Saturday, August 22, 2026
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मशरूम की खेती से किसान बन रहे आत्मनिर्भर

  • अच्छे उत्पादन के चलते किसानों का रुझान मशरूम की खेती की ओर बढ़ा
  • आय दोगुनी करने में मशरूम की खेती किसानों के लिए बनी मददगार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: किसानों की आय दोगुनी करने में अब मशरूम की खेती मददगार होगी। इसके लिए सरकार नकदी उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे कम लागत में अधिक आय अर्जित की जा सके। कृषि उद्यान विभाग के अधिकारी ने बताया कि अच्छे उत्पादन के चलते कई किसानों का रुझान मशरूम की खेती की ओर बढ़ रहा है।

जिले में किसानों की आय दोगुनी करने में अब मशरूम की खेती मददगार साबित हो रही है। इसे बेचने के लिए इन्हें किसी बाजार अथवा बिचौलिए की भी आवश्यकता नहीं है। किसानों ने खेतों के साथ-साथ खाली स्थानों और घरों में कंपोस्ट बैड और पेटी बनाकर मशरूम की खेती उगानी शुरू की है।

अलीगढ़, आगरा, जयपुर और दिल्ली के होटल संचालक कांट्रेक्ट खेती के रूप में किसानों से मशरूम उत्पादन करा रहे हैं और अच्छा मुनाफा देकर खरीद कर रहे हैं। किसानों को इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों से मशरूम की खेती को अधिक बढ़ावा दिया जा रहा है, क्योंकि यह सेहतमंद व प्रोटीनयुक्त होने के चलते बाजार में लगातार इसकी मांग भी बढ़ी है।

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साथ ही मशरूम की खेती कम जगह तथा कम समय में करके अधिक मुनाफा भी कमा सकते हैं। मशरूम उत्पादन के बारे में बताया कि सफेद बटन मशरूम की खेती अक्टूबर से फरवरी-मार्च तक होती है। मिल्की मशरूम की खेती जून से सितंबर तक की जाती है, जबकि ढिगरी मशरूम का उत्पादन मार्च से मई तक होता है। चिलर प्लांट लगाने के बाद सालभर मशरूम का उत्पादन हो सकेगा।

बटन मशरूम की खेती

बटन मशरूम निम्न तापमान वाले क्षेत्रों में अधिक उगाया जाता है, लेकिन अब ग्रीन हाउस तकनीक द्वारा यह हर जगह उगाया जा सकता है। सरकार द्वारा बटन मशरूम की खेती के प्रचार-प्रसार को भरपूर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। अब इसका उत्पादन 20 किग्रा प्रति वर्गमीटर से अधिक है दस पहले तक प्रति वर्ग मीटर मात्र तीन किलो ही था। उत्तर प्रदेश में इसका अच्छा उत्पादन हो रहा है।

बटन मशरूम की तुड़ाई

बुवाई के बाद पेटी या थैलियों को वहां रख दें, जहां पर उत्पादन करना हो। इन पर पुराने अखबार बिछाकर पानी से भिगो दें। कमरे में पर्याप्त नमी बनाने के लिए कमरे के फर्श व दीवारों पर भी पानी छिड़कते रहें। इस समय कमरे का तापमान 22 से 26 डिग्री सेंटीग्रेड और नमी 80 से 85 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए।

अगले 15 से 20 दिनों में खुम्बी का कवक जाल पूरी तरह से कम्पोस्ट में फैल जाएगा। इन दिनों खुम्बी को ताजा हवा नही चाहिए इसलिए कमरे को बंद ही रखें। खुम्बी की बीजाई के 35-40 दिन बाद या मिट्टी चढ़ाने के 15-20 दिन बाद कम्पोस्ट के ऊपर मशरूम के सफेद घुंडिया देने लगती हैं, जो अगले चार-पांच दिनों में बढ़ने लगती हैं, इसको घूमाकर धीरे से तोड़ना चाहिए, इसे चाकू से भी काट सकते हैं।

किसानों की हो रही अच्छी कमाई

जिले के दर्जन से अधिक किसान मशरूम की खेती करने लगे हैं। किसान सत्यवीर सिंह ने 2009 में कृषि विज्ञान केंद्र की सहायता से उन्होंने मशरूम की खेती की शुरुआत की। वो बताते हैं, साल 2009 में मैंने मशरूम की खेती 30 कुंतल कंम्पोस्ट के एक छोटी सी झोपड़ी बनाकर शूरू की थी।

आज लगभग 6000 बैग्स में बटन मशरूम लगाता हूं और आठ हजार बैग आॅयस्टर मशरूम के लगता हूं। बताते हैं कि शुरू में मुझे परेशानी हुई थी, लेकिन मैंने प्रशिक्षण लिया और अब वह सहायता कर रहा हैं।

कम लागत, अधिक मुनाफा

पेटी अथवा कंपोस्ट बेड गोबर, कबूतर का मल, केंचुए और मिट्टी के मिश्रण से तैयार कर दिल्ली और रुड़की से बटन मशरूम का बीज मंगाकर बिजाई की जाती है। एक पौधा एक से दो किलो मशरूम नौ से 10 बार उत्पादन करता है। फसल को पानी, पेस्टीसाइट, यूरिया, डीएपी का खर्च भी नहीं है और 300 से 350 रुपये प्रति किलो होटल संचालक खरीदते हैं।

मशरूम में विभिन्न प्रकार के विटामिन, खनिज और एंटीआक्सीडेंट होते हैं। बाजार में मशरूम की फसल की मांग काफी बढ़ी है। दो वर्षों में सैकड़ों किसानों ने मशरूम की खेती को अपनाया है। मशरूम एक उत्पाद है, जिसे एक कमरे में भी उगाया जा सकता है, इसको उगाकर किसान अपनी आय दोगुनी ही नहीं चौगुनी कर सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बाजार में मशरूम की मांग तेजी से बढ़ी है, जिस हिसाब से बाजार में इसकी मांग है। ऐसे में किसान मशरूम की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

आॅयस्टर मशरूम उगाने का तरीका

आॅयस्टर मशरूम की खेती बड़ी आसान और सस्ती है। इसमें दूसरे मशरूम की तुलना में औषधीय गुण भी अधिक होते हैं। आॅयस्टर की खेती के बारे में कहते हैं, स्पॉन (बीज) के जरिए मशरूम की खेती की जाती है, इसके लिए सात दिन पहले ही मशरूम के स्पॉन (बीज) लें, ये नहीं की एक महीने मशरूम का स्पान लेकर रख लें, इससे बीज खराब होने लगते हैं। इसके उत्पादन के लिए भूसा, पॉलीबैग, कार्बेंडाजिम, फॉर्मेलिन और स्पॉन (बीज) की जरूरत होती है। 10 किलो भूसे के लिए एक किलो स्पॉन की जरूरत होती है, इसके लिए पॉलीबैग, कार्बेंडाजिम, फॉर्मेलिन, की जरूरत होती है।

15 दिन में मिलने लगेगा आॅयस्टर

बैग में स्पॉन लगाने के बाद 15 दिन में इसमें आॅयस्टर की सफेद-सफेद खूटियां निकलने लगती हैं, ये मशरूम बैग में चारों तरफ निकलने लगता है। इस मशरूम में सबसे अच्छी बात होती है। इसे किसान सुखाकर भी बेच सकते हैं, इसका स्वाद भी तीनों मशरूम में सबसे बेहतर होता है।

बटन मशरूम की बीजाई या स्पानिंग

मशरूम के बीज को स्पान कहतें हैं। बीज की गुणवत्ता का उत्पादन पर बहुत असर होता है, इसलिए खुम्बी का बीज या स्पान अच्छी भरोसेमंद दुकान से ही लेना चाहिए। बीज एक माह से अधिक पुराना भी नही होना चाहिए।

तीन तरह के मशरूम की कर सकते हैं खेती

1. बटन मशरूम

2. ढिंगरी मशरूम (आॅयस्टर मशरूम)

3. दूधिया मशरूम (मिल्की)

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