Thursday, July 2, 2026
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पांच और किसान मेडा को करेंगे बैनामे

  • अब प्राधिकरण की न्यू टाउनशिप स्पीड पकड़ती हुई आने वाली है नजर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: इंटीग्रेटेड टीओडी टाउनशिप के लिए बैनामे आरंभ हो गए हैं। आठ किसानों ने बैनामे कर दिये हैं, जबकि पांच बैनामों की फाइल और तैयार हो गई हैं। इनमें से एक बैनामे पर शनिवार को हस्ताक्षर हो जाएंगे। इसमें मोहिउद्दीनपुर के किसानों ने बैनामे की पहल की हैं। अब प्राधिकरण की न्यू टाउनशिप स्पीड़ पकड़ती हुई नजर आने वाली हैं। प्राधिकरण किसानों को 1950 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भुगतान कर रहा हैं। इस तरह से चार गुना किसानों को नई जमीन अधिग्रहण नीति के तहत दिया जा रहा हैं।

यही नहीं, किसी किसान की जमीन आॅन रोड हैं तो उसे इसमें बीस फीसदी अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। किसान की खेत में ट्यूबवेल लगी है तो उसका भी भुगतान किया जा रहा हैं। मकान बना है तो उसका आंकलन करने के बाद भुगतान प्राधिकरण किसान को कर रहा हैं। वर्तमान में जिन किसानों ने बैनामा किया हैं, उसमें खसरा संख्या 137,140, व 142 शामिल हैं।

15 किसानों के अभी बैनामे हुए हैं। किसानों को 9.82 करोड़ रुपये मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से भेज दिया गया हैं। ये पूरा भुगतान बैंक खातों में भेजा गया हैं। ये न्यू टाउन शिप शहर के लिए अहम होगी। क्योंकि रैपिड रेल के संचालन के बाद दिल्ली के लोग भी मेरठ में आवास तलाश सकते हैं, जो न्यू टाउनशिप से बेहतर कोई नहीं हो सकती। क्योंकि दिल्ली एक्सप्रेस-वे इससे एक दम सटकर होगा तथा रैपिड रेल का स्टेशन मोहिउद्दीनपुर में होगी तथा परतापुर में भी।

इस तरह से ये दोनों स्टेशन न्यू टाउनशिप के एक दम करीब होंगे। मेरठ विकास प्राधिकरण की ये न्यू टाउनशिप अब तक की सबसे बड़ी आवासीय कॉलोनी बनेगी। प्राधिकरण शनिवार को फिर कुछ किसानों के बैनामे करेगा। पांच किसान और बैनामे करने के लिए तैयार हो गए हैं।

निर्माण अपशिष्ट से बने लाखों ब्लॉक किए उपयोग

पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से एनसीआरटीसी दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर पर निर्माण कार्य के फलस्वरूप निकलने वाले कन्स्ट्रकशन एंड डेमोलिशन अपशिष्ट का पुन: इस्तेमाल कर रहा है। इसके लिए एनसीआरटीसी ने इन अपशिष्टों से लाखों ब्लॉक तैयार किए हैं और उनका विभिन्न स्टेशनों आदि मे इस्तेमाल हो रहा है।

कॉरिडॉर के निर्माण कार्य के दौरान काफी मलबा निकलता है। इस मलबे को गाजियाबाद के कन्स्ट्रक्शन एंड डेमोलिशन वेस्ट प्लांट में भेजा जाता है। वहां, बड़ी मशीनों आदि की मदद से उस मलबे को क्रश कर फिर से उपयोग के लिए तैयार किया जाता है। इस क्रशर से ब्लॉक बनाए जाते हैं और उन ब्लॉक का इस्तेमाल स्टेशन पर निर्माण कार्य में होता है। मेरठ में ब्रह्मपुरी से मोदीपुरम स्टेशन के बीच इस अपशिष्ट से बने करीब 2.5 लाख ब्लॉक का निर्माण कार्य में इस्तेमाल किया गया है।

स्टेशन में सीढ़ियों के निर्माण में भी इन ब्लॉक का इस्तेमाल किया जाता है। निर्माण कार्य के दौरान प्रदूषण को कम करने के लिए लगातार प्रयास किया जाता है। धूल-मिट्टी न उड़े इसके लिए दिन मे कई बार पानी का छिड़काव भी किया जाता है। वहीं, सेगमेंट, गिर्डर, बीम आदि जैसी कंक्रीट संरचनाएं खुले में बनाने के बजाय इन्हें कास्टिंग यार्ड में तैयार किया जाता है। यात्रियों को गर्मी से बचाने के लिए स्टेशनों को तो हवादार बनाया ही है,

ईको-फ्रेंडली बनाने के लिए लाखों पेड़ और पौधे भी लगाए जा रहे हैं। एनसीआरटीसी ने निरंतर पर्यावरण-अनुकूल प्रक्रियाओं को अपनाया है। फिलहाल साहिबाबाद से मोदीनगर नॉर्थ तक 8 स्टेशनों के साथ 34 किलोमीटर सेक्शन पर नमो भारत ट्रेन का संचालन हो रहा है। जून 2025 तक सम्पूर्ण कॉरिडोर को परिचालित करने के लक्ष्यानुसार कार्य हो रहा है।

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