट करती जाली करेंसी

02 13
अर्थव्यवस्था पर चोट करती जाली करेंसी 2

देश में जाली नोटों का कारोबार कई राज्यों में फैला हुआ है, इसमें से कुछ जाली करेंसी विदेशों से आई है तो कुछ भारत में ही तैयार की गई है। अभी तक पांच सौ, हजार और सौ-सौ के नकली नोट ही सिरदर्द बने थे। परंतु अब पचास, बीस और दस रुपये के नकली नोटों का धड़ल्ले से चलन व्यवसाई, पुलिस और सौदागर छोटे-बड़े नकली नोटों की खपत ग्रामीण बाजारों में आसानी से करा लेते हैं। उत्तर प्रदेश के सीतापुर में बीती 18 जनवरी को थाना बिसवां पुलिस ने गुलजारशाह मेले के करीब एक लाख के नकली नोटों के साथ एक महिला सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। बीती 1 जनवरी को हरियाणा के फरीदाबाद में पुलिस ने नकली नोट बनाकर मार्किट में चलाने के आरोप में दो युवकों को गिरफ्तार किया था। बीती 17 जनवरी को महाराष्ट्र के यवतमाल जिले की पुसद पुलिस ने एक बड़े जाली नोट नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। गत 5 जनवरी को उत्तर प्रदेश के बांदा में पुलिस ने नकली भारतीय मुद्रा तैयार कर उसे बाजार में खपाने वाले एक संगठित अन्तर्जनपदीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था।

बीती 13 जनवरी को गुजरात सूरत में नकली नोटों के रैकेट को लेकर पुलिस ने भीड़ भाड़ वाले इलाकों में छोटे दुकानदारों को निशाना बनाकर नकली नोट चलाने वाला एक हीरा कारीगर को गिरफ्तार किया है। बीते साल नवंबर में भोपाल पुलिस ने 21 साल के एक युवक को वीडियो देखकर अपने घर को नकली नोटों की फैक्ट्री में बनाने के आरोप में पकड़ा था। इसमें कोई दो राय नहीं है कि हमारा देश डिजिटल लेनदेन के मामले में अग्रणी बना हुआ है और यहां दुनिया भर में होने वाले लगभग आधे रियल टाइम लेन-देन डिजिटल भुगतान के जरिये ही होते हैं। हालांकि, नकदी रहित अर्थव्यवस्था का सरकारी महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करने के मार्ग में अभी तमाम बाधाएं विद्यमान हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि अभी भी अर्थव्यवस्था में नकली करेंसी की मौजूदगी बनी हुई है।

देश में नकली नोटों का नेक्सस लगातार फैलता जा रहा है, जो देश की बैंकिंग सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। नकली नोटों का यह नेटवर्क सीधे तौर पर भारत के बैंकों को निशाना बना रहा है। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने कई बैंकों की शिकायत पर एक केस दर्ज किया है, जो काफी चौंकाने वाला है। इस मामले में 18 सरकारी और प्राइवेट बैंक शामिल हैं। बैंकों का कहना है कि उनके यहां करीब 11 हजार नकली करेंसी नोट जमा किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 34 लाख रुपये है। यह अपने आप में एक गंभीर और हैरान करने वाली बात है कि देश के बैंकों में इतने नकली नोट कैसे जमा हो पा रहे हैं।

सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि बीते सालों के दौरान नकली नोटों के पकड़े जाने के मामलों में तेजी आई है। इससे पता चलता है कि नकली नोटों का चलन तेज हुआ है। पिछले कुछ सालों में नकली नोटों की समस्या ने देश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 500 रुपये के नकली नोटों में वित्त वर्ष 2019 से 2023 के बीच 317 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। जहां 2019 में यह संख्या 21,865 मिलियन पीस (एमपीसी) थी, वहीं 2023 में यह बढ़कर 91,110 एमपीसी तक पहुंच गई। हालांकि वित्त वर्ष 2024 में यह संख्या घटकर 85,711 एमपीसी पर आ गई।

केंद्रीय बैंक आरबीआई के गवर्नर ने एक संसदीय समिति को जानकारी दी है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान कुल छह करोड़ से ज्यादा नोटों में से पांच सौ रुपये के 1.18 लाख नोट नकली पाए गए हैं। केंद्रीय बैंक की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि इन नोटों की संख्या में एक साल में 37 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है। जो यह दशार्ता है कि कालाबाजारी करने वाले राष्ट्र विरोधी तत्व देश में मुद्रा की मांग का गलत फायदा उठा रहे हैं। वर्ष 2016 में नोटबंदी के फैसले का उद्देश्य नकली नोटों और भ्रष्टाचार को रोकना था। लेकिन मौजूदा आंकड़े इस कदम की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हैं। नकली नोटों का बढ़ता जाल संकेत देता है कि असामाजिक तत्व नए-नए तरीके अपनाकर इस चुनौती को और जटिल बना रहे हैं। विडंबना यह है कि राजस्व खुफिया निदेशालय द्वारा नोट में इस्तेमाल होने वाले आयातित कागज और नकली नोट छापने में शामिल आॅपरेटरों पर लगातार कार्रवाई के बावजूद यह गंभीर समस्या बनी हुई है। वास्तव में, हाल के वर्षों में, भारत ने नकली नोटों की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने व काले धन पर रोक के लिये डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिये अपनी स्थिति खासी मजबूत की है। सरकार की सोच है कि काले धन पर रोक लगाने के लिए नकद लेन-देन को हतोत्साहित किया जाए।

नोटबंदी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था लेस कैश सोसाइटी की ओर अग्रसर है। डिजिटल ट्रांजेक्शन्स 300 प्रतिशत तक बढ़े है। कैशलेस लेनदेन लोगों के जीवन को आसान बनाने के साथ-साथ हर लेनदेन से काले धन को हटाते हुए क्लीन इकोनॉमी बनाने में भी मददगार साबित हुआ है। निस्संदेह, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ने भारत के आर्थिक लेन-देन तंत्र में क्रांति ला दी है। भुगतान के तमाम विकल्पों ने भारतीय नागरिकों के आर्थिक व्यवहार को बहुत आसान बना दिया है। हालांकि, अभी भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो डिजिटल माध्यम से लेन-देन में परहेज करते हैं। असल में, नकदी पर उनकी निर्भरता का मूल कारण डिजिटल शिक्षा का अभाव ही है।

साथ ही इसके कारणों में भ्रष्टाचार और कर चोरी की नीयत भी शामिल है। ऐसे में सरकार को डिजिटल खाई को पाटने की दिशा में रचनात्मक पहल करनी चाहिए। वहीं दूसरी आर्थिक अनियमितताएं करने वाले तत्वों से भी सख्ती से निबटा जाना चाहिए। नोटबंदी के नौ साल से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी रियल एस्टेट क्षेत्र में काले धन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल बना हुआ है। बेशक, डिजिटल युग में भी ‘नकदी ही राजा है’ मानने वालों को रोकने के लिये जांच और कानूनों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। इस दिशा में भी गंभीरता से विचार करना चाहिए कि भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश में लगी विदेशी ताकतों की नकली करेंसी के प्रसार में क्या भूमिका है। पाकिस्तान से आतंकी संगठनों के लिये नकली करेंसी के उपयोग की खबरें सामने आती रही हैं।

नकली नोटों के चलन को रोकने में सबसे बड़ी बाधा जागरूकता का अभाव है। ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के कम पढ़े-लिखे होने का फायदा उठाकर नकली नोटों के सौदागर अपना लक्ष्य आसानी से पूरा कर लेते हैं। जालसाज टेक्नोलॉजी की मदद से हूबहू असली नोटों से मिलते जुलते नकली नोट बना रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि नकली नोटों का बढ़ना न केवल अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि यह आम जनता के विश्वास को भी कमजोर करता है। नकली नोटों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए तकनीकी सशक्तिकरण, कड़ी निगरानी, और जागरूकता अभियान जरूरी है।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

किसानों के लिए वरदान हैं बैंगन की टॉप 5 किस्में

किसानों के लिए बैंगन की खेती में बेहतर उत्पादन...

धान उगाने की एरोबिक विधि

डॉ.शालिनी गुप्ता, डॉ.आर.एस.सेंगर एरोबिक धान उगाने की एक पद्धति है,...

बढ़ती मांग से चीकू की खेती बनी फायदेमंद

चीकू एक ऐसा फल है जो स्वाद के साथ-साथ...

झालमुड़ी कथा की व्यथा और जनता

झालमुड़ी और जनता का नाता पुराना है। एक तरफ...

तस्वीरों में दुनिया देखने वाले रघु रॉय

भारतीय फोटो पत्रकारिता के इतिहास में कुछ नाम ऐसे...
spot_imgspot_img