Wednesday, May 13, 2026
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प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए पांच नई गन्ना किस्में स्वीकृत

  • समिति की संस्तुति उपरान्त होगा निर्णय, तब तक इसकी बुआई नहीं करने का किसानों को सुझाव
  • पुरानी एवं कृषकों में अलोकप्रिय हो चुकी 12 गन्ना किस्मों को स्वीकृत किस्मों की सूची से किया विलोपित

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए पांच नई गन्ना प्रजातियों को स्वीकृति दी गई है। वर्तमान में प्रदेश में लाल सड़न रोग का प्रभाव मुख्यत: इसके नवीन प्रभेद सीएफ13 के कारण है, और स्वीकृत हो रही सभी पांच किस्में लाल सड़न रोग के नवीन प्रमेद सी. एफ 13 से मध्यम रोगरोधी पायी गयी है। अत: इन पर लाल सड़न रोग का प्रभाव कम होगा। ये किस्में जमाव, व्यांत, मिल योग्य गन्नों की संख्या, उपज एवं पेड़ी क्षमता तथा गुणवत्ता में भी श्रेष्ठ है।

आरपीओ डा. बीके गोयल ने लखनऊ से मिली जानकारी साझा करते हुए बताया कि गन्ना आयुक्त कार्यालय, डॉलीबाग, लखनऊ में प्रदेश के आयुक्त गन्ना एवं चीनी संजय और भूसरेड्डी की अध्यक्षता में बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में उप्र गन्ना शोध परिषद्, शाहजहांपुर द्वारा विकसित मध्य देर से पकने वाली किस्में को.शा. 16233 एवं को.शा.15233 के आंकड़े प्रस्तुत किये गये।

प्रस्तुत आंकड़ों पर अध्यक्ष एवं समिति के सभी सदस्यों ने गहन विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से इन दोनों किस्मों को व्यावसायिक खेती के लिए सम्पूर्ण उप्र के लिए स्वीकृत किया गया। को.शा. 16233 की औसत उपज 87.65 टन प्रति हेक्टेअर तथा पोल इन केन औसत 14.07 प्रतिशत है। को. शा. 15233 की औसत उपज 93.48 टन प्रति हेक्टेअर तथा पोल इन कंन औसत 13.85 प्रतिशत है।

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बैठक में अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना के अन्तर्गत नार्थ सेन्ट्रल जोन के लिए नोटीफाइड शीघ्र पकने वाली किस्म को.लख. 15466 को पूर्वी उप्र के लिए अंगीकृत किया गया। जिसकी औसत उपज 85.97 टन प्रति हेक्टेअर तथा पोल इन केन 13.54 प्रतिशत है। साथ ही अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना के अन्तर्गत नार्थ वेस्ट जोन के लिए नोटीफाइड मध्य देर से पकने वाली किस्म को.लख. 14204 एवं को.लख. 15207 को मध्य एवं पश्चिमी उप्र के लिए अंगीकृत किया गया।

जिसकी औसत उपज कमश: 9273 टन प्रति हेक्टेअर तथा 84.53 टन प्रति हेक्टेअर तथा पोल इन केन कमश: 1355 प्रतिशत एवं 14.60 प्रतिशत है। आयुक्त गन्ना एवं चीनी संजय और भूसरेड्डी ने बताया कि को. शा. 16233 एवं को. लख. 14204 गन्ना किस्में मध्य देर से पकने वाली गन्ना किस्म के रूप में जारी की गई है, किन्तु इसकी उपज एवं चीनी परता कई अगेती किस्मों के समतुल्य है। अत: ये किसमें किसानों के लिए गन्ना खेती में किस्म विविधता के दृष्टिगत उपयुक्त किस्म साबित हो सकती है।

इसके अतिरिक्त प्रदेश की पुरानी गन्ना किस्मों के वर्तमान गन्ना क्षेत्रफल, कृषकों में लोकप्रियता का स्तर एवं इनके गुणदोष तथा वर्तमान विकल्पों पर विचार करते हुए अलोकप्रिय एवं नगण्य आच्छादन वाली पुरानी गन्ना किस्मों जैसे यू.पी. 0097. को शा. 98259 को. शा. 94257 को जा. 20193 को 0124, को. शा. 96269 को पन्त 84212, को. 87268 को 87263 को 89029 को से 01235 तथा यू.पी 39 को स्वीकृत गन्ना किस्मों की सूची से विलोपित कर दिया गया।

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