Friday, May 1, 2026
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कानून का खौफ…तलाक का ग्राफ गिरा

  • तीन तलाक के खिलाफ कानून आने से खत्म हुर्इं दुश्वारियां, जागी उम्मीद की किरण
  • ‘मोदी मैजिक’ में छिपा मुस्लिम महिलाओं की खुशहाली का राज

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एक समय था जब तीन तलाक के नाम पर न जाने कितनी महिलाओं की जिन्दगी से खिलवाड़ किया गया। न जाने कितनी ही महिलाओं के घर बर्बाद हुए। कई केस में तो ऐसा भी देखने को मिला कि मां बाप का साया ही उनके बच्चों के सिरों से उठ गया और वो ‘यतीम’हो गए। कहा जाता है कि जब किसी की सिसकियां निकलती हैं तो उनसे ‘अर्श ए इलाही’ तक कांप जाता है।

तीन तलाक के नाम पर मुुस्लिम महिलाओं को छलने के सदियों से चले आ रहे इस तथाकथित नाटक पर ‘मोदी मैजिक’ ने ब्रेक लगा दिया। जानकारों के अनुसार ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून लागू होने के बाद तीन तलाक के मामलों में 70 से 80 फीसदी तक कमी दर्ज की गई है। एडवोकेट रियासत अली कहते हैं कि कानून आने से पूर्व तीन तलाक जैसे मामलों की संख्या बहुत ज्यादा थी, जो अब गिनती की रह गई है।

दारुल कजा ने टूटने से बचाया कई घरों को

जहां तीन तलाक के खिलाफ बने कानून का डर समाज में हावी रहा वहीं दूसरी ओर दारुल कजा (पूर्व नाम शरई अदालत) ने भी अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी अंजाम दिया और कई घरों को टूटने से बचाया। दरअसल दारुल कजा आॅल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अधीन काम करने वाली वो संस्था है जो कि आपसी घरेलू झगड़ों का आधार बनने वाली ट्रिपल तलाक जैसे मामलों में संबधित परिवार की काउंसलिंग कर उन्हें तलाक के दरवाजे तक पहुंचने ही नहीं देता।

मेरठ के दारुल कजा ने निमटाए डेढ़ सौ से ज्यादा मामले

मेरठ में भी दारुल कजा है। यहां हापुड़ रोड स्थित मदरसा जामिया मदनिया में इसका सेंटर है। यहां मेरठ के अलावा हापुड़, बुलन्द शहर, गौतमबुद्धनगर, बिजनौर , बागपत व आगरा सहित विभिन्न जिलों के मामले सुने गए हैं। दारुल कजा के मुुफ्ती हस्सान कासमी बताते हैं कि इन डेढ सौ मामलों में बड़ी संख्या में तलाक की नौबत वाले मामले थे जिन्हें सुना गया और काउंसलिंग के माध्यम से इन्हें सुलझाया गया।

मुफ्ती हस्सान के अनुसार जब से तीन तलाक के खिलाफ कानून अमल में आया है तब से तीन तलाक के मामलों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वो इसके लिए जहां केन्द्र सरकार के इस कानून की सराहना करते हैं वहीं यह भी कहते हैं कि अन्य धर्मों को भी चाहिए कि वो अपने यहां अपने धर्म की मान्यताओं के अनुसार दारुल कजा जैसी अदालतें स्थापित करें ताकि हर धर्म में महिलाओं को उनका हक दिलाया जा सके।

अदालतों का बोझ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका में दारुल कजा

मुफ्ती हस्सान कासमी के अनुसार दारुल कजा जहां मुस्लिमों के मसाइलों को हल करने का बेहतरीन प्लेटफॉर्म है वहीं इसकी स्थापना से अदालतों का बोझ भी किसी हद तक कम हुआ है। बकौल मुफ्ती हस्सान कासमी अभी भी लगभग साढ़े तीन करोड़ मामले अदालतों में पन्डिंग हैं और दारुल कजा मियां बीवी के झगड़ों और तलाक जैसे मामलों को हल कराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है जिससे सरकारी अदालतों का बोझ किसी हद तक कम हुआ है।

क्या है दारुल कजा?

यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां शरीयत की रोशनी में पूरी जिम्मेदारी के साथ दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की हर संभव कोशिश की जाती है।

तीन तलाक के खिलाफ जो कानून मोदी सरकार ने बनाया है तो काबिल ए तारीफ है। इससे महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा में भी कमी आई है।-अरजुमन्द ताज (सदर बाजार)

तीन तलाक कानून से पूर्व कोई भी व्यक्ति हठधर्मिता की सभी हदें पार कर मिनटों सेकेण्डों में तीन तलाक बोलकर भरा पूरा परिवार पल भर में उजाड़ देता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है।-रिफत खान (शास्त्री नगर)

तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर प्रधानमंत्री ने यह साबित कर दिया कि मोदी है तो मुमकिन है। इस कानून को लेकर महिलाएं प्रधानमंत्री की सदैव आभारी रहेंगी।-सुल्ताना परवीन (समर गार्डन)

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